जानिए भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का महत्व

नेहा राठौर

आज भगवान जगन्नाथ की ओडिशा में रथ यात्रा का शुभारंभ होगा। इस पर सारी तैयारियां हो चुकी हैँ। साथ ही सावधानी बरते हुए पूरी जिला प्रशासन ने श्री जगन्नाथ मंदिर से श्री गुंडिचा मंदिर के बीच 3 किमी. लंबे ग्रांड रोड पर प्रतिबंध भी लगा दिया है, जहां मेडिकल इमरजेंसी को छड़कर बाकि सभी गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा। इस साल महामारी के कराण धार्मिक आयोजन के संचालन के लिए 65 दस्तों की तैनाती की गई है, इनमें से हर एक दस्ते में करीब 30 जवान है।

ओडिशा में स्थित जगन्नाथ पुरी धाम दुनियाभर में लोकप्रिय है। हर साल यहां करोड़ों श्रद्धालु दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं। यहां यह माना जात है कि भगवान जगन्नाथ का विशाल रथ खींचने से, उनके भक्तों को सौभाग्य मिलता है। लेकिन इस महामारी के कारण इस साल इसका आयोजन छोटे तौर पर किया गया है। यह यात्रा 30 जुलाई को समाप्त हो जाएगी।

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यात्रा का महत्व

आज के दिन हिंदू पांचाग के मुताबिक, हर साल जगन्नाथ रथ यात्रा निकालने का विधान है। इसकी धार्मिक मान्यता है कि जो इस यात्रा के दर्शन कर लेता वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है और मृत्यु के बाद मोक्ष पाता है। यह यात्रा जगन्नाथ धाम से निकल कर गुण्डीचा बारी जाएगी, जहां भगवान जगन्नाथ पूरे सात दिन तक विश्राम करेंगे, उसके बाद एकादशी की तिथि पर वापस अपने घर को लौटेंगे। माना जाता है कि जो भी व्यक्ति श्रद्धाभाव से रथ को खींचता है, उसे सौ यज्ञों के समान फल मिलता है।

श्री जगन्नाथ पुरी का जन्मदिन

इतना ही नहीं, यह भी कहा जाता है कि स्नान पूर्णिमा के दिन श्री जगन्नाथ पुरी का जन्मदिन मनाया जाता है। इस दिन प्रभु जगन्नाथ को श्री बलराम और बहन सुभद्रा के साथ रत्न जड़ित सिंहासन से उतार कर मंदिर के पास बने स्नान मंडप में नहलाया जाता है। यह भी माना जाता है कि इस स्नान के बाद भगवान बिमार हो जाते हैं। इसलिए उन्हें 15 दिनों चत एक कमरे में रखा जाता है। इस दौरान मंदिर के प्रमुख सेवकों और वैद्यों के अलावा उनसे कोई नहीं मिलता। पूरे 15 दिन बाद ही भक्त भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर सकते हैं।

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