पब्लिक स्कूलों में आनलाइन क्लासेस बंद होंगी

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पब्लिक स्कूलों में आनलाइन क्लासेस  बंद होंगी

पत्रिका संवाददाता

नई दिल्ली। दिल्ली के पब्लिक स्कूलों ने अपनी आनलाइन क्लासेस  को बंद करने का फैसला लिया है। इसकी मुख्य वजह स्कूल फीस में आई भारी कमी बतायी गई है। यह फैसला दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल्स मैनेजमेंट एसोसिएशन की तरफ से लिया गया है। इसकी जानकारी ऐसोसिएशन ने 4 नवंबर को प्रेस विज्ञप्ति के जरिए दी।

ऑनलाइन क्लास में पढ़ती हुई बच्ची

एसोसिएशन के अध्यक्ष आर सी जैन ने बताया कि पिछले आठ महीनों से दिल्ली के ​अधिकतर अभिभावकों ने स्कूलों की फीस देनी बंद कर दी है। पहले तो 50 से 60 फीसदी फीस जमा ​किया जा रहा था, लेकिन नवंबर आते—आते मात्र 10 फीसदी अमिभावक ही फीस जमा करवा रहे हैं।

शिक्षकों की फीस देना हो गया है मुश्किल

उन्होंने बताया कि इस कारण स्कूल प्रशासन आनलाइन की पढ़ाई के लिए नियुक्त ​शिक्षक—शि​क्षिकाओं को वेतन देना मुश्किल हो गया है। साथ ही दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा बगैर स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट के ए​डमिशन लेने के आदेश की वजह से अभिभावक फीस नहीं दे पा रहे हैं।

इस कारण स्कूल प्रशासन मुश्किल दौर में आ चुका है। उल्लेखनीय है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने क्वीन मेरी नादर्न स्कूल के मामले में आठ जुलाई को एक फैसाल सुनाया ​था कि यदि अभिाभावक सक्षम होते हुए भी फीस जमा नहीं करवाते हैं तो ऐसे अभिभावकों के बच्चों की आनलाइन कक्षाएं बंद की जा सकती हैं।

फीस ना बढ़ाने को लेकर दिल्ली सरकार के आदेश का हुआ है पालन

आर सी जैन ने बताया कि दिल्ली सरकार ने 17 अप्रैल को सभी अभिभावकों से मासिक आधार पर स्कूल फीस लेने का आदेश दिया था। इसे आदेश के संदर्भ में सरकार ने माना था कि पिछले पांच सालों में पब्लिक स्कूलों की फीस बढ़ाने की स्वीकृति नहीं दी थी। इसलिए स्कूलों के पास अपने टीचर और दूसरे कर्मचारियों को वेतन देने लिए पैरेंट्स से फीस लेने का कोई अतिरिक्त आधार नहीं है। दिल्ली सरकार के आदेश के आधार पर ही सभी स्कूलों ने लागू किया।

हालांकि ऐसेसिएशन की दिल्ली के उन सभी पैरेंट्स से सहानुभूति है, कारण 80 प्रतिशत स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 15 लाख बच्चे आनलाइन कक्षाएं बंद होने से प्रभावित हो जाएंगे। श्री जैन ने बताया कि जब स्कूलों के पास पैरेंट्से से स्कूल फीस नहीं आएगा तब वे अपने टीचर को वेतन नहीं दे सकते हैं। स्कूल के दूसरे खर्चे को तो कुछ समय के लिए टाला जा सकता है, पर वेतन को नहीं। उन्होंने बताया कि दिल्ली के पब्लिक स्कूल दिल्ली सरकार से आर्थिक बजट की गुहार लगा चुके हैं, जिसे अनसुनी कर दी गई।      

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