अंधभक्ति में चली गई बेटियों की जान

नेहा राठौर

‘विश्वास करो अंधविश्वास नहीं, भक्त बनो अंधभक्त नहीं’ यह विचार सिर्फ विचार बन कर ही रह गया है। 21वी सदी में भी लोग अंधविश्वास पर यकीन करते है। आज भी कई लोग है, जो ईश्वर की भक्ति में कब अंधे हो जाते है उन्हें पता ही नहीं चलता और उनकी यही अंधभक्ति धीरे धीरे उनके पूरे परिवार को खा जाती है। मैने सुना था, कि अंधविश्वास लोगों की सोचने समझने की शक्ति को हर लेता है और आज इसे सच होते हुए भी देखा है।

हाल ही में ऐसा ही एक मामला आंध्रप्रदेश में सामने निकलकर आया है। जहां एक पढ़े लिखे परिवार को अंधविश्वास ने जकड़ लिया। ईश्वर की अंधभक्ती के कारण मां-बाप ने अपनी ही दो बेटियों को मौत के घाट उतार दिया। जिसका उन्हें बिल्कुल भी पछतावा नहीं है। यह मामला आंध्र प्रदेश के चित्तूर ज़िले के ग्रामीण इलाक़े मदनपल्ली का है वहां रहने वाले पुरुषोत्तम नायडु जो महिला डिग्री कॉलेज में उप-प्रधानाचार्य है और उसी कॉलेज में उनकी पत्नी पद्मजा प्रिंसिपल के रूप में काम करती है और एक निजी शिक्षण संस्थान की संवाददाता भी है। उनकी दो बेटियां थी, बड़ी बेटी का नाम (27) अलेख्या और छोटी बेटी का नाम (22) साईं दिव्या था। बड़ी बेटी अलेख्या ने भोपाल स्थित इंडियन मैनेजमेंट ऑफ़ इंडियन फ़ॉरेस्ट सर्विस से परास्नातक की पढ़ाई की थी और छोटी बेटी ने बीबीए की पढ़ाई की थी और इसी के साथ ए.आर. रहमान संगीत अकादमी मे संगीत की पढ़ाई कर रही थी।

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छोटी बेटी की मंदिर में मिली लाश

यह परिवार 2020 में अगस्त महीने में ही अपने नए घर में शिफ़्ट हुआ था। उनका एक भरा पूरा परिवार था। पैसे की कोई कमी नहीं थी यह करोड़ो के मालिक थे। पुलिस ने जब इस बारे में पड़ोसियों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि उनके घर में आए दिन कोई न कोई अनुष्ठान होता रहता था। FIR के मुताबिक, परिवार में 24 जनवरी 2021, रविवार की रात को भी कुछ अनुष्ठान किए थे, इस अनुष्ठान के बाद उन्होंने अपनी छोटी बेटी साईं दिव्या को एक नुकीले त्रिशूल और बड़ी बेटी को एक डंबल से मार डाला। यह जानकारी खुद पुरुषोत्तम नायडू ने खुद अपने साथ काम करने वाले लोगों और पुलिस को बताया। पुलिस के घटनास्थल पर पहुंचने से पहले ही दोनों लड़कियां मर चुकी थी। पुलिस को छोटी बेटी की लाश पूजा घर में और बड़ी बेटी की लाश पहली मंज़िल पर मिली। इसके बाद पुलिस ने मां-बाप दोनों को हिरासत में लेकर भारतीय दंड संहिता की धारी-302 के तहत मुक़दमा दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।

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अंधविश्वास की अशंका

पुलिस के मुताबिक मृत्कों के माता-पिता का व्यवहार काफ़ी अजीब और अलग है। उन्होंने पुलिस को चेतावनी दी है कि उन पर किसी भी तरह का दबाव ना बनाया जाए। पुलिस ने शुरुआती जाँच के लिए इस जोड़े को घर पर रखा हुआ है।

ऐसे में पुलिस काफ़ी सावधानी-पूर्वक जाँच करते हुए मनोवैज्ञानिकों की मदद लेने की योजना बना रही है। इस माहौल में जांच के दौरान पुलिस ने सिर्फ़ क़रीबी रिश्तेदारों को ही घर में आने की इजाज़त दी है, ताकि संदिग्धों को शांत रखा जा सके। पुलिस का कहना है कि इस जोड़े के घर में कई अजीबो ग़रीब तस्वीरें थीं, जिनमें से कुछ भगवान की तस्वीरें थी। दोनों लड़कियों का पोस्टमार्टम हो चुका है और जांच टीम को अब तक इस मामले से जुड़े कई सुराग़ मिले हैं। 

अंधविश्वास की हद तो तब पार हुई और पुलिस का शक भी तभी यकीन में बदला जब पद्मजा को एक COVID-19 परीक्षण के लिए ले जाया गया, वहां उन्होंने अंग्रेजी में चिल्लाते हुए कहा ‘मैं भगवान शिव हुं। शिव आ गए। काम हो गया। उन्होंने कहा कि वह खुद कोरोना वायरस थी। हालांकि, पुलिस ने बताया कि उनके पति ने परीक्षण और गिरफ्तारी की प्रक्रियाओं के लिए कर्मचारियों के साथ सहयोग किया था ।

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