Friday, April 12, 2024
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30 जनवरी 1948 : महात्मा गांधी की आख़िरी प्रार्थना सभा

नेहा राठौर

अहिंसावादी सिद्धांतों को मानने वाले महात्मा गांधी की आज 73वीं पुण्य तिथि है। आज ही के दिन 1948 में आजादी के एक साल बाद नाथुराम गोडसे ने नई दिल्ली स्थित बिड़ला हाउस में प्रार्थना सभा के दौरान गोली मार कर हत्या कर दी थी।

‘जहां प्रेम है वहां जीवन है’ अपने इन्हीं विचारों के साथ महात्मा गांधी ने एक आजाद भारत का सपना देखा था, जो कई संघर्षों और बलीदानों के बाद सच तो हुआ पर टुकड़ों में, कई लोगों को लगता था कि इस देश के टुकड़े होने के पीछे गांधी का हाथ है, अगर वह चाहते तो पाकिस्तान को भारत से अलग नहीं होने देते, लेकिन उन्होंने जान बूझकर इसके लिए कोई कदम नहीं उठाया।  कई लोगों का कहना है कि गांधी कभी इस देश का बटंवारा नहीं चाहते थे, वह बस एक अंग्रेजों की हुकूमत से इसे आजाद करना चाहते थे, लेकिन देश के टुकड़े होने के कारण देश में जो माहौल पैदा हुआ, उसने गांधी के दिल को अंदर ही अंदर चीर दिया था। इस बंटवारे के कारण देश के हिंदू और मुस्लिम गांधी की जान के दुश्मन बन गए। उन्हीं में से एक गोडसे था, जिसने गांधी की जान ली।

इंटरव्यू के लिए आते थे लोग

गांधी जी की हत्या वाले दिन उनके साथ के.डी. मदान भी वहीं मौजूद थे। वह आकाशवाणी में काम करते थे। उन्होंने अपनी आंखों देखा हाल बयां करते हुए बताया कि उस दिन वह वहां प्रार्थना सभा की रिकॉर्डिंग के लिए गए थे। यह सभा पांच से छह बजे तक चलती थी। इस सभा में सर्वधर्म प्रार्थना होती थी। रिकॉर्डिंग के लिए वह मशीन मंच पर गांधी के पास रख देते थे।

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यह सिलसिला 1947 से चलाता आ रहा था, वह सभा करते और लोग उन्हें सुनने आते थे। यह रिकॉर्डिंग उसी दिन रात 8‘30 बजे प्रसारित होती थी। उस दिन सभा में रोज की तरह सबसे पहले आने वाले लोगों में नंदलाल मेहता थे, उस दिन साढे चार बजे तक प्रार्थना सभा स्थल पूरी तरह भर गया था। कई लोग गांधी जी के इंटरव्यू के लिए आ रहे थे। कोई मार्गदर्शन के लिए तो कोई सिर्फ दर्शन के लिए आया था। इसी बीच सरदार पटेल भी वहां आ पहुंचे। वे बापू से मिलने के लिए आए थे। रोज की तरह गांधी प्रार्थना सभा की तरफ आ रहे थे। उन्होंने कहा कि मुझे वह मंजर अच्छी तरह से याद है जब नाथूराम गोडसे ने गांधी पर गोलियां चलाई थीं। जब बिड़ला हाउस के भीतर से गांधी जी प्रार्थना सभा में शामिल होने के लिए निकले तब 5ः16 बज रहे थे।

गोडसे ने चलाई गांधी पर गोलियां

आम तौर पर वे 5.10 बजे प्रार्थना के लिए आ जाते थे, लेकिन उस दिन कुछ देर हो गई थी। उनकी बढ़ती आयु और स्वास्थ्य के कारण हमेशा उनके हाथ मनु और आभा के कंधे पर रहते थे। उस दिन भी उनके हाथ उन्हीं के कंधे पर थे, तभी पहली गोली की आवाज आई। मुझे लगा कोई पटाखा चला है मैं उसी एहसास में था, कि दूसरी गोली चली। तभी मैं इक्विपमेंट छोड़कर उस तरफ भागा जहां काफी भीड़ थी। तभी तीसरी गोली चली। बाद में पता चला कि गोली मारने वाला नाथूराम गोडसे थे। वह खाकी पहने हुए थे। उन्होंने गोली चलाने के बाद दोबारा हाथ जोड़े। लोगों से पता चला कि उन्होंने पहली गोली चलाने के बाद भी हाथ जोड़े थे।

गोडसे की गिरफ्तारी

उसके बाद वहां खड़ी भीड़ ने उन्हें पकड़ लिया, उन्होंने भागने की कोई कोशिश नहीं की बल्कि जो रिवॉल्वर थी, वो भी उनको दे दी। उसके बाद पुलिस को बुलाया गया और गोडसे को गिरफ्तार किया गया। गांधी को एक कमरे में ले जाया गया जहां उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए। इससे पहले भी गांधी पर 4 बार हमले की कोशिश की जा चुकी थी। गांधी की मृत्यु की सूचना भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने आकाशवाणी पर रूंधे आवाज में दी थी।

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