महिलाओं के लिए नई इबारत लिख रही डॉ. सुनीता जनावा

समाज कल्याण और सामाजिक उत्थान में इनका योगदान देख कर प्रशासन ने उन्हें अनेकों बार प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया है। वर्तमान में सेठ मेघराज जिंदल राजकीय महाविद्यालय सिवानी में अंग्रेजी विषय की सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। इन्हें कवयित्री के रूप में भी जाना जाता है और जब भी मौका मिलता है ये विभिन्न मंचों से अपनी प्रेरणादायक लेखनी से युवाओं को प्रोत्साहित करती है। ऑल इंडिया रेडियो पर भी विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार प्रस्तुत कर चुकी है। सड़क सुरक्षा, नशा मुक्ति, मानसिक स्वास्थ्य, नारी सशक्तिकरण, मानवाधिकार, कैरियर काउंसलिंग कर अन्य हेल्प डेस्क के माध्यम से ये स्वयं और अपने स्वयंसेवकों की टीम से लोगों को जागरूक करते हैं। अपने स्वयंसेवकों को इन्होंने बौद्धिक रूप से सशक्त किया है ताकि वो सुंदर भविष्य के जागरूक नागरिक के रूप में राष्ट्र निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभा सके।

प्रियंका सौरभ

नारी आज बुलंदियों को छू रही हैं, नित नए ऐतिहासिक कारनामों की इबारत लिख रही हैं। इसी कड़ी में एक और नाम है डॉ सुनीता जनावा। आज उनका नाम प्रखर समाजसेवी, नारी शिक्षा उत्प्रेरक, महिला रोजगार जागरूकता अभियान के वाहक के रूप पूरे इलाके में लिया जा रहा है। 2007 से निरंतर शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रही सुनीता जनावा वर्तमान में सेठ मेघराज जिंदल राजकीय महाविद्यालय सिवानी में अंग्रेजी विषय की सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। महाविद्यालय में अध्यापन के साथ-साथ विभिन्न विभागों का गठन करके कुछ अलग कार्यभार अध्यापकों को दिया जाता है जिससे कि महाविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके। इसी कड़ी में डॉक्टर सुनीता जनावा को वर्ष 2019 में महाविद्यालय स्तर पर राष्ट्रीय सेवा योजना प्रभारी बनाया गया। क्षेत्र में जुड़ते ही इनकी मानवीय रूचि उजागर हुई और सामाजिक कल्याण के कार्य में स्वयंसेवकों का इन्होंने ख्याल रखते हुए उनके अरमानों को पंख लगा दिए। जुड़ते ही सबसे पहले उन्होंने संगठन के रूप में मानसिक रूप से तैयार किया और उनके अंदर एक सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना जागृत हुई।

यही नहीं सिवानी उपमंडल प्रशासन द्वारा गोद लिए गए पास के गांव ढाणी मिट्टी में इन्होंने पर्यावरण और स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए और जब 2020 में कोरोना महामारी ने विकराल रूप दिखाया तो उस कठिन दौर में भी सुनीता जनावा और उनकी राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई ने अपने मजबूत इरादों और हौसलों की बदौलत न सिर्फ लोगों को इस महामारी से बचाव के बारे में जागरूक किया बल्कि मास्क सैनिटाइजर इत्यादि बचाव के साधन भी अपने निजी कोष से आमजन में उपलब्ध करवाएं। महाविद्यालय में एनएसएस प्रभारी के रूप में पांच बड़े वैक्सीनेशन कैंप आयोजित करवा कर पूरे महाविद्यालय के विद्यार्थियों सहित उनके परिवारजनों और स्टाफ को भी इस महामारी से सुरक्षित रखने में अपना योगदान दिया। स्वास्थ्य के प्रति इनकी जागरूकता और चेतना इस बात से जाहिर होती है कि पिछले 3 वर्षों में इन्होंने महाविद्यालय में पांच बड़े रक्तदान शिविर आयोजित किए हैं और इनसे लगभग 450 यूनिट रक्तदान हुआ है और स्वयं भी 9 बार रक्तदान कर चुकी है। यही नहीं ये हिमोग्लोबिन जांच शिविर, नेत्र जांच शिविर, बीएमआई जांच व अन्य स्वास्थ्य जागरूकता शिविर भी आयोजित करवाती रहती है।

इनका जन्म फतेहाबाद जिला के छोटे से गांव ढाणी छतरियां में हुआ। माता-पिता ने इनका पालन-पोषण एक लड़के की भांति करते हुए बहुत छोटी आयु में ही स्कूटर, ट्रैक्टर, गाड़ी चलाना सिखाया। बचपन से ही परिवारिक संस्कारों में मिला यह आत्मविश्वास और हौसला इन्हें जीवन में हर मोड़ पर आगे बढ़ता रहा। 12वीं तक की पढ़ाई अपने गृह जिला में करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए पिताजी ने इनका दाखिला हिसार करवाया और यहाँ रहकर इन्होने एमए इंग्लिश की डिग्री हासिल की। इसी दौरान इनकी शादी हो गई। शिक्षित परिवार में विवाह होने से पढ़ाई जारी रही और ससुराल पक्ष के पूर्ण सहयोग से इन्होंने शादी के बाद बीएड, एमफिल, पीएचडी की डिग्री हासिल की। इनके पति सतीश जनावा सुपरिंडेंट इंजीनियर के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

समाज उत्थान और समाज के प्रति इनका निस्वार्थ भावना हर किसी को अपनी तरफ खींच लेती है। समाज कल्याण और सामाजिक उत्थान में इनका योगदान देख कर प्रशासन ने उन्हें अनेकों बार प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया है। जिनमें मुख्य रुप से 24 सितंबर 2022 को राष्ट्रीय सेवा योजना दिवस पर मुंबई की कृष्णा फाउंडेशन द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर इनको कर्मवीर अवार्ड देकर सम्मानित किया गया। इसके अलावा 15 अगस्त 2022 को लोहारू में आयोजित किए गए स्वतंत्रता दिवस समारोह में माननीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री देवेंद्र बबली के हाथों प्रशस्ति पत्र मिला। इससे पूर्व 2021 में उपमंडल प्रशासन सिवानी इनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित कर चुका है। इन सबसे अलग इन्हें कवयित्री के रूप में भी जाना जाता है और जब भी मौका मिलता है ये विभिन्न मंचों से अपनी प्रेरणादायक लेखनी से युवाओं को प्रोत्साहित करती है। ऑल इंडिया रेडियो पर भी विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार प्रस्तुत कर चुकी है। सड़क सुरक्षा, नशा मुक्ति, मानसिक स्वास्थ्य, नारी सशक्तिकरण, मानवाधिकार, कैरियर काउंसलिंग कर अन्य हेल्प डेस्क के माध्यम से ये स्वयं और अपने स्वयंसेवकों की टीम से लोगों को जागरूक करते हैं। अपने स्वयंसेवकों को इन्होंने बौद्धिक रूप से सशक्त किया है ताकि वो सुंदर भविष्य के जागरूक नागरिक के रूप में राष्ट्र निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभा सके।

डॉ सुनीता अपने अब तक के सफर के लिए अपने माता-पिता, सास-ससुर और अपने जीवन साथी के योगदान के अलावा वर्तमान में इनकी कर्मभूमि सेठ मेघराज जिंदल राजकीय महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य श्री राजकुमार ख्यालिया का धन्यवाद करती है और कहती है कि हर बेटी, बहू को हम हर कदम पर आगे बढ़ने में मदद करें तो वह समाज में एक नई जगह बनाएगी और समाज नित नई ऊंचाइयों को छुएगा। उनका मानना है कि किसी भी सकारात्मक बदलाव के लिए कार्य योजना घोषणा करने की बजाय हम सबको कंधे से कंधा मिलाकर एकजुट होकर अपना योगदान देते रहना होगा। अगर हम सब अपनी सकारात्मक सोच को व्यवहार में उतारने का प्रयास करें तो समाज बेहद खूबसूरत हो सकता है।

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