Monday, April 15, 2024
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Bihar : ललन बाबू कहिए, ये राजीव रंजन सिंह का क्‍या मतलब है… मंच से बोले नीतीश कुमार, फिर सुनाया ‘दोस्‍ती पुराण’

 पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भामाशाह जयंती यानी रविवार को आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जदयू के दो नेताओं संग अपनी खास दोस्‍ती का जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन नेताओं से उनकी दोस्‍ती 1985 से है।

दरअसल, नीतीश कुमार ने जिन दोनों नेताओं संग दोस्ती का जिक्र किया, उन दोनों ही नेताओं का नाम ललन है। पहले नेता- नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह और दूसरे नेता-विधान परिषद के सदस्य और जदयू के कोषाध्यक्ष ललन सर्राफ। मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने दोनों नेताओं संग अपनी दोस्ती का जिक्र करते हुए कहा कि ई ललन सर्राफ हैं और हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन बाबू हैं। ललन सिंह कहिए, ई राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह का क्‍या मतलब है।

 

नीतीश कुमार ने कहा, ”हमारी दोस्ती हाल की थोडे ही है। पौराणिक दोस्ती है न जी। बताइए, हमारी और इनकी दोस्‍ती साल 1985 से है। अब आप समझ लीजिए, तब से इनसे दोस्ती है हमारी। हम तो इनको ललन सिंह ही जानते हैं। त आप लोग ललने बाबू कहना। अइसा नहीं, इ त नाम रखे हुए हैं न त छपता है राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, लेकिन हम लोग कहेंगे, आप लोग इनको ललन बाबू कहा कीजिए, इ ललने बाबू हैं।”

ई ललन सर्राफ…

इसके बाद सीएम नीतीश कुमार ने कार्यक्रम आयोजित करने के लिए विधान परिषद के सदस्य और जदयू के कोषाध्यक्ष ललन सर्राफ का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि ई ललन सर्राफ हैं। सीएम ने कहा कि जेपी आंदोलन के समय जब वे भागलपुर जेल गए थे, तब वहां ललन सर्राफ से दोस्‍ती हुई थी। इनका और मेरा रिश्ता तभी से है। ललन सर्राफ पढ़ते थे भागलपुर में, लेकिन घर मधेपुरा में है। आज भी जब मधेपुरा जाता हूं तो ललन सर्राफ के घर में ही रुकता हूं।

नीतीश ने कहा कि इनके साथ तो किन किन का रिश्‍ता है, यह आप लोग जानते हैं न। ये (ललन सर्राफ) सुधा श्रीवास्तव की बेटी से बियाह किए हैं। और सुधा श्रीवास्तव कौन, जेपी की भगिनी, आप इनको जान लीजिए। भामाशाह जयंती मना रहे हैं, लेकिन इनका जेपी परिवार से रिश्ता है।

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