कोरोना वैक्सीन की दिशा में सफलता की संभावना बढ़ी

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कोरोना वायरस के खात्मे के लिए दो कंपनियों फाइजर—बायोएनटेक और मॉडर्ना को सफलता मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। दोनों ने अपने कोविड वैक्सीन के बेहद सफल परीक्षणों की घोषणा की है। हालांकि अन्य वैक्सीन पर काम युद्ध स्तर पर जारी है। साथ ही तीसरा अहम ट्रायल, बेल्जियम की कंपनी जानसेन कर रही है और इस पर ब्रिटेन में अनुसंधान किए जा रहे हैं।

भारत के लिए अनुकूल और प्रभावी

फाइजर की कोरोना वैक्सीन को भारत के लिए भी लाभकारी बताया जा रहा है और इसके ट्रायल में 95 फीसदी तक कारगर पाए गए हैं। यानी कि कोविड-19 से निपटने में फाइजर-बायोएनटेक और मॉडर्ना कंपनी की वैक्‍सीन को मिली सफलता से कई देशों को उम्‍मीद बंधी है। ये वैक्‍सीन एमआरएनए आधारित हैं, जो जलवायु भौगोलिक स्थितियों रख-रखाव व उपयोग की दृष्टि से भारत के लिए भी अनुकूल होंगी। इस कारण इसे भारत के लिए अनुकूल बताया गया है। इसके  तीसरे चरण के परीक्षण में आशाजनक नतीजे आए।   

इनके अतिरिक्त 10 और ऐसी वैक्सीन का ट्रायल तीसरे चरण में है। फाइजर की वैक्सीन 95 व मॉडर्ना की 94.5 फीसद प्रभावी पाई गई। अगर विस्तृत अध्ययन में परिणाम 90 फीसद से ज्यादा रहता है तो ये वैक्सीन उतनी ही प्रभावी मानी जाएंगी, जितनी खसरा वैक्सीन। इस प्रकार ये वैक्सीन यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) के 50 प्रतिशत प्रभाव वाले मानक को पार कर जाएंगी। चूंकि अब तक के परीक्षण में इन वैक्सीन के प्रतिकूल प्रभाव नहीं देखे गए हैं, इसलिए दोनों कंपनियां आपातकालीन प्रयोग के लिए आवेदन कर सकती हैं। अमेरिका ने दोनों वैक्सीन की 10 करोड़ खुराक का ऑर्डर दे दिया है। फाइजर तो कनाडा, ब्रिटेन व जापान से इतर यूरोपीय यूनियन को भी 30 करोड़ खुराक उपलब्ध कराने पर सहमत है।

वैक्सीन का मारक एमआरएन

दोनों वैक्सीन में वास्तविक कोरोना वायरस की जगह सिंथेटिक जेनेटिक मैटेरियल का इस्तेमाल किया गया है। इसे मैसेंजर आरएनए यानी एमआरएन कहा जाता है, जो रोग प्रतिरोधी प्रणाली को कोरोना वायरस से लड़ने के लायक बनाती है। टीकाकरण के बाद मरीज की कोशिकाएं कोरोना वायरस की स्पाइक प्रोटीन को मथ देती हैं। इस से ये रोग प्रतिरोधी प्रणाली को सतर्क करते हुए उसे असली वायरस से लड़ने के लिए उत्तेजित करती हैं। इस प्रणाली से दूसरे रोगों की वैक्सीन के विकास का काम भी चल रहा है, लेकिन उनमें से किसी को अभी तक हरी झंडी नहीं मिली है। दोनों वैक्सीन का निर्माण एक ही सिद्धांत पर किया गया है, इसके बावजूद उनमें कुछ अंतर भी हैं। मॉडर्ना वैक्सीन का अपेक्षाकृत उच्च तापमान पर भंडारण किया जा सकता है। यह पहलू वैक्सीन के वितरण में अहम भूमिका निभाएगा। खासकर कम आय और गर्म जलवायु वाले देशों में।

भारत ने बुक किए एक अरब खुराक   

भारत ने पहले से ही विभिन्न सप्लायरों के जरिये वैक्सीन की 1.6 अरब खुराक को आरक्षित कर लिया है, लेकिन नए अध्ययन के परिणाम सरकार को दूसरी जगहों के लिए भी सोचने को मजबूर करेंगे। जिन वैक्सीन निर्माताओं के साथ भारत का करार हुआ है, उनमें ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन सबसे ज्यादा भरोसेमंद है। मॉडर्ना व फाइजर के अध्ययन परिणाम भी इसके पक्ष में हैं। हालांकि, इनकी तकनीक अलग हैं, लेकिन तीनों कोशिकाओं को प्रोटीन पैदा करने के लिए प्रेरित करती हैं जिससे रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ती है। ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के अंतरिम परिणाम भी जल्द आ सकते हैं। अगर सफलता मिलती है तो वैक्सीन का वितरण भी साल के अंत तक शुरू हो सकता है।

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क्यों जरूरी वैक्सीन 

साल बीतने को है फिर भी वायरस के संक्रमण में कमी नहीं आई है। इसका खतरा बना हुआ है। अभी तक लोग एहतियाती उपाय से ही बच रहे हैं। बड़ी संख्या में लोगों को कोरोना वायरस संक्रमण का ख़तरा बना हुआ है। हम केवल अपने रहन-सहन पर संयम करके ही अधिक लोगों को मरने से रोक रहे हैं। जन—जीवन को वापस सामान्य बनाने के लिए वैक्सीन जरूरी है।

किस वैक्सिन के अधिक सफलता की संभावना

ऐसी स्थिति में वैक्सीन हमारे शरीर को इससे सुरक्षित लड़ना सिखाएगी। यह या तो हमें पहली बार कोरोना वायरस संक्रमण होने से बचाएगी या कम से कम कोविड-19 को प्राणघातक होने से रोके देगी।

फाइज़र—बायोएनटेक वो दवा कंपनी है जिसने सबसे पहले अपने वैक्सीन के परीक्षण के अंतिम चरण में होने की जानकारी साझा की है। क़रीब 43,000 लोगों को पर इस वैक्सीन को टेस्ट के परिणामस्वरूप असुरक्षा की बात सामने नहीं आई है। इसके डेटा के मुताबिक यह वैक्सीन 90 फीसदी लोगों को कोविड-19 महामारी होने से बचा सकती है।

इसके अतिरिक्त मॉडर्ना अपने वैक्सीन का परीक्षण अमेरिका में 30 हज़ार लोगों पर कर रहा है, इनमें से आधे लोगों को डमी इंजेक्शन दिए गए। इसके मुताबिक यह वैक्सीन 94.5 प्रतिशत लोगों को सुरक्षित कर सकता है। उन्होंने परीक्षण के लिए मौजूद कोविड के लक्षणों वाले पहले 95 लोगों में से केवल पांच को ही वास्तविक वैक्सीन दी।

ब्रिटिश दवा कंपनी एस्ट्राज़ेनेका और ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक मिलकर एक वैक्सीन विकसित कर रहे हैं. अगले कुछ हफ़्तों में इसके परीक्षण के नतीजे भी आ जाएंगे. इस बीच स्पुतनिक वी नामक पर एक डेटा जारी किया गया है जो उत्साह बढ़ाने वाला है. तीसरे चरण के अंतरिम परिमाणों के मुताबिक, फाइज़र का वैक्सीन भी इसी चरण में है, रूसी शोधकर्ताओं ने बताया है कि यह 92% तक कारगर है.

तथ्य

डीएनए: यह नाभिक में प्रोटीन के लिए निर्देश इकट्ठा करता है।

एमआरएनए: यह प्रोटीन तैयार करने के लिए कोशिकाओं के अस्थायी निर्देशों का एक समूह है। इसका निर्माण डीएनए के इस्तेमाल से होता है।

प्रोटीन: यह कोशिकाओं की जरूरत के अनुरूप काम करते हुए जीवन का आधार तैयार करता है। इसका निर्माण एमआरएनए के इस्तेमाल के जरिये होता है।

कब तक कारगर: 5 दिन रेफ्रिजरेटर तापमान पर, 30 दिन रेफ्रिजरेटर तापमान पर व 12 घंटे तक कमरे के तापमान पर

खुराक : तीन सप्ताह में दो खुराक, चार सप्ताह में दो खुराक

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