डीटीसी की हड़ताल ख़त्म, दिल्ली की जनता को भुगतना पड़ा खामियाजा।

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दिल्ली में रोडरेज के एक मामले में दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के एक ड्राइवर की हत्या के विरोध में डीटीसी बसों के हड़ताल पर रहे। बस ड्राइवरों के मरते ही पूरी दिल्ली में बसों की हड़ताल हो गयी। जिसका खामियाजा दिल्ली की आम जनता को उठाना पड़ा। रोज अपने घर से काम में जाने के लिए डी टी सी की बसों का इस्तेमाल करते थे।  पब्लिक ट्रांसपोर्ट के बंद होने से लोगो को अच्छी खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। परिवहन विभाग को अपने ड्राइवर के साथ साथ दिल्ली की जनता की भी चिंता करनी चाहिए।पुरे दिन लोग मेट्रो में भी भीड़ का सामना करते रहे और ओटो  रिक्शा भी भर भर के चल रहे थे।लोगो ने ऑफिस से लौटते समय भी अच्छी खासी दिक्कतों का सामना किया देर रात तक लोग लटकते पटकते अपने अपने घर पहुंचे किसी ने अपने जानकर को बुलाया तो किसी ने मेट्रो में घुसने का घंटों इंतजार किया तो किसी ने ओटो वालो को मुह मांगे पैसे देकर चलने को कहा और कई लोगो तो कोई वाहन न मिलने की वजह से पैदल ही घर को निकल लिए । इन सभी दिक्कतों में महिलाये बच्चे और लड़कियां सभी देर रात तक यातायात से झूंझति दिखाई दी। जिन घरों की बच्चियां समय पर घर नही पहुंची उनके माता पिता घर से बाहर निकल निकल कर चिंतित थे। दिल्ली में आये दिन बच्चियों के साथ हादसों के किस्से सुनते है पर इन सबसे परिवहन विभाग को क्या दरकार उनके लिए तो केवल एक वही हादसा सबसे बड़ा था।दिल्ली परिवहन निगम को सरकार को कुछ समय देना चाहिए था ताकि वो कुछ कारवाई करते नाकि तुरंत ही हड़ताल पर बैठ जाते।हड़ताल पर बैठे लोगो की मान पूरी करने में दिल्ली सरकार ने दो दिन बाद अपनी सहमति जताई और तब डी टी सी के कर्मचारियों ने हड़ताल वापस ले ली है।  रोहिणी में डीटीसी बस कर्मचािरयों ने हड़ताल वापस लेने का ऐलान करते हुए कहा है की वे परिवहन मंत्री के आश्वाशन और 10 लाख रुपये के मुआवजे से खुश है।  दिल्ली सरकार ने मर्तक ड्राईवर अशोक के बेटे को नौकरी देने और मर्तक की विधवा का इलाज करने का वादा किया है। फिलहाल रोहिणी डिपो से बसों का चलना शुरू हो गया है।

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