Monday, April 15, 2024
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चौरी चौरा काण्ड: 99वां स्मृति दिवस

नेहा राठौर

देश में आज यानी 4 फरवरी को चौरीचौरा काण्ड का 99वां स्मृति दिवस मनाया जा रहा है। आज के दिन 1922 को गोरखपुर का चौरीचौरा काण्ड हुआ था। गांधी जी के असहयोग आंदोलन से तो सब वाक़िफ होंगे। इसी आंदोलन के दौराने लोग ने गोरखपुर में चौरीचौरा नाम जगह पर हिंसक रूप ले लिया था। यह पहली बार था, जब गांधी जी ने आंदोलन को बीच में ही समाप्त कर दिया था। अंग्रेजी हुकूमत के समय शायद देश का यह पहला काण्ड था, जिसमें आज़ादी के दीवानों के साथ उनके गुस्से का शिकार बने पुलिस वालों को भी शहीद माना गया है। हमारे देश में ड्यूटी के समय मरने वाले पुलिसवालों को आज़ादी के लिए अपनी जान गवाने वालों को शहीद माना जाता है।

चौरी चौरा काण्ड

4 फरवरी को महात्मा गांधी द्वारा चलाए जा रहे असहयोग आंदोलन के समर्थन में चौरी चौरा में रहने वाले लोगों ने एक जुलूस निकाल था। यह समर्थन जुलूस शांति से स्थानिय पुलिस थाने के सामने से गुजर रहा था, तब ही पुलिस और जुलूस में शामिल लोगों के बीच झड़प शुरू हो गई। झड़प के चलते पुलिस ने जुलूस पर गोलियां चलाना शुरू कर दिया। पुलिस की गोलिबारी में जुलूस के तीन लोग शहीद हो गए और कई घायल हो गए।

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इससे प्रदर्शनकारियों में आक्रोश भड़क उठा और यह झड़प हिंसा में बदल गई। लोगों को गुस्से में देख पुलिसवाले थाने में जा कर छुप गए, लेकिन गुस्से में लोगों ने थाने में कुण्डी लगाकर आग लगा दी। इस में 22 पुलिसवाले थाने में जल कर शहीद हो गए। इस काण्ड में एक सिपाही मुहम्मद सिद्दीकी भाग निकला और झंगहा पहुंच कर गोरखपुर के तत्कालीन कलेक्टर को इस घटना के बारे में बताया। इसके परिणाम स्वरूप जैसे ही गांधी जी को इस घटना के बारे में पता चला उन्होंने 12 फरवरी 1922 को आंदोलन रोक दिया, जिससे कई क्रांतिकारी नेता नाराज़ हो गए।

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मालवीय ने की लोगों की पैरवी

इस काण्ड में कोर्ट द्वारा 172 लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई थी। इन लोगों की पैरवी वकील पंडित मदन मोहन मालवीय ने की थी, उन्होनें फांसी की सजा से 151 लोगों को बचाया था। बाकी 19 लोगों को 2 से 11 जुलाई 1923 में के दौरान फांसी दे दी गई। फांसी के अलावा 14 लोगों को उम्र कैद और 10 लोगों को 8 साल सश्रम कारावास की सजा दी गई। जिन लोगों को फांसी दी गई थी, उन सब की याद में एक स्मारक बनाया गया है। जहां हर साल देश के प्रधानमंत्री स्मृती दिवस मनाते है।

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