Friday, April 19, 2024
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2024 लोकसभा चुनाव में मोदी के लिए मुलायम बनने जा रहे हैं शरद पवार! गौतम अडानी की तारीफ कर विपक्ष की लामबंदी की निकाल दी है हवा  

Charan Singh 

बीजेपी को फिर से केंद्र में सरकार बनाने के लिए काम करने की जरूरत नहीं है विपक्ष में ही कोई नेता उभरकर आ जाता है। 2019 के लोकसभा चुनाव में जहां विपक्ष की मजबूती को सपा संस्थापक कमजोर करने में लगे थे तो 2024 के चुनाव में एनसीपी मुखिया शरद पवार विपक्ष की हवा निकालने के लिए आगे आ गये हैं। 2019 के चुनाव से पहले जहां मुलायम सिंह यादव ने नरेन्द्र मोदी को फिर से प्रधानमंत्री बनने की अग्रिम बधाई तक तक दे डाली था वहीं शरद पवार अडानी की तारीफ कर विपक्ष का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अडानी के संबंधों को लेकर बनााय गया दबाव कम करने में लग गये हैं। शरद पवार जहां अडानी और मोदी के संबंधों को लेकर विपक्ष द्वारा की जा रही जेपीसी की मांग को को गलत करार दे रहे हैं वहीं गौतम अडानी की तारीफ में कसीदे पढ़ रहे हैं। मलतब जिस तरह से मुलायम सिंह यादव ने चुनाव से पहले ही मोदी की तारीफ कर अपने परिवार का बचाव कर लिया था इसी तरह से शरद पवार भी अपने परिवार को बचाने में लगे हंै।
अडानी मामले को उठान के चलते कांग्रस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता जाने के बाद विपक्ष मोदी सरकार पर दबाव बनाने में लगा ही था कि शरद पवार के एक बयान से विपक्ष की मजबूती की नींव ही हिल गई। शरद पवार हिंडनबर्ग मामले में गौतम अडानी का समर्थन करते दिखाई दिये। २०१५ में लिखी शरद पवार की किताब का भी जिक्र जोर पकड़ रहा है। किताब का नाम लोक माझे सांगाती है। इस किताब में शरद पवार ने अडानी का जिक्र किया है। ऐसेे समय में ये किताब विपक्ष के लिए एक करारा झटका माना जा रहा है। शरद पवार ने अपने पिताब लोक माझे सांगाती में अडानी की खूब तारीफ की है। दूसरी ओर ओर शरद पवार ने एक इंटरव्यू में कहा कि इंड्ट्रिरयल ग्रुप को टारगेट किया गया। पवारने यह भी कहा कि इन मामले में संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की जांच की मांग व्यर्थ है।
दिलचस्प बात यह है कि शरद पवार का यह बयान ऐसे समय में आया है कि जब सदन में 10 विपक्षी पार्टियां अडानी मुददे को जमकर उठा रही थी। इन तमाम विपक्षी पार्टियों की ओर से मोदी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लागए जा रहे थे। इस समय एनसीपी विपक्ष की एक बड़ी पार्टी है। शरद पवार पार्टी के बड़े नेता हैं। ऐसे में उनके इस बयान ने कई सवाल खड़े कर दिये हैं। इसी क्रम में अडानी पर शरद की लिखी किताब भी एक सवाल बनकर उभरी है।

पुरानी है पवार अडानी की दोस्ती

अडानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ही दोस्त नहीं है बल्कि वह शरद पवार के भी पुराने दोस्त हैं। मतलब अधिकतर नेताओं की नेतागिरी अडानी जैसे पूंजपीतियों के बल पर ही चलती है। वैसे तो शरद पवार भी आज की तारीख में बड़े उद्योगपति बन गये हैं। वह कई शुगर मिल के मालिक हैं। मतलब अब तो वह अपने धंधों के लिए राजनीति कर रहे हैं। शरद पवार ने अडानी को मेहनती साधारण जमीन से जुड़ा और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में कुछ बड़ा करने की महत्वाकांक्षा रखने वाला व्यक्ति बताया है। पवार ने यह भी लिखा है कि उनके आग्रह पर ही अडानी ने थर्मल ऊर्जा क्षेत्र में कदम रखा।

शरद ने अपनी किताब में अडानी को कैसा बताया

शरद पवार ने अपनी किताब में अडानी के कोयला क्षेत्र में कदम रखने और अपनेे पवार के ही सुझाव पर कारोबारी के थर्मल एनर्जी क्षेत्र में उतरने की बात कही है। पवार उस समय केंद्रीय कृषि मंत्री थे। शरद की किताब के मुताबिक अडानी को कोयला क्षेत्र मंे कदम रखने का सुझाव पवार ने ही दिया था। अडानी ने 3,000 मेगावाट का ताप ऊर्जा संयंत्र स्थापित  किया। किताब में शरद ने याद किया कि कैसे उन्होंने अपने दशकों पुराने राजनीतिक करियर के दौरान महाराष्ट्र में विकास के लिए कई उद्योगपतियों के साथ करीबी ताल्लुकात बढ़ाए। राक्रांपा प्रमुख शरद पवार ने कहा कि वह उद्योगपतियों के साथ नियमित संपर्क में रहते थे जो किसी भी दिन दोपहर दो बजे से शाम चार बजे के बीच पहले से समय लिये बगैर उनसे मिल सकते थे। शरद पवार के बयान के बाद कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने कहा है कि एनसीपी का अपना कोई स्टैंड हो सकता है लेकिन 19 विपक्षी पार्टियां यह मानती हैं कि अडानी मुद्दा गंभीर है।

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