मुस्लिम संख्या में वृद्धि धर्म की राजनीति के कारण: शिवसेना

मुम्बई। शिवसेना ने कहा है कि हाल में जारी जनगणना के आंकड़े परेशान करने वाले हैं और मुस्लिम जनसंख्या में बढ़ोतरी ‘‘धर्म की राजनीति’’ के कारण हुई है। महाराष्ट्र और केंद्र में राजग सरकार की घटक शिवसेना ने यह भी कहा कि देश अभी भी एक हिंदू राष्ट्र हैं जिसमें ‘‘धर्मनिरपेक्षता का जहर’’ है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित संपादकीय में कहा, ‘‘सक्रिय हिंदुत्व ताकतों को जारी किये गए जनगणना के आंकड़ों को लेकर व्यग्र होने की जरूरत नहीं है। यद्यपि ये आंकड़े परेशान करने वाले हैं, लेकिन हम उन्हें अभी भी सकारात्मक रूप से लेने को तैयार हैं। वर्तमान समय में भारत में जितने हिंदू रह रहे हैं, उसे देखते हुए देश अभी भी एक हिंदू राष्ट्र है जिसमें अभी भी धर्मनिरपेक्षता का जहर है।’’

उसने कहा, ‘‘मुस्लिम जनसंख्या क्यों बढ़ रही है? यदि कोई इस पर विचार करेगा तो उसे पता चलेगा कि उसके पीछे धर्म की राजनीति है। कुछ ताकतों ने अभी से देश के इस्लामीकरण पर सोचना शुरू कर दिया है जिससे कि मुगल शासन वापस आ सके। हमें हैरानी नहीं होगी यदि अगले 50 वर्षों में मुगल शासन धर्मनिरपेक्षता की बोगी पर सवार होकर देश में वापस लौट आये।’’ शिवसेना ने इसके साथ ही 96 करोड़ हिंदुओं से कहा कि वे इन दुश्मन ‘‘ताकतों’’ से मुकाबले के लिए एकजुट हों। शिवसेना ने कहा कि ‘‘मस्जिदों और मदरसों’’ में चल रही गतिविधियों पर रोक लगायी जानी चाहिए। शिवसेना ने कहा, ‘‘मुस्लिमों की जनसंख्या इसलिए बढ़ रही है क्योंकि परिवार नियोजन के कोई कड़े नियम नहीं हैं। किसी व्यक्ति की चार बीवियां हो सकती हैं और वह 25 बच्चे पैदा कर सकता है। यदि हिंदू मानते हैं कि इस पर रोक लगायी जानी चाहिए, तो उन्हें सरकार को ऐसा करने को बाध्य करने के लिए अपनी संख्या के प्रभाव का इस्तेमाल करना चाहिए।’’ शिवसेना ने इसके साथ ही कहा कि वोट बैंक की राजनीति पर रोक लगायी जानी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मुस्लिम युवकों को उचित शिक्षा और अच्छी नौकरी मिले। शिवसेना ने कहा, ‘‘मुस्लिम आज पाकिस्तान की स्थिति देख रहे हैं। उन्हें अब विकास के उद्देश्य के लिए हिंदुओं के साथ आना चाहिए। उन्हें हिंदुओं को एक धर्म के तौर पर नहीं बल्कि एक भारतीय संस्कृति के तौर पर देखना चाहिए और मातृभूमि के समक्ष शीश झुकाना चाहिए।”

 

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