हुनर हाट से खुली परंपरागत अर्थव्यवस्था की राह

पिछले 7 महीने से लोकडाउन के कारण सुस्त अर्थव्यवस्था को अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय द्वारा लगाए जा रहे हुनर हाट जैसे आयोजन से अर्थव्यवस्था को पंख लगने शुरू हो गए हैं। मार्केट फिर से करवट लेने लगा है। फेस्टिवल सीजन ने बाजार को जीवनदान देने का काम किया है। पिछले समय से बाजार जिस तरह पस्त चल रहा था, उससे सरकार चिंतित थी।

आयोजनों की शुरूआत

ऐसे में प्रधानमंत्री के निर्देशन में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय ने हुनर हाट के जरिए आयोजन की शुरूआत की और देश भर के परंपरागत देसी शिल्पकला, दस्तकला, काष्ठकला और देसी खानपान के व्यापारियों को आमंत्रण देकर दिल्ली के पीतमपुरा स्थित दिल्ली हाट में हुनर हाट का कामयाब आयोजन कराया। देश के इन शिल्पकारों को मंच प्रदान करने से अर्थव्यवस्था की एक नई राह खुल गई। और देसी वस्तुओं का कारोबार चल पड़ा।

देसी कारोबार पटरी पर

इस आयोजन से देसी कारोबारी अर्थव्यवस्था के राह पर आने की शुरूआत हो गई। फेस्टिवल सीजन में देश में हाशिए पर खडे दस्तकारोें, शिल्पकारों और परंपरागत देसी खानपान कारोबारियों को अपने उत्पादों की बिक्री और प्रदर्शन किया। वहां पहुंच रही भीड उत्साहजनक थी और लोग अपने पसंद का सामान भी खरीदते दिखाई दिए। और स्वादिष्ट खानपान का भी जमकर आनंद उठाया।
हुनर हाट का आयोजन सरकार के निर्देशानुसार कोविड सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन के साथ किया गया। सभी आगंतुकों को सरकार की ओर से मुफत मास्क दिया गया। लगातार सेनिटाइजेशन किया जाता रहा। प्रवेश द्वार पर टैम्परेचर चेक करके ही प्रवेश दिया गया। जगह जगह आटोमैटिक हैंड सेनेटाइजर लगाए गए।

अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर

अर्थव्यवस्था पर इसका चारों ओर असर दिखने लगा। धीरे धीरे अनलोक की प्रक्रिया और सरकार की अर्थव्यवस्था में सुधार दिखने लगा है। यही कारण है कि त्यौहारों की धूम से बाजार की सुस्ती भी अब दूर होने लगी है।

कोविड ने लगभग सारे विश्व पर कुप्रभाव पड़ा है। विश्व का कोई भी देश कोविड महामारी से अछूता नहीं बचा। भारत, रूस, अमेरिका,यूरोप जैसी महाशक्तियां भी इसकी चपेट में आ गई हैं। विश्व भर में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित है।
ऐसे वक्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी दूरंदेशी का परिचय देते हुए जान है तो जहां है, मंत्र के साथ देश भर में लॉकडाउन की घोषणा कर दी।

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स्पष्ट है इससे अर्थव्यवस्था की गतिविधियां प्रभावित रहीं। उद्योग, निर्माण, फिल्म, मनोरंजन, विज्ञापन, इवेंटस सहित तमाम सरकारी और प्राइवेट संस्थान बंद हो गए। लॉकडाउन की तमाम आवश्यक सुविधा का ध्यान रखा गया था। देश कों विकास की पटरी पर लौटाने के लिए वर्क फ्रोम होम का विंडो खोला गया।

अनलोक की प्रक्रिया शुरू

फिर धीरे धीरे अनलोक की प्रक्रिया शुरू की गई। विकास का पहिया थम गया था, उसे गति देना आवश्यक था। पर अनलोक के बाद भी गति सुस्त ही रही। बिजनेस वर्ग में शंका और संशय बरकरार था और आर्थिक घाटे के बावजूद वे मौजूदा परिस्थितियों में किसी प्रकार का अतिरिक्त जोखिम लेने से हिचक रहे थे।

अब सरकार ने आगे आकर मोर्चा संभाला। इसके लिए कई सार्थक कदम उठाए गए। सरकारी कर्मचारियों को खर्च के लिए एडवांस लोन पैकेज दिए गए तो बिजनेस समुदाय को भी सहूलियतें प्रदान की गईं। परिणाम यह हुआ कि आर्थिक विकास का जो चक्का जाम हो चुका था वह दौडने की स्थिति में आने लगा।

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हर क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां शुरू हो गई। आर्थिक गतिविधियां बढाने के सरकारी प्रयासों को पंख लग गए हैं और अर्थव्यवस्था फिर से पटरी पर आने लगी है।

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