16023 करोड़ का नगर निगम बजट मंजूर, सफाई और शिक्षा पर रहेगा जोर, व्यापारियों को सीलिंग से मिलेगी राहत

Municipal Corporation budget of 16023 crores approved, emphasis will be on cleanliness and education, traders will get relief from sealing

नई दिल्ली, 1 अप्रैल। दिल्ली नगर निगम के बजट को लेकर चल रही संशय पर अब विराम लग गया है। नगर निगम सदन में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और विपक्षी बीजेपी के पार्षदों के बीच चर्चा के बाद 2022-23 का प्रस्तावित और इस नए वित्तीय वर्ष का अनुमानित 16 हजार करोड़ से ज्यादा का बजट पारित कर दिया गया। निगम आयुक्त ने इस बजट को जनहित में बताया। इस बजट में आप की तरफ से कोई नया संशोधन नहीं किया गया। इसमें सबसे ज्यादा बजट सफाई पर व्यय होगा।  

एमसीडी अपने बजट का 27।87 फीसदी सफाई पर खर्च करेगी। प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर 20।82 फीसदी बजट खर्च करेगी। इसी तरह शिक्षा पर 17।77 फीसदी, लोक निर्माण कार्य एवं पथ प्रकाश पर 11।36 फीसदी और जन स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सहायता पर 10।37 फीसदी बजट खर्च करेगी।  एमसीडी की सत्ता में आप के आ जाने से निगम की आय में बढ़ोतरी जरूर हुई है। दिल्ली सरकार ने अपने आगामी बजट वर्ष में एमसीडी को 8,241 करोड़ रुपये वित्तीय सहयोग देने की घोषणा की है। इसमें 850 करोड़ ऋण का प्रावधान है। निगम की योजनाओं, कार्यक्रमों, परियोजनाओं के लिए 2659 करोड़ रुपये, बेसिक टैक्स असाइनमेंट के रूप में 2492 करोड़, स्टांप, पंजीकरण शुल्क के रूप में 2240 करोड़ दिए हैं। इससे एमसीडी की आय पर असर पड़ेगा, जबकि आयुक्त के अनुमानित बजट में कुल आय 15523।95 करोड़ बताई गई थी।

सदन में पक्ष-विपक्ष की तरफ से कुल 15 निजी प्रस्ताव लाए गए थे, जिनमें से छह प्रस्ताव सदन में पास किए गए।  रविंद्र भारद्वाज के प्रस्ताव को सदन में पास किया गया। प्रस्ताव के मुताबिक चांदनी चौक क्षेत्र में निगम कन्वर्जन व पार्किंग प्रभारों की मांग संबंधी नोटिस भेज रहा है, अब जब तक निगम इसपर प्रभावी व पारदर्शी नीति नहीं बना लेगा, तब तक दुकानदारों, व्यापारियों को नोटिस नहीं भेजा जाएगा। प्रस्ताव है कि सीलिंग खोलने से संबंधित मामलों में विचार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने स्वतंत्र न्यायिक समिति गठित की है, जिससे संपत्तियों को डी-सील किया जा सके। एमसीडी ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करने के बजाय व्यापारियों की मदद करेगी। सदन में उनके प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। सामुदायिक विकास केंद्र से जुड़े कन्वर्जन प्रभारों की वसूली के संबंध में आयुक्त की ओर से किसी को भी नोटिस नहीं भेजा जाएगा। इसे सदन की मंजूरी दी गई। फिलहाल इन निजी प्रस्तावों को जमीन पर कैसे लागू कराना है, इसका फैसला निगम आयुक्त को ही लेना है। वहीं भाजपा के सारे प्रस्ताव रद्द कर दिए गए।

बता दें कि निगम सदन में कुल 17 प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए, इनमें व्यापारियों को सीलिंग से राहत देने, हाउस टैक्स व कन्वर्जन चार्ज से लोगों को परेशान न करने सहित सत्तापक्ष आम आदमी पार्टी की ओर से सदन में प्रस्तुत 6 प्रस्तावों को पारित कर दिया गया, जबकि विपक्षी बीजेपी की तरफ से सभी कर्मचारियों को कैशलेस मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराने सहित सदन में प्रस्तुत 11 प्रस्तावों को खारिज कर दिया गया।

 

 

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