कोरोना काल में उठती अंधविश्वास की लहर

नेहा राठौर

भारत एक धार्मिक और आस्था से परिपूर्ण देश है। यहां विश्वास को अंधविश्वास में बदलते देर नहीं लगती। ऐसे ही कुछ किस्से देश के अलग-अलग राज्यों से सामने आए हैं। जिस कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को अपनी जकड़ में घेर रखा है। वहीं भारत एक ऐसा देश है जहां इस महामारी को कमाचीपुर, केरला, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में देवी का स्वरूप बना दिया गया है। लोगों के मुताबिक यह कोरोना देवी का ही कोप है जो भारत को यह दिन देखना पड़ रहा है। हर दिन लाखों लोगों की जान जा रही हैं। वहीं, बिहार में कई महिलाएं मिलकर कोरोना देवी को मनाने की कोशिश में लगी थी।

ये तो कुछ भी नहीं है उत्तराखंड में महिलाओं ने कोरोना को भगाने के लिए कलश यात्रा भी निकाली थी। जगह- जगह लोग इस महामारी से बचने और इसे भगाने के लिए अतरंगी उपाय निकाल रहे हैं। पता नहीं उन्हें यह समझ नहीं आ रहा है या वो समझना ही नहीं चाहते कि ये महामारी किसी यज्ञ आदि से भागने वाली नहीं है। इसे सिर्फ कोरोना नियमों का पालन करके ही दूर किया जा सकता है। शायद यही कारण है कि भारतीयों के अंधविश्वास और भोलेपन की वजह से ही चालाक विदेशी लोग यहां राज कर पाए। लेकिन अब तो हद ही हो गई है। कोरोना का मंदिर, कलश यात्रा, यज्ञ, हवन अंधविश्वास की सीमा यहीं खत्म नहीं होती। बल्कि यहां से शुरू हुई है।

अब जब देश में कोरोना के मामलों में कमी आ रही है। तो इन्ही लोगों का मानना है कि यह कोरोना देवी के कारण ही कम हुआ है। उन्होंने हम पर अपनी कृपा की है।

वहीं, ऐसा ही 2 जून को एक और अनोखा और अजीब मामला राजगढ़ से सामने आया था। जहां लोगों को कोरोना का कोई डर नहीं है। बिल्कुल बेफिक्र मानों कोरोना से इन्होंने दोस्ती कर ली हो। जो इन्हें कुछ नहीं करेगा। यहां लाखों लोगों एक देवस्थल के चारों तरफ से इकट्ठा हुए थे। जहां दो महिलाओं पर कथित कोई देवता आए थे। जिन्होंने उन्हें घर से बाहर निकलने को कहा और सभी लोग इतनी जल्दी बाहर मानों सच में कोरोना चला गया हो।

कहीं पर जादूई पेड़ से कोरोना को हटाने की बात हो रही है, तो कहीं पर दीया जलाकर कोरोना को मिटाने का दावा किया जा रहा है। और अब जब कोरोना कम हो रहा है तो बजाय इसके की पिछले डेढ़ साल से इस महामारी से लड़ रहे डॉक्टरों, फ्रांटलाइन वर्कर्स, पुलिस आदि को धन्यवाद किया जाए, लोग कोरोना माता को धन्यवाद कर रहे हैं। उनकी रोज सुबह शाम आराधना में जुटे हुए हैं।

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