दिल्ली में जेल वैन में गैंग वार, कोताही या कांटे से कांटा निकालने कवायद की ?

-राजेन्द्र स्वामी

दिल्ली। एशिया की सबसे बड़ी और सुरक्षित जेलों में शुमार दिल्ली की तिहाड़ जेल से चल रही गैंगवार क्या पुलिस कांटे से कांटा निकलने की अघोषित मुहीम है? या पिफर दिल्ली पुलिस ने नीटू गैंग को खत्म कर पुलिस पर हुए हमले और बाहरी दिल्ली में हुए रामनिवास हवलदार की हत्या का बदला भी ले रही है? या फिर वह तमाम गैंगस्टर को यह सन्देश भी दे रही है की पुलिस पर हमneeraj bawaniyले का किसी भी गैंग के लिए क्या अंजाम हो सकता है। दिल्ली में 25 अगस्त को जेल वैन में नीतू दाबोदिया गैंग के दो सदस्यों प्रदीप भोला और पारस उपर्फ गोल्डी की हत्या को इसी चर्चाओं के इसी चश्मे से भी देखा जा रहा है।
दिल्ली के नीतू दोबोदिया और नीरज बावनिया गैंग के बीच चल रही रंजिस के बावजूद भी दिल्ली पुलिस ने इतनी बड़ी लापरवाही कैसे कर दी कि  नीरज गैंग को नीतू गैंग के दोनों प्रमुख सदस्यों  की हत्या करने का मौका मिल गया। जबकि दिल्लीpardee photo पुलिस से लेकर अपराध जगत की मामूली जानकारी रखने वाले तक यह अच्छी जानते थे की नीरज बावनिया गैंग और नीतू दबोदा गैंग के बीच वर्चस्व को लेकर खूनी जंग चल रही है। दोनो ओर से कितने ही लोग मारे जा चुके है। नीरज paras photoबावनिया गैंग और नीतू दाबोदा एक दूसरे पर हमला और हमले  प्रयाश कर चुके थे। पिफर भी दिल्ली पुलिस दोनों गैंग के सदस्यों को केवल एक ही वैन में क्यों ले जा रही थी ? नीरज और उसके साथ 7 लोग थे जबकि नीतू गैंग के दो ही लोग थे ? क्या यह पुलिस को रणनीति है ? वैसे पुलिस ने सभी काम और पूरी करवाई पुरे कानून की हद में रह कर कर ही की थी।  बाकायदा पुरे प्रोटोकाल का ध्यान रखा गया था।  पुलिस की लापरवाही को लेकर उठे सवालों पर यदि कोई जांच होती है तो दिल्ली पुलिस के पास सभी जबाब भी मौजूद है।
घटना 25 अगस्त शाम करीब  पांच बजे की है।  कुख्यात बदमाश नीरज बावनिया और उसके गिरोह के 6 सदस्य नवीन बाली , सन्नी , सुनील , दिनेश और राहुल और नवीन सुबह तिहाड़ जेल से वैन में बैठकर रोहिणी कोर्ट में सुनवाई के लिए गए। उसी वैन में उनके विरोधी नीतू दाबोदा गिरोह के पारस उपर्फ गोल्डी और प्रदीप उपर्फ भोला को भी कोर्ट से वापस जेल ले जाया जा रहा था। दिल्ली के पीतम पूरा वेस्ट इन्क्लेव पर उन्हें मौका अच्छा मिला और नीरज ने साथ बैठे अपने साथियों को इशारा किया।  इशारा मिलते ही नीरज के साथियों ने प्रदीप भोला  और पारस के चेहरों पर तोलिया डाल दिया और निचे गिराकर लात और मुक्कों से मार मार कर दोनों की हत्या कर दी।
इस हत्या से दिल्ली पुलिस में हड़कंप मच गया। जेल वैन को सीधे प्रीमम पुरा स्थित भगवान महावीर अस्ताल ले जाया गया। वहां डाॅक्टरों ने प्रदीप और पारस दोनों की डेड घोषित कर दिया। मौके पर बहारी दिल्ली के डीसीपी विक्रमजीत सिहं सहित स्पेशल सेल और क्राईम ब्रांच के आला अध्किारी भी मौक पर पहुंचे। भारी पुलिस फोेर्स ने अस्पताल को घेर लिया। नीरज भी इस घटना में घायल हुआ है।
प्रदीप भोला और पारस का भी लंबा चैड़ा अपराध्कि इतिहास है। दोनों पर हत्या, जबरन उगाही, और पुलिस पर  हमले जैसे डेढ़ दर्जन से ज्यादा संगीन मुकदमें मुकदमें दर्ज है। इनकी हत्या से पुलिस ने भी रहत की सांस ली होगी और नीरज गैंग के सदस्यों की तादात और  भी ताकत बढ़ी है। हालांकि क्राइम ब्रांच और स्पेशल सेल को आशंका है की पारस उपर्फ गोल्डी की हत्या के बाद बाहरी दिल्ली के बवाना , नरेला  पंजाबी बाग, राजौरी गार्डन और रोहिणी  इलाकों में एक्सटार्शन की वारदात बढ़ जाएगी।  पारस की हत्या की बाद नीतू गैंग कमजोर हुआ है वहीं बावनिया के दबदबे में बढ़त हुयी है। गौरतलब है की नीतू दाबोदा दिल्ली के बसंत कुंज में हुए एनकाउंटर में मारा जा चुका है।  नीतू की मौत के बाद गिरोह की कमान पारस ने ही संभाल ली थी। अब  बावनिया गिरोह ने पारस को भी रास्ते से हटा दिया।  पारस और प्रदीप को उसके सबसे बड़े दुश्मन नीरज के साथ 7 लोगों के बीच एक साथ क्यों भेज दिया गया ? इतनी बड़ी लापरवाही पुलिस से क्यों और कैसे हो गयी? जेल वैन में मौजूद 10 से ज्यादा पुलिस वाले मौजूद थे बावजूद इसके हमले के दौरान उन्होंने दोनों को बचाने की कोशिस क्यों नहीं की ? इन सवालों के जबाब भी दिल्ली पुलिस और जेल प्रशासन द्वारा बहुत सटीक दिए जा रहे है। कैदियों को जेल से कोर्ट तक लाने और ले जाने की जिम्मेदारी संभाल रही दिल्ली पुलिस की तीसरी बटालियन के डीसीपी एस.के.तिवारी ने कहा की उन्हें जेल की ओर से ऐसी कोई जानकारी नहीं दी गयी थी की दोनों गिरोह के बीच खूनी गैंग वार चल रही है। सबकी अच्छी तरह तलाशी लेने के बाद ही वैन में बैठाया गया था। जहाँ तक बात उन्हें बचने की की है जेल वैन में पुलिस वाले जब तक नहीं जा सकते जब तक की उनकी संख्या कैदियों की संख्या से दुगनी न हो और पुलिस पफोर्स वैन को चारों और से घेर न ले। यही वजह थी कि पुलिस जेल वैन के अंदर नहीं गयी।
बहारहाल दिल्ली के मंगोल पुरी थाने में धरा 302 के तहत मर्डर और धरा 34 के तहत काॅमन ईटेशन के आरोप में मामला दर्ज कर जांच कर रही है। पुलिस के लिए एक सरसर्द तो दूर हुआ लेकिन अब नीरज उसके लिए नया सरदर्द साबित हो सकता है। बहारी दिल्ली के ज्यादातर कुख्यात अपराधी बेशक जेल की सलाखों में ही लेकिन यहां की नयी पीढ़ी इनसे प्ररेणा लेकर अपराध् जगत की दुनिया में कदम रख रही है। दिल्ली भी उस तर्ज पर निकल पड़ी है जिस पर कभी मुबंई चल पड़ी थी।

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