अफगानिस्तान में तालिबान की नई सरकार का ऐलान, मुल्ला हसन अखुंद के हाथों में प्रधानमंत्री की कमान

नेहा राठौर

अफगानिस्तान में सरकार बनाने को लेकर काफी टाल-मटोल करने के बाद आखिरकार तालिबान ने अपनी नई सरकार बना ली है। इस नई सरकार में मुल्ला हसन अखुंद को अंतरिम प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अखुंद वही शख्स है जिसने तालिबान के पिछले शासन के अंतिम सालों में सरकार का नेतृत्व किया था। इसी के साथ, दो लोगों को अंतरिम उप प्रधानमंत्री का पदभार दिया गया है। इसमें सबसे पहला नाम मुल्ला अब्दुल गनी बरादर का है, ये वहीं है जिन्होंने अमेरिका के साथ हुई वार्ता का नेतृत्व किया और अफगानिस्तान से अमेरिका की रुखसती से जुड़े समझौते पर हस्ताक्षर किए।

नई सरकार बनने की जानकारी देते हुए तालिबान के प्रवक्ता ने बताया कि आमिर खान मुत्तकी को अंतरिम विदेश मंत्री बनाया गया है, जबकि भारतीय सैन्य अकादमी में पढ़ चुके अब्बास स्टानिकजई को विदेश उप मंत्री का पद सौंपा गया है। कुख्यात हक्कानी नेटवर्क का नेतृत्व करने वाले सिराजुद्दीन हक्कानी को अंतरिम गृह मंत्री घोषित किया गया है। जबकि तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर के बेटे मुल्ला याकूब को अंतरिम रक्षा मंत्री बनाया गया है।

नई सरकार में गैर तालिबानी शामिल नहीं

तालिबान की नई सरकार में शामिल सभी लोगों का संबंध तालिबान से है किसी भी गैर तालिबानी ( जो तालिबान से संबंधित न हो) को इसमें शामिल करने को संकेत नहीं मिले हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय  शुरू से नई सरकार में तालिबान से अलग दूसरे समुदायों को शामिल करने की मांग करता आया है।

लगभग 20 सालों से अफगानिस्तान में विदेशी सेना से लड़ने वाले तालिबान चरमपंथियों ने 15 अगस्त को राजधानी काबुल समेत पूरे देश पर अपना झंडा लहरा दिया था। फिलहाल इसमें पंजशीर को नहीं जोड़ा जा सकता क्योंकि वहां मुहम्मद सालेह और तालिबान के बीच जंग जारी  है। वहां के राष्ट्रपति अशरफ गनी तालिबान के डर से पहले ही अपनी आवाम को बेसहारा छोड़कर भाग गए थे और सालों से अमेरिकी सेनाओं से ट्रेनिंग लेने के बावजूद अफगान सेना ने तालिबान के सामने ज्यादा प्रतिरोध नहीं किया और आत्मसमर्पण कर दिया।

अफगान की दुर्गति के लिए अमेरिका जिम्मेदार

अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय वहां मानवाधिकारों के साथ-साथ सुरक्षा की स्थिति को लेकर भी चिंतित है। कुछ लोग अफगानिस्तान में बिगड़ते हालात के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहरा रही हैं। लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इन सभी आरोपों और आलोचनाओं को खारिज करते हुए बयान दिया था कि अमेरिकी सेनाएं अफगानिस्तान में हमेशा नहीं रह सकती थीं। वहीं अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा इतना आतंक, बमबारी व गोलीबारी करने के बाद तालिबान अफगान जनता और विदेशी सरकारों को ये भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहा है कि वे पहले जैसी बर्बरता नहीं दिखाएंगी, जैसी उन्होंने दो दशकों पहले उनके राज में दिखाई थी। लेकिन इतना कुछ देखने के बाद अब कोई भी पर्यवेक्षक उसकी इस बात का भरोसा करने को तैयार नहीं की तालिबान बदल चुका है।

Comments are closed.