Friday, April 19, 2024
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बिगड़े माहौल में कैसे मनाया जाएगा बीटिंग द रिट्रिट का समारोह

नेहा राठौर

भारत में गणतंत्र दिवस के बाद हर साल 29 जनवरी को बीटिंग द रिट्रिट का समारोह राजधानी दिल्ली में आयोजित किया जाता है, जो गणतंत्र दिवस समारोह की समाप्ति का प्रतीक होता है। किंतु इस साल गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर हुई हिंसा के बाद इस समारोह का होना मुश्किल नजर रहा है। बिगड़ते हालात देख कर इस कार्यक्रम को रद्द किए जाने की भी संभावना जताई जा रही है, क्योंकि इससे पहले भी दो बार इस कार्यक्रम को जरूरी कारणों से रद्द किया जा चुका है। इस बारे में सरकार की तरफ से लिखे जाने तक कोई सूचना नहीं दी मिल पाई थी।

बीटिंग द रिट्रिट समारोह में हर साल रायसीना रोड पर राष्ट्रपति भवन के सामने तीनों सेना थल सेना, वायु सेना, नौ सेना के जवान प्रदर्शन करते हैं। इस प्रदर्शन को देखने के लिए काफी बड़ी संख्या में लोग आते हैं। इस साल कोरोना और सुरक्षा के कारणों से गणतंत्र दिवस और  इस समारोह में कम लोगों को ही शामिल होने की इजाजत दी गई थी। गणतंत्र दिवस का समारोह पूरे चार दिनों तक चलता है, जिसका समापन बीटिंग रीट्रीट के साथ होता है। यह कार्यक्रम भी उतना ही गौरवशाली और मनोरंजक होता है, जितना गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम।

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समारोह में बजने वाली धुने

इस अवसर पर हर साल 26 जनवरी से 29 जनवरी के बीच समारोह स्थल को रोशनी से सुंदरता पूर्वक सजाया जाता है। इस समारोह की शुरुआत तीनों सेना एक साथ मिलकर सामूहिक बैंड वादन से करती है, जो की लोकप्रिय मार्चिंग धुनें होती है। ड्रमर्स द्वारा एबाइडि विद मी धुन भी बजाई जाती है (जिसे माहात्मा गांधी की प्रिय धुनों में से एक कहा जाता है) और ट्युबुलर घंटियों द्वारा चाइम्स भी बजाई जाती है जो काफी दूरी पर रखी होती है। इस धुन से इस कार्यक्रम में एक मनमोहक दृश्य बन जाता है। इसके बाद में रीट्रीट का बिगुल वादन होता है, इसमें बैंड मास्टर राष्ट्रपति के पास जाकर बैंड वापस ले जाने की इजाजत मांगते है। और आखिर में सारे जहां से अच्छा की धुन बजाते है, इससे पता चलता है कि समारोह पूरा हो चुका है। इसी के साथ शाम 6 बजे बगलर्स रिट्रीट की धुन बजाते हुए राष्ट्रीय ध्वज को उतार लिया जाता है और समारोह का समापन किया जाता है।

भारत में दो बार रद्द हुआ समारोह

भारत में साल 1950 से अब तक गणतंत्र दिवस के बाद बीटिंग द रिट्रिट समारोह को दो बार रद्द किया जा चुका है। पहले 2001 में, जब गुजरात में आए भूकंप के कारण इस कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा था और उसके बाद 2009 में, जब वेंकटरमन का लंबी बीमारी के बाद आर्मी रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में निधन हो गया था तब बीटिंग द रिट्रिट समरोह को रद्द कर दिया गया था।

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