कमला हैरिस ने रचा इतिहास , बनी उप-राष्ट्रपति

नेहा राठौर

अमेरिका में इतिहास रचने वाली कमला हैरिस ने 20 जनवरी को जो बाइडन से पहले, पहली अश्वेत और एशियाई-अमेरिकी के रूप में उप-राष्ट्रपति पद की शपथ ली। शुरुआत में भारतीय-जमेकन मूल की हैरिस डेमोक्रेटिक पार्टी से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार बनना चाहती थी, लेकिन फिर जो बाइडन ने उन्हें अपने साथी के रूप में चुना। कमला हैरिस एक जानी मानी ब्लैक नेता है, अमेरिका में पली-बड़ी होने के बावजूद उन्होंने भारतीय जड़ों को नहीं छोड़ा है। हैरिस की मां श्यामला गोपालन भारत के तमिलनाडु से थी, आज जहां कमला के शपथ ग्रहण की खुशी में जश्न मनाया जा रहा है और उनके पिता जमैका से थे।

कमला की उम्मीदवारी से भारतीय-अमरीकी में दिखा जोश 

शेखर नरसिम्हन जैसे डेमोक्रेटिक पार्टी के कार्यकर्ताओं का कहना था कि कमला की उम्मीदवारी ने भारतीय अमरीकी समुदाय को जोश से भर दिया है। वह एक महिला हैं। उनका दो नस्लों से संबंध हैं और वह राष्ट्रपति चुनाव में जो बाइडेन की मदद करेंगी। अमरीका के कई समुदायों में उन्हें पसंद किया जाता है और वह वास्तव में स्मार्ट हैं। वह कहते हैं आखिर भारतीय मूल के अमरीकी कमला पर गर्व क्यों न करें? उनकी उम्मीदवारी बताती है कि अमरीकी समाज में आने वाला वक्त अब हमारा है।

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निजी जिंदगी के मुकाबले कमला की छवि एक अफ्रीकी-अमरीकी राजनीतिक नेता के रूप में ज्यादा मजबूत है। अभी हाल ही में अमरीका में ब्लैक लाइव्स मैटर्स आंदोलन के दौरान चल रहे विमर्शों में उन्हें अफ्रीकी-अमरीकी राजनीतिक नेता के तौर पर ही देखा गया। लेकिन अमेरीका में रहने वाले भारतीय और दक्षिण एशियाई लोग उन्हें अपना ही मानते है।

द ट्रोथ वी टोल्ड

कमला ने 2018 में अपनी आत्मकथा, ‘द ट्रोथ वी टोल्ड’ में अपने नाम का मतलब कमल का फूल बताया है, भारतीय संस्कृति में इसकी काफ़ी अहमियत मानी जाती है। जब कमला पांच साल की थी, तब ही कमला के माता पिता अलग हो गए थे। कमला और उनकी बहन माया की परवरिश उनकी सिंगल हिंदू मदर ने की। उनकी मां कैंसर रिसर्चर और मानवाधिकार कार्यकर्ता श्यामला गोपालन और उनकी दोनों बेटियों को ‘श्यामला एंड द गर्ल्स’ के नाम से जाना जाता है। उनकी मां चाहती थी कि उनकी दोनों बेटियां अपनी पृष्ठभूमि को अच्छी तरह जाने। उनकी मां जानती थी कि देश कमला और माया को ब्लैक महिला के तौर पर ही देखेगा, लेकिन उनकी मां ने उन दोनों बहनों को इतना आत्मविश्वासी बनाया की वह दुनिया का सामना कर सकें।

कमला खुद को अमरीकी महिला कहलाना ज्यादा पसंद करती है, लेकिन जो लोग कमला को जानते है उनका कहना है कि कमला भारतीय और अमरीकी दोनों समुदायों में भली-भांति घुलमिल जाती है।

कमला और कैलिंग की वीडियो

जब कमला ने 2015 में राष्ट्रपति पद के लिए अपने अभियान की शुरुआत की थी तो भारतीय मूल की अमरीकी कॉमेडियन और अभिनेत्री मिंडी कैलिंग ने उनके यू ट्यूब पेज पर एक वीडियो पोस्ट की थी, जिसमें कमला और कैलिंग भारतीय भोजन बनाती दिख रही है। वीडियो में दोनों अपनी साझा दक्षिण भारतीय पृष्ठभूमि के बारे में भी बात करती हुई दिख रही हैं। कैलिंग इस वीडियो में कहती है कि हमें लगता है कि आप हमारी ही तरह हैं। हम राष्ट्रपति पद के लिए शुरू किए गए आपके अभियान से बहुत खुश हैं।

कैलिंग ने हैरिस से इस वीडियो में पुछतीं है कि क्या उन्होंने दक्षिण भारतीय भोजन खाया है। कमला इस सवाल का जवाब देते हुए एक के बाद एक दक्षिण भारतीय भोजन का नाम लेती हुए कहती है कि वह ख़ूब सारा चावल और दही, आलू की रसदार सब्जी, दाल और इडली खाते हुए ही बड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि अमेरीका में रहकर भी भारतीय बिरयानी और स्पैगेटी बोलोगनीज दोनों बनाती हैं।

अमरीकी भारतीय परंपरा से की शादी

जब कमला ने 2014 में वकील डगलस एम्पहॉफ से शादी की। उनकी शादी में भारतीय और यहूदी परंपरा दोनों निभाई गई थी। भारतीय परंपरा के मुताबिक कमला ने डगलस को फूलों की माला पहनाई और डगलस ने यहूदी परंपरा के तहत पैर से कांच तोड़ा।

कमला के जीवन में मां की छवि

कमला की मां का जन्म चेन्नई में हुआ था वह अपने भाई बहनों में सबसे बड़ी थी। उन्होंने 19 साल की उम्र में दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने बर्कले के ग्रैजुएट प्रोग्राम के लिए आवेदन दिया। यह एक ऐसी यूनिवर्सिटी थी, जिसे उन्होंने कभी देखा नहीं था और दूर देश में जहां वह पहले कभी गई नहीं थी। वह 1958 से न्यूटीशिन और एंडोक्रनॉलोजी में पीएचड़ी करने के लिए भारत से निकली थी। उसके बाद वह ब्रेस्ट कैंसर के फील्ड में रिसर्चर बन गईं।

इस पर कमला हैरिस लिखती है कि ‘मेरे लिए यह कल्पना करना ही मुश्किल है कि नाना-नानी के लिए मेरी मां को भारत से बाहर जाने देने का फ़ैसला कितना कठिन रहा होगा। उस समय कमर्शियल हवाई उड़ाने शुरू ही हुई थी। एक दूसरे से संपर्क कर पाना बहुत कठिन था। इस के बावजूद जब मेरी मां ने कैलिफ़ोर्निया जाने की इजाज़त मांगी तो मेरे नानी-नाना ने मना नहीं किया। हैरिस आगे लिखती है कि उनके नाना-नानी को उनकी मां से अपनी पढ़ाई पूरी कर वापस वतन लौटने और यहां मां-बाप की पसंद से शादी कर घर बसाने की उम्मीद थी। लेकिन किस्मत को कुछ और मंज़ूर था। उन्होंने अपने प्रेमी से शादी करने और वहीं बसने का फ़ैसला किया।

तमिलनाडु से रिश्ता

कमला की मां की परवरिश भारत में एक ऐसे परिवार में हुई जो सदैव राजनीतिक और नागरिक आंदोलन से जुड़ा रहा। कमला की नानी हाई स्कूल तक भी नहीं पढ़ी थीं लेकिन वह घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं की मददगार थीं। वह महिलाओं को गर्भ निरोधक उपायों के बारे में बताती थीं। इसमें उनकी मदद करती थीं। कमला के नाना पी वी गोपालन भारत सरकार में सीनियर राजनयिक थे। जमैका की आजादी के बाद वह यहां भेजे गए थे। उन्होंने शरणार्थियों को बसने में मदद की थी।

कमला ने अपनी आत्मकथा में भारत की अपनी यात्राओं के बारे में ज़्यादा नहीं लिखा है। लेकिन वह लिखती हैं कि वह अपने मामा और दो मौसियों की नज़दीकी रहीं। उनके साथ फ़ोन और पत्र के ज़रीये उनका संपर्क बरक़रार रहा। कभी-कभी उनसे मिलने के लिए उन्होंने भारत की यात्रा भी की। कमला हैरिस की मां का 2009 में सत्तर साल की उम्र में निधन हो गया था।

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