Friday, April 19, 2024
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Starvation in Pakistan : रक्षक की जगह भक्षक बनी हुई है पाकिस्तान की सेना 

सी.एस. राजपूत   

कहा जाता है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो फिर कौन बचाएगा। मतलब मरना ही है। ऐसा ही हाल पाकिस्तान का है। पाकिस्तान की सेना भारत का डर दिखाकर पाकिस्तान को मिलने वाले फंड का मजा लूटती रही और जनता को बदहाली की गर्त में धकेल दिया। पाकिस्तानी सेना के हाथ में ही वहां के धंधे हैं। यह भी कहा जा सकता है कि पाकिस्तान की सेना धंधेबाज है। पाकिस्तान की सेना अधिकारियों के बच्चे जो जिंदगी जी रहे हैं वह तो नेताओं के भी नहीं जीते। आज की तारीख में भी सेना मजे मार रही है और जनता भुखमरी के कगार पर है। यह भी कहा जा सकता है कि पाकिस्तान की सेना ने देश की अर्थव्यवस्था को चाट लिया है।


इसे पाकिस्तान का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि एक ओर वहां के लोगों के लिए दो वक्त की रोटी के लाले पड़े हुए हैं वहीं वहां की सेना की सेना लग्जरी जिंदगी जी रही है। पाकिस्तान के लोग तो  आसमान छूती महंगाई से ट्रस्ट है पर वहां की सेना का इसका कोई असर नहीं पड़ा रहा है। देश की अर्थव्यवस्था इस कदर बदहाल हो चुकी है कि सरकार के पास विदेशी मुद्रा भंडार की भारी कमी है मतलब लोग जरूरी चीजें भी नहीं खरीद पा रहे हैं। वह बात दूसरी है कि इतनी खराब स्थिति के बाद भी पाकिस्तान की सेना मजे मार रही है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को तबाह करने में वहां की सेना का हाथ
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को तबाह करने में वहां की सेना का पूरा हाथ है। द संडे गार्जियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के पूर्व सेना प्रमुख क़मर जावेद बाजवा 2009-2013 तक मेजर जनरल के रैंक के अधिकारी थे, तब इस्लामाबाद से एक चार्टर्ड विमान उनके दो बेटों में से एक को लंदन ले जाता था, जहां वे बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। दुनिया के प्रसिद्ध और महंगी यूनिवर्सिटी में वह पढ़ाई कर रहा था। पाकिस्तानी आर्मी के एक अफसर के  बेटे की भी उसके साथ पढ़ने की बात सामने आई है।

 सेना के अफसरों के बच्चे पढ़ रहे हैं विदेश में 

पाकिस्तानी सेना अधिकारियों के बच्चे दुनिया की टॉप और महंगी यूनिवर्सिटी में पढ़ते रहे हैं। यह भी बातें निकल कर सामने आ रही है कि ये बच्चें दूसरे बच्चों की तरह लोन लेकर नहीं पढ़ रहे थे और उनके पास खर्चे के लिए दूसरे बच्चों से ज्यादा पैसे होते थे। मतलब उनका जीवन स्तर दूसरे बच्चों से अच्छा था।

उठाया जाता था 35 लाख का खर्च

यदि रिपोर्ट की माने तो जब पाकिस्तान की महंगाई 7.8 फीसदी से बढ़कर 20.8 फीसदी हो गई थी लोग भुखमरी के कगार पर थे तो पाकिस्तानी आर्मी में कार्यरत या फिर रिटायर्ड बच्चे  बिर्टेन में पढाई कर रहे थे। एक विदेशी छात्र के लिए जब 2010 में यूके स्थित अच्छी यूनिवर्सिटी में पढ़ने की फीस 25 हजार से 28 हजार पाउंड थी तो उस दौरान एक पाउंड की कीमत 140 पाकिस्तानी रुपए का था। मतलब  35 लाख का खर्च आता था। यह पैसा कहां से आ रहा था ? यह सब जनता की हकमारी थी।

कहां से आते थे पैसे ?

जहां तक पाकिस्तानी से के अफसरों के वेतन की बात है तो पाकिस्तान में उस दौर में एक डबल स्टार जनरल की औसत सैलरी 1.5 लाख रुपये भी नहीं थी। ऐसे में प्रश्न उठता है कि कि बच्चों की पढ़ाई को लेकर इतने बड़े स्तर पर पैसा कहां से आता था। पाकिस्तान में सेना इतनी ताकतवर है कि  वहां के कारोबारी ठेका लेने के लिए सेना के अफसरों की मदद लेते हैं। ऐसे में ये अफसर मोटा वसूलते हैं। बताया जाता है कि सेना वहां पर रियल एस्टेट में पैसा लगाए हुए है। पाकिस्तान का काफी कारोबार सेना के हाथ में है। मतलब पाकिस्तानी से भारत का डर दिखाकर पाकिस्तान की जनता का बेवकूफ बनाती रही और वहां के संसाधन और पैसों का मजा लूटती रही है।

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