Monday, July 22, 2024
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कौन है अमृतपाल और कैसे बना वारिस पंजाब दे का सरगना?

वह समय जब भारत में किसानों का आदोलन चल रहा था। ऐसे में विरोध के दौरान किसानों की मांग के साथ पंजाब के अधिकारों की भी पैरवी होने लगी और इसी पैरवी को पुख्ता करने के लिए अभिनेता से कार्यकर्ता बने दीप सिद्धू ने आंदोलन के एजेंडे को व्यापक बनाने का प्रयास किया। इसके लिए दीप सिद्धू ने ‘वारिस पंजाब दे’ की स्थापना सितंबर 2021 में की थी। 

सिद्धू किसान आंदोलन के दौरान 26 जनवरी 2021 को दिल्ली के लाल किले पर निशान साहब फहराने की घटना से सुर्खियों में आया था। जब इस संस्था की स्थापना की गई तब इसका मकसद बताया गया था युवाओं को सिख पंथ के रास्ते पर लाना और पंजाब को जगाना। पर 15 फरवरी 2022 को एक सड़क दुर्घटना में सिद्धू की मौत के बाद तस्वीर बदलने लगी और मकसद भी। यह मकसद सितंबर 2022 के बाद पूरा ही बदल गया क्योंकि इसकी कमान अमृतपाल सिंह ने संभाल ली और उसके बाद जो कुछ भी हुआ वह एक नए अध्याय की शुरूआत थी। सबसे पहले तो अमृतपाल का इस संस्था का सदस्य बनना ही लोगों के लिए आश्चर्य का विषय था खासकर उनके लिए जो वारिस पंजाब दे से जुड़े हुए थे।

वारिस पंजाब दे का स्वघोषित सरगना अमृतपाल सिंह पिछले ही साल दुबई से लौटा है। पिछले साल 29 सितंबर, 2022 को अमृतपाल ने खुद को वारिस पंजाब दे का प्रमुख घोषित कर डाला। गौरतलब है कि दीप सिद्धू ने जब संगठन बनाया था, तब खालिस्तान समर्थन जैसी बातें सामने नहीं आई थीं। दीप के परिवार ने अमृतपाल से दूरी बनाते हुए कहा है कि वारिस पंजाब दे का प्रमुख उन्होंने नहीं बनाया। उन्हें तो ये भी नहीं मालूम कि दुबई से पैराशूट लैंडिंग कर अमृतपाल कैसे वारिस पंजाब दे का प्रमुख बन बैठा। आज भी वारिस पंजाब दे के दो अध्यक्ष हैं। सिद्धू  के करीबियों की माने तो अमृतपाल जब दुबई से ही  वारिस पंजाब दे का हिस्सा बना और अपनी खालिस्तानी सोच के बारे में  सिद्धू  को बताया को सिद्धू ने उसकी उस सोच का साथ नहीं दिया और किसान आंदोलन के दौरान उसे ऑडियो चर्चा मंच से ब्लॉक कर दिया। इतना ही नहीं सिद्धू ने फरवरी 2022 में सिंह के फोन को अपने निजी संपर्कों से ब्लॉक कर दिया था। फिर फरवरी 2022 में दीप सिद्धू की आकस्मिक मृत्यु के बाद 4 मार्च 2022 को वारिस पंजाब दे के फेसबुक अकाउंट पर अमृतपाल को संगठन के नेता के रूप में नियुक्त करते हुए एक पत्र दिखाई दिया। यह नियुक्ति विवादास्पद बनी हुई है। कुछ सूत्रों के अनुसार सिद्धू ने जीते जी हरनेक सिंह उप्पल को संगठन का प्रमुख नियुक्त किया था।

अगर अमृतपाल सिंह के व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो उस का जन्म अमृतसर के जल्लूपुर खेड़ा गांव में 1993 में हुआ था। वह तरसेम सिंह का बेटा है. अमृतपाल 19 साल की उम्र में ही 2012 में काम करने के लिए पंजाब से दुबई गया. वह 10 साल यानी 2022 तक दुबई में ही रहा. इस दौरान उसके सिर पर ना केश थे ना ही चेहरे पर दाढ़ी थी. बताते हैं कि वहां पर अमृतपाल ट्रांसपोर्ट के व्यवसाय से जुड़ा था। जब फरवरी 2022 को दिल्ली से पंजाब लौटते वक्त सोनीपत के पास एक सड़क हादसे में दीप सिद्धू की मौत हो जाती है उसके बाद मार्च में दावा किया जाता है कि अमृतपाल अब वारिस पंजाब दे का नया सर्वेसर्वा है। दुबई में क्लीनशेव रहने वाला अमृतपाल जब 2022 में भारत लौटा तो उसकी दाढ़ी बढ़ हुई थी और उसके सिर पर पग थी। इतनी ही नहीं लोगों का भरोसा जीतने के लिए उसके अपना परिवारिक व्यवसाय छोड़ दिया है और कैनेडा की नागरिकता भी छोड़ दी है। 29 सितंबर 2022 को अमृतपाल मोगा के रोडे गांव पहुंचता है। वही रोडे गांव जहां से खालिस्तानी आतंकी जरनैल सिंह भिंडरावाले की जड़ें जुड़ी हुई थीं। 29 सितंबर को ही रोडे गांव में बतौर वारिस पंजाब दे प्रमुख अमृतपाल सिंह की दस्तारबंदी होती है। इसके बाद अमृतपाल सीधे देश की सरकार और सिस्टम को चैलेंज देने लगता है। इतना ही नहीं ‘दस्तार बंदी’ समारोह में खालिस्तान के समर्थन में नारे भी लगाए गए थे।

दीप सिद्धू ने जब संगठन बनाया था, तब खालिस्तान समर्थन जैसी बातें सामने नहीं आई थीं। दीप के परिवार ने अमृतपाल से दूरी बनाते हुए कहा है कि वारिस पंजाब दे का प्रमुख उन्होंने नहीं बनाया। उन्हें तो ये भी नहीं मालूम कि दुबई से पैराशूट लैंडिंग कर अमृतपाल कैसे ‘वारिस पंजाब दे’ का प्रमुख बन बैठा। वारिस पंजाब दे का प्रमुख बनने के बाद उसने पंजाब में धार्मिक यात्रा चलाई. वह युवाओं को अमृत छकाने लगा और खालिस्तान के नाम पर ग्रामीण युवाओं को जोड़ने लगा. या यूं कह लें बहकाने लगा।

अमृत छकाना, खालसा का प्रचार और ड्रग रिहैब फैसिलिटी के बहाने वह आम लोगों के बीच बैठ बनाने लगा। लोगों उसे पसंद करने लगे। इस बीच भी वह अपना खालिस्तानी मकसद कभी नहीं भूला। उसने हिंदुओं के साथ ईसाई समुदाय पर भी टिप्पणी की थी कि ईसा जो खुद को नहीं बचा पाए, वो बाकी सबको कैसे बचाएंगे? इसपर भी काफी विवाद हुआ था। इसको लेकर ईसाई समुदाय चार घंटे तक विरोध प्रदर्शन करके इनपर धार्मिक भावनाओं को आहत करने और सांप्रदायिक विभाजन को बढ़ाने का प्रयास करने के लिए रिपोर्ट दर्ज करवाए थी।

फिलहाल अमृतपाल सिंह के खिलाफ अबतक 4 केस दर्ज हो चुके हैं, जिसमें अजनाला में वरिंदर सिंह को अगवा कर मारपीट करने का आरोप, अमृतसर में 15 फरवरी को प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और सीएम के खिलाफ हेट स्पीच, मोगा में 19 फरवरी को प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के खिलाफ हेट स्पीच का आरोप, अजनाला में हिंसा और थाने पर कब्जे के लिए पुलिसवालों को जख्मी करने का केस शामिल हैं। फिलहाल वह फरार है पर पुलिस का कहना है कि ज्यादा दिनों तक फरार नहीं रह पाएगा।

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