दिल्ली में कोरोना आउट ऑफ़ कंट्रोल

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संपादकीय अपनी पत्रिका 

कोरोना की नई लहर से उपजी समस्याओं को लेकर दिल्ली सरकार द्वारा लिए गए कुछ फैसलों से विपक्षी दल खासा नाराज है। खासतौर से भारतीय जनता पार्टी केजरीवाल सरकार की जमकर आलोचना कर रही है।

दिल्ली में कोरोना के मरीजों के रिकार्ड आकड़ें सामने आ रहे हैं। बाजारों, सड़कें पर भीड़ बेतहाशा बढ़ गई है। इसे देखते हुए केजरीवाल सरकार ने केंद्र सरकार से दिल्ली के कुछ भीड़ – भाड़ वाले बाजारों के लिए कड़े नियमकायदे लागू करने की इजाजत मांगी थी।केंद्र सरकार ने इसे स्वीकार कर लिया।

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मास्क न पहनने पर बड़ा जुर्माना

इस पर शुरू में अफवाहें उडीं कि दिल्ली में फिर से लॉकडाउन लागू हो रहा है। पिछले छह सात महीने तक दुकानें बंद रहने के बाद त्योहारों पर उनके खुलने और फिर से बंद होने की खबर से दुकानदार ही नहीं, घरों में बंद रहने पर मजबूर आम आदमी भी एक तरह से दहशत में आ गए लेकिन दिल्ली सरकार ने साफ कर दिया कि लॉकडाउन लागू नहीं होगा पर कोरोना के बढ़ते केसों को देखते हुए कुछ सख्त नियम लागू किए गए।इसी के तहत दिल्ली सरकार ने मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया। न पहनने वाले पर पहले से चार गुना यानी 500 से बढाकर 2000 रूपए जुर्माना लागू कर दिया गया।

इस पर विपक्ष का कहना है कि दिल्ली सरकार ने गरीबों की जेब पर चोट की है। रोजीरोटी के लिए तरस रहे लोग 2000 रूपए का जुर्माना कहां से देंगे। लिहाजा केजरीवाल सरकार का यह फैसला गलत है। इसे वापस लिया जाए। इससे पहले प्रदूषण, पटाखों के बैन और एमसीडी कर्मचारियों के वेतन को लेकर दिल्ली सरकार और विपक्षी दल खासतौर से भाजपा आमने सामने है। एकदूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाते रहें।

किसी भी मुददे को लेकर सरकार और विपक्ष एकदूसरे को दोषी ठहराते रहे हैं। आम जनता की समस्या को कैसे खत्म करना है, मिलकर सोचने और अमल करने पर वे न तो विचार करती हैं और न ही समाधान की ओर बढ़ती हैं। इससे आम जनता भ्रमित हो जाती है कि कौन सही है और कौन गलत।

लॉक डाउन दोबारा होता है तो परेशानियां बढ़ेंगी

इरअसल बीमारियां और प्रदूषण की मार हरेक पर पडी है। कोरोना वायरस भेदभाव नहीं करता। कोरोना का सब पर एक जैसा प्रभाव पड़ता है। चाहे गरीब हो या अमीर, किसी भी जाति या धर्म का हो, किसी को भी लपेट सकता है। हम यही मानते हैं और हमें यही बताया गया है पर हमें जो बताया गया है वह अधूरा सच है। बाकी बीमारियों की तरह कोरोना का असर गरीबों पर ज्यादा पड़ता है क्योंकि कोरोना से लड़ना बडा महंगा है। निजी अस्पतालों में गरीब जा नहीं सकते और सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं सीमित हैं। वैसे भी कोरोना की जांच कितनी उपलब्ध है। जग जाहिर है। समर्थ लोग कोरोना से बच सकते हैं घर में रह कर। वे अफोर्ड कर सकते हैं लेकिन निम्न मध्यम वर्ग और उससे निचले वर्ग को तो बाहर निकलना ही होगा।

कोरोना की नई लहर से दिल्ली ही नहीं, समूचे देश और अधिक संकट में आ गया है। आम लोग पहले से ही पिछले करीब 8 महीने से रोजी, रोटी के लिए परेशान था, अब बढती मुसीबत ने और जटिलता पैदा कर दी है।ऐसे में संकट की घडी में सत्तारूढ पार्टी और विपक्षी दलों को मिलकर काम करते दिखाई पडना चाहिए ताकि जनता को राहत मिल सकें और राजनीतिक पार्टियों की साख भी लोगों की नजरों में बढ सकें। 

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