मद्रास (चेन्नई) क्यों बना तमिलनाडु

नेहा राठौर (14 जनवरी)

आज का दिन या 14 जनवरी से भारत की कई सारी यादें जुड़ी हैं। हर दिन कुछ न कुछ यादें छोड़कर जाता है। आज का दिन भी कुछ यादें अपने साथ लेकर आया है। बात 1968 की है, जब मद्रास का नाम बदलकर तमिलनाडु कर दिया गया। यह अचानक नहीं हुआ था।  आज का तमिलनाडु को 1968  तक मद्रास कहा जाता था। उस समय के मद्रास में पूरा वर्तमान तमिलनाडु (कन्याकुमारी जिले को छोड़कर), तटीय आंध्र, रायलासीमा, उत्तर और मध्य केरल का मालाबार क्षेत्र और बेल्लारी, दक्षिण कैनारा शामिल था।  मद्रास स्टेट में तमिल, तेलगु, मलियालम और कन्नड़ बोलने वाले लोग रहते थे। आजादी के बाद से भारत के बड़े नेता भारत को लोकतांत्रिक देश बनाने में जुट गए थे और इसकी शुरूआत हुई, भाषा के आधार पर नए राज्यों के गठन से, लेकिन प्रधानमंत्री नेहरु कभी इससे बात के लिए राजी नहीं हुए थे।

नेहरूभारत की एकता

भारत के प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरु का कहना था कि अभी हमें सिर्फ भारत की एकता की बात करनी चाहिए। सबसे पहले मद्रास के एक शहर गुंटुर से आंध्रप्रदेश को अलग करने की मांग उठी पहले नेहरू इसके खिलाफ थे, लेकिन फिर बाद में उन्होंने सभा में आंध्रप्रदेश की मांग को सही ठहराया, जिस वजह से बाकि के राज्यों में भी अलग राज्य की मांग ने जोर पकड़ लिया जैसे बॉम्बे जहां मराठी, गुजराती और हिंदी बोलने वाले लोग रहते थे। यहां भी अलग राज्य की मांग तेज हो गई। मद्रास शहर पर तमिल बोलने वाले भी अपना हक मान रहे थे और तेलगु बोलने वाले भी। नेहरु ने बात को सुलझाने का एक तरिका निकाला कि अगर तेलगु नेता, मद्रास की मांग छोड़ दे तो अलग आंध्र प्रदेश की मांग को पूरा कर दिया जाएगा।

आंध्रप्रदेश की बढ़ती मांग

आखिरकार 1956 में मद्रास से कई राज्यों को अलग कर दिया गया, जिसमें आंध्रप्रदेश भी शामिल था। अलग आंध्र प्रदेश की मांग को पूरा करवाने का सारा श्रेय मद्रास के मुख्यमंत्री रह चुके टी प्रकाशन और तेलगु भाषी मद्रासी पोट्टि श्री रामुलु को जाता है, पोट्टि श्री रामुलु अलग आंध्र प्रदेश के लिए 19 अक्टूबर 1952 को अनशन पर बैठे थे, उनका कहना था कि वो तब तक अनशन पर रहेंगे जब तक आंध्र राज्य नहीं बन जाता और मद्रास उसकी राजधानी। नेहरू उनकी मांग मानने को तैयार हो चुके थे, लेकिन हालात ने करवट ली और 15 दिसंबर 1952 को उनका निधन हो गया, उनके निधन के बाद मद्रास में लोगों का गुस्सा फुट पड़ा। ग्रह युद्ध की स्थिती से बचने के लिए भारत सरकार को उनके निधन के 2 दिन बाद उनकी मांग को पूरा करना पड़ा और आंध्र प्रदेश एक अलग राज्य बन गया। तेलगु भाषी लोगों को आंध्र मिलने के कुछ सालों बाद 1969 में मद्रास को तमिलनाडु बना दिया गया।

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