यूएई के साथ शीर्ष भागीदारी चाहता है भारत: नरेंद्र मोदी

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अबु धाबी। अमीरात के नेतृत्व के साथ वार्ता से पूर्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत के आर्थिक, ऊर्जा और सुरक्षा हितों के लिए खाड़ी क्षेत्र महत्वपूर्ण है और वह कारोबार तथा आतंकवाद के मुकाबले में यूएई को अपने अग्रिम साझेदार के रूप में देखना चाहते हैं। आतंकवाद और चरमपंथ सहित क्षेत्र में भारत और यूएई की साझा सुरक्षा एवं सामरिक चिंताओं को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वह तेजी से बढ़ती अरब अर्थव्यवस्था और उसके दूरदृष्टा एवं गतिशील नेतृत्व के साथ सुरक्षा, ऊर्जा और निवेश क्षेत्रों सहित सामरिक साझेदारी को मजबूत करने के इच्छुक हैं।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”मैं यूएई को अपने अग्रिम कारोबारी और निवेश साझीदार के रूप में देखना चाहता हूं। हम सभी सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए नियमित और प्रभावी सहयोग स्थापित करेंगे। हमारे सुरक्षा बल एक दूसरे के साथ संवाद को और अधिक बढ़ाएंगे। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हम पहले के मुकाबले और अधिक घनिष्ठ सहयोग से काम करेंगे तथा क्षेत्रीय चुनौतियों का समाधान करेंगे। हमारे संबंधों की कोई सीमा नहीं है।’’ आतंकवाद को मानवता के प्रति गंभीर खतरा बताते हुए मोदी ने कहा कि वे सभी देश जो मानवता में विश्वास करते हैं, उन्हें बिना किसी देरी के एक साथ खड़े होना चाहिए क्योंकि आतंकवादी ताकतों को चुनौती देना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा, ”जहां तक भारतीय समुदाय का सवाल है, जो भी भाषाएं भारत में बोली जाती हैं वे सभी यूएई में बोली जाती हैं। बातचीत के लिहाज से, यूएई एक ‘मिनी इंडिया’ है। जिस तरीके से दोनों देशों ने मिलकर काम किया है वह एक विशेष रिश्ता बनाता है।’’ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारतीय समुदाय न केवल मेजबान देश की तरक्की और विकास में योगदान कर रहा है बल्कि भारत को पैसा भेजकर वे भारत के आर्थिक विकास में भी भागीदार बन रहा है। मोदी ने इसके साथ ही कहा, ”मुझे कतई कोई शंका नहीं है कि जिस प्रकार से सभी आर्थिक सुधार कार्यक्रम आगे बढ़ रहे हैं, उनसे वे भारत को अपने निवेश और बचत के लिए आकर्षक, स्थिर और सुरक्षित गंतव्य के रूप में पाएंगे।’’ यहां करीब 26 लाख भारतीय रहते हैं जो इस देश की आबादी का करीब 30 फीसदी हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर, दो देशों के बीच, ये सरकारें होती हैं जो पहले घनिष्ठ संबंध कायम करती हैं और उसके बाद लोगों के बीच आपसी संपर्क बढ़ता है लेकिन यूएई के मामले में लोगों के बीच आपसी घनिष्ठ संबंध था लेकिन दोनों सरकारों के बीच एक विशेष दूरी थी।पिछले 34 सालों में यूएई की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री मोदी यहां आने के एक दिन बाद अबु धाबी के शाहजादे शेख मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान और यूएई के उप राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम से मुलाकात करेंगे। मोदी ने खलीज टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ”क्षेत्र में आतंकवाद और चरमपंथ सहित हमारी सुरक्षा और सामरिक चिंताएं साझा हैं। इसलिए भारत और यूएई के पास हर एक कारण है जिससे वे दोनों एक दूसरे के लिए शीर्ष प्राथमिकता हैं। मैं इस नजर से यूएई की ओर देखता हूं। भारत के आर्थिक, ऊर्जा और सुरक्षा हितों के मद्देनजर खाड़ी क्षेत्र महत्वपूर्ण है।’’ उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि उन्होंने अपना क्षेत्रीय संवाद यूएई के साथ शुरू किया है जो इस देश को दिए जाने वाले उनके महत्व का परिचायक है। उन्होंने कहा कि वह दोनों देशों के बीच सही मायने में समग्र रणनीतिक साझेदारी बनते देखना चाहेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”मैं समझता हूं कि यह बेमेल था। राजनयिक दृष्टिकोण से, यह कतई सही नहीं लगता। इसमें बदलाव होना चाहिए। मुझे भरोसा है कि मेरी यात्रा सफल होगी और इस प्रकार के आमंत्रण के लिए मैं अबुधाबी और दुबई के शासकों के प्रति दिल से आभार व्यक्त करता हूं।’’ यह पूछे जाने पर कि खाड़ी और पश्चिम एशिया में सभी देशों के साथ अच्छे संबंध रखने वाला भारत क्षेत्र के तनाव के मद्देनजर क्या भूमिका अदा कर सकता है, मोदी ने कहा कि हालांकि भारत क्षेत्र में हिंसा और अस्थिरता देखकर ‘‘उदास और दुःखी’’ है लेकिन वह हस्तक्षेप नहीं करने के सिद्धांत में यकीन करता है और वह मजबूती के साथ यह मानते है कि इस क्षेत्र की समस्याओं को सभी देशों के सामूहिक प्रयासों और सृजनात्मक सहयोग से ही सुलझाया जा सकता है। उन्होंने कहा, ”भारत इस मामले में विशेष रूप से भाग्यशाली है कि उसके क्षेत्र के सभी देशों के साथ अच्छे संबंध हैं। इसलिए इस क्षेत्र में हिंसा और अस्थिरता देखकर हम दुःखी और चिंतित हैं। मेरा हमेशा से यह मानना रहा है कि क्षेत्रीय या द्विपक्षीय समस्याओं को संबंधित देशों द्वारा ही बेहतर तरीके से सुलझाया जा सकता है।’’ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”हमने अक्सर बाहरी हस्तक्षेप के परिणाम देखे हैं। भारत हमेशा अन्य देशों में हस्तक्षेप नहीं करने के सिद्धांत से बंधा रहा है और लगातार इस बात का समर्थन करता रहा है कि सभी मुद्दों को वार्ता से सुलझाया जाना चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ”क्षेत्रीय शांति अैर स्थिरता सभी के हित में है।’’ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”मैंने इस क्षेत्र में हर देश और अन्य सभी पक्षकारों के लिए इस नजरिए की वकालत की है। जब हम इस क्षेत्र में आतंकवाद और चरमपंथ की ऐसी गंभीर समस्या को देखते हैं तो इस क्षेत्र के सभी देशों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे क्षेत्रीय स्थिरता, शांति और समृद्धि के प्रति साझा खतरे का मिलकर समाधान निकालें।’’ उन्होंने यह भी उम्मीद जतायी कि ईरान परमाणु समझौता क्षेत्र में अस्थिरता का कारक नहीं बनेगा बल्कि यह इस क्षेत्र में विचार विमर्श और सहयोग की प्रक्रिया की शुरूआत करेगा और इससे आपसी विश्वास एवं भरोसा बढ़ेगा। इससे आगे जाकर क्षेत्र में ठोस शांति और स्थिरता का मार्ग प्रशस्त होगा।

 

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