Wednesday, April 17, 2024
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कोरोना ने किया होली का रंग फीका

​प्रियंका आनंद


पिछले वर्ष इसी मार्च माह में 25 तारीख से कोरोनी वायरस संक्रमण के तेजी से फैलन से रोकने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन लगाने के आदेश जारी किए गए थे। जिसके परिणाम स्वरुप नहीं चाहते हुए भी सभी को अपने—अपने घरों में कैद होना पड़ा था। मानो जैसै अजाद होते हुए भी हम आजाद ही नहीं हों। फिर चाहे बच्चों की पढ़ाई हो, लोगों की नौकरी, व्यापारियों का व्यापार या फिर कुछ और काम। सब पर जैसै बैन सा लग गया था।


घर में कैद होने के कारण बीते साल सारे त्यौहार भी लोगों को घर पर ही काफी सीमित तरीके से मनाने पर मजबूर होना पड़ा था। बाजारों की रौनक खत्म हो गई थी। जिसके चलते व्यापारियों को भी काफी नुकसान उड़ाना पड़ा।

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जहां इस साल कोरोना के खत्म होने की आशा नजर आ रही है तो वहीं इसके दूसरे रूप का प्रकोप बढ़ने लगा है। इसे अनदेखी करते हुए लोग भले ही बाजारों की ओर रूख कर लिया है लेकिन पहले जैसी ऱौनक नहीं दिख रही है। हर साल की तरह इस साल भी होली का पावन पर्व आ चुका है। लेकिन पहले जैसी रौनक बाजारों में देखने को नही मिल रही। जहां कई हफ्ते पहले लोग अपने-अपने घरों में होली की तैयारियां शुरु कर दिया करते थे। क्या पकवान बनाने हैं। कितने महमानों के हिसाब से खाना बनाना है। नया पकावान क्या होना चाहिए। घर पर कौन—कौन आएगा या हम किसके घर होली का त्यौहार मनाने जाएंगे आदि। यहां तक कि पहले होली पर बनने वाले व्यंजन भी काफी मात्रा में बनाया जाता थे। कुछ पकवान होली के दो दिन पहले ही बना लिए जाते थे। शकाहारी और मांसाहरी के अलावा पेयपदार्थों की अलग से लिस्ट बनती थी। उसी हिसाब से तैयारियां एक हप्ताह पहले से होने लगती थी।

अपने अपने परिजनों के घर होली की शुभकामनाऔं के साथ भेंट के रुप में लेकर जाया करते थे, परंतु माहामारी ने तो जैसै सबके अरमानों पर पानी ही फेर दिया हो। बाजारों में भी त्यौहार कि कोई खास रौनक देखने को नही मिल रही है। रंग, गुलाल, पिचकारी से ज्यादा अब मास्क, सेनिटाइजर या अन्य कोरोना से बचाव की चीजें मिल रही है। और हो भी क्यों ना कोरोना ने हम सब के मन में इतना डर जो बैठा दिया है कि अगर कोई चाहे भी तो इन सब चीजों से छुटकारा नही पा सकता। यहॉ तक कि छोटे छोटो मासुम बच्चों की हसी भी कही गायब है। व्यापारियों कि माने तो यह कहना गलत नही होगा कि इस साल की होली रंगों का त्यौहार होते हुए भी बेरंग सी ही है।


एक—दुसरे के घर जाकर मुबारकबाद देने कि बजाए व्हाटसएप या फेसबुक से ही लोग काम चलाना पसंद कर रहे हैं। कुछ लोगों का तो यह भी मानना है कि होली तो हर साल आती है, लेकिन अगर हमें आने वाले वर्ष में अपनों के साथ होली मनानी है तो नहीं चाहते हुए भी अपनों से दुर रहना पड़ेगा और अपने—अपने घरों में रहकर ही होली का पर्व मनाना पड़ेगा।

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