Sunday, May 19, 2024
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देश में बड़ा मुद्दा बना सरकार का जंतर-मंतर पर बैठे पहलवानों की न सुनना

Charan Singh 
खेल फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाले पहलवानों को भले ही जनवरी माह में बरगला कर अपने घरों को भेज दिया गया था पर इस बार इन पहलवानों के जंतर-मंतर पर डटने से केंद्र सरकार के लिए परेशानी खड़ी हो गई है। मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के साथ ही दिल्ली पुलिस को नोटिस भेजा है उससे मामला बड़ा रूप ले रहा है। वैसे भी इन पहलवानों को राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिलना शुरू हो गया है। पहलवानों का बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण का आरोप लगाना और दिल्ली पुलिस का एफआईआर दर्ज न करना। सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस भेजना मामले को गंभीर बना रहा है। कहना गलत न होगा कि देश में यह बड़ा मुद्दा बन चुका है।
बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कार्रवाई को लेकर दिल्ली जंतर-मंतर पर बैठीं महिला पहलवानों को विपक्ष के राजनीतिक दलों का पूरा समर्थन मिल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले को गंभीर बताते हुए केंद्र सरकार और एफआईआर दर्ज न करने वाली पुलिस को नोटिस भेजा है। महिला पहलवानों की एक न सुनी जाने पर जहां पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक जंतर-मंतर पहुंचे वहीं राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी भी महिला पहलवानों को समर्थन देने जंतर-मंतर पहुंचे। जंतर-मंतर पर मीडिया से बात करते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि सरकार बृजभूषण शरण सिंह का बचाव कर रही है।

उन्होंने कहा कि पुलिस का यह कहना कि पहले एफआईआर दर्ज करने से पहले वह जांच करेगी बिल्कुल गलत है। उन्होंने कहा कि पहले एफआईआर दर्ज की जाए उसके बाद जांच की जाए। उन्होंने संसद में बने रेप पर कानून का हवाला देते हुए कहा कि देश में इतना बड़ा कानून होने के बावजूद उन महिला पहलवानों को न्याय नहीं मिल रहा है जिन्होंने देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकेत भी जंतर मंतर पर धरना दे रहे खिलाड़ियों का समर्थन करने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के साथ न्याय होना चाहिए। यह बहुत शर्मनाक है कि देश के गौरव को न्याय के लिए धरने पर बैठना पड़ रहा है। बृजभूषण के खिलाफ तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।


गौरतलब है कि इससे पहले कल बुधवार को बिहार के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने धरनास्थल पर पहुंचकर खिलाड़ियों का समर्थन किया था। इस दौरान मलिक ने कहा था कि बहुत बुरी स्थिति है कि देश का सम्मान बढ़ाने वाले खिलाड़ियों को न्याय के लिए अब सड़क पर बैठना पड़ रहा है। उन्होंने खिलाड़ियों का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार को भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ केस दर्ज करना चाहिए।

इससे पहले मंगलवार को अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की कार्यवाहक अध्यक्ष नेट्टा डिसूजा ने जंतर-मंतर पर पहुंचकर महिला पहलवानों की आवाज में अपनी आवाज मिलाई थी। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा कांग्रेस नेता उदित राज भी महिला पहलवानों को समर्थन देने जंतर-मंतर पहुंच चुके हैं। दरअसल बजरंग पुनिया, विनेश फोगट और साक्षी मलिक समेत शीर्ष भारतीय पहलवान महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न के लिए भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और अन्य कोचों के खिलाफ जंतर-मंतर पर धरना दे रहे हंै।
दरअसल जनवरी में भी देश के इन दिग्गज पहलवानों ने अपनी ही फेडरेशन के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और अन्य कोचों के खिलाफ  यौन शोषण आरोप लगाकर दिल्ली जंतर-मंतर पर बैठ गये थे। इन पहलवानों ने आरोप लगाया था कि फेडरेशन के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने महिला पहलवानों का यौन उत्पीड़न किया है। फेडरेशन के अधिकारी भ्रष्टाचार करते हैं और पहलवानों का हक मारते हैं। पहलवानों की मांग थी कि बृजभूषण सिंह उन्होंने मांग की थी कि बृजभूषण सिंह अध्यक्ष पद से इस्तीफा दें और फेडरेशन को भंग किया जाए। फेडरेशन भंग तो नहीं की गई पर केंद्र सरकार ने बृजभूषण सिंह शरण सिंह से इस्तीफा जरूर ले लिया था पर उनके खिलाफ यौन शोषण की एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी।
दरअसल  बृजभूषण शरण सिंह और अन्य कौचों पर यौन शोषण का आरोप लगाकर १८ जनवरी को सुबह करीब ११.३० बजे ओलंपिक पदक विजेता बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक समेत ३० बड़े पहलवान दिल्ली के जंतर-मंतर पर बैठ गये थे। १८ जनवरी को ही शाम ४ बजे प्रेस कांफ्रेंस हुई, जिसमें विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया ने कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन शोण जैसे गंभीर आरोप लगाए। नेशनल कैंप में कोच समेत फेडरेशन के अन्य लोगों पर जान से मारने की धमकी देने, मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाये।  इसके बाद फेडरेशन के अध्यक्ष बृजभूषण सिंह ने आरोपों को खारिज कर कहा कि इसमें कोई भी सच्चाई नहीं है। उन्होंने कहा कि आरोप सच निकले तो वह फांसी पर चढ़ जाएंगे। इसके बाद शाम में खेल मंत्रालय ने बृजभूषण को 72 घंटे में आरोपों पर जवाब देने के लिए कहा, इसके अलावा दिल्ली महिला आयोग ने भी खेल मंत्रालय को नोटिस जारी करके एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी। इसके बाद रात में प्रदर्शनकारी और सभी लोग घटनास्थल पर चले गये।
19  जनवरी को पहलवान फिर धरने पर बैठ गये थे। इसके बाद पहलवान और बीजेपी नेता बबीता फोगाट ने पहलवानों से मुलाकात की और भरोसा दिलाने की कोशिश की कि उनकी मांगें मानी जाएंगी।  इसके बाद पहलवानों और भारतीय खेल प्राधिकरण के अधिकारियों के बीच एक मीटिंग हुई। इस मीटिंग में पहलवान बजरंग पुनिया, संगीता फोगाट, अमित पंघल, सरिता मोर, अंशू मलिक के अलावा प्राधिकरण की ओर सचिव, डीजी और उप सचिव मौजूद थे।

19 जनवरी को ही रात में खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी विरोध कर रहे पहलवानों से अपने घर पर मुलाकात की।

20 जनवरी को बड़े पहलवान जंतर-मंतर पर नहीं पहुंचे। हालांकि बॉक्सर वीजेंद्र सिंह अपना समर्थन देने जंतर-मंतर आए और कुछ देर बैठकर उन्होंने भी अपना विरोध जताया।  इसी दिन कथित तौर पर खेल मंत्री और पहलवानों के बीच फिर मीटिंग हुई, जिसमें पहलवानों को समझाया गया कि बृजभूषण सिंह को चूंकि आरोपों पर अपनी बात रखने का समय दिया गया है तो उन्हें समय पूरा होने से पहले इस्तीफा देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

इसके बाद पहलवानों ने अपनी 4 मांगें सामने रखी थी। 1. यौन उत्पीड़न की शिकायतों की जांच के लिए एक समिति की नियुक्ति हो। 2. भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह का इस्तीफा लिया जाए। 3. भारतीय कुश्ती महासंघ को भंग किया जाए। 4 WFI को चलाने के लिए पहलवानों के परामर्श से एक नई समिति की नियुक्ति हो।

20 जनवरी को ही भारतीय ओलंपिक समिति ने आरोपों की जांच के लिए एक समिति का गठन कर दी। इसमें योगेश्वर दत्त, अलकनंदा अशोक, मैरी कॉम, सहदेव यादव, डोला बनर्जी, श्लोक चंद्रा और तलीशा रे शामिल थे। उस समय कहा जा रहा था कि इस कमेटी के 8 से 10 दिन में आरोपों की जांच करके अपनी रिपोर्ट जमा करेगी।

जनवरी 20-21, रात में खेल मंत्रालय से पूरी जांच और एक्शन का आश्वासन मिलने के बाद पहलवानों ने अपना विरोध खत्म करने की घोषणा कर दी थी।

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