ओडिशा की पुलिस को एक गैंगरेप आरोपी को पकड़ने में लगे 22 साल

नेहा राठौर

ओडिशा में पुलिस ने 1999 में हुए गैंगरेप के आरोपी को 22 साल बाद गैंगरेप उसके घर से धर दबोचा। आरोपी पिछले दो दशकों से भी ज्यादा समय से पुलिस से छिपता आ रहा था। पुलिस का कहना है कि आरोपी विवेकानंद बिस्वाल ने पुलिस को देखते ही भागने की कोशिश की थी, लेकिन नकाम रहा।

ओडिसा पुलिस के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सुधांशु सारंगी ने बताया कि ‘पकड़े जाने के बाद विवेकानंद ने कहा कि मुझे यहां से दूर ले चलिए, मैं आपको सब कुछ बताऊंगा’। विवेकानंद उन तीन अभियुक्तों में से एक है, जो 9 जनवरी 1999 में 29 साल की युवती के साथ हुए गैंगरेप में शामिल थे, हालंकि उन्होंने खुद पर लगे आरोपों से इंकार किया है। विवेकानंद के बाकि दो साथियों को पहले ही उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है, जिनमें से एक की जेल में ही मौत हो गई थी।

बता दें कि कोर्ट के दस्तावेजों के मुताबिक पीड़ित महिला अपने एक पत्रकार मित्र के साथ कार से भुवनेश्वर से कटक जा रही थीं। गीड़ी ड्राइवर चला रहा था। उसी वक्त स्कूटर पर सवार तीन लोगों ने बीच सड़क पर उनकी कार को रोका और तीनों आरोपी बंदूक की नोक पर कार को पहले से निर्धारित एक जगह पर ले कर गए। वहां पर पीड़ित महिला पर चार घंटों तक कई बार यौन हमले किए गए। उन्हें और उनके दोस्तों को मारा पीटा और धमकाया गया। उनके पैसे और क़ीमती समान भी छीन लिये।

पीड़ित ने पुलिस में आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कराया। मामले की क्रूरता के कारण यह मामला बहुत दिनों तक सुर्खियों में छाया रहा।

 मुख्यमंत्री पर उठे सवाल

इस मामले में ओडिशा के तत्कालिन मुख्यमंत्री जेबी पटनायक का नाम भी उछाला गया था। पीड़ित महिला ने उनपर आरोप लगाया था कि वे उस अधिकारी को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसने ने 18 महिने पहले उससे बलात्कार की कोशिश करने की थी। महिला ने यह भी आरोप लगाया था कि सामूहिक बलात्कार में शामिल दो लोगों ने उन्हें उक्त अधिकारी के ख़िलाफ़ मामला वापल लेने के लिए डराया था। इसके एक महीने बाद मुख्यमंत्री ने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था, और एक साल बाद आरोपी अधिकारी को बलात्कार करने की कोशिश के मामले में दोषी पाया गया और उस अधिकारी को तीन साल की सज़ा सुनाई गई थी।

इस बीच गैंग रेप मामले में सीबीआई को जांच के लिए बुलाया गया, लेकिन तब तक विवेकानंद बिस्वाल, जिसे कोर्ट के आदेश में मुख्य अभियुक्त और वारदात का मास्टरमाइंड बताया गया था और जिस पर बलात्कार कर पीड़ित को बेरहमी से पीटने का आरोप था, वह फ़रार हो चुका था।

ऑपरेशन साईलेंट वाइपर

फिर कुछ महीनों बाद उसी साल 1999 में नवंबर में भुवनेश्वर और कटक के पुलिस कमीश्नर सुधांसु सारंगी ने दोबार इस केस की जांच शुरू की और इस ऑपरेशन को ऑपरेशन साइलेंट वाइपर नाम दिया। ऑपरेशन को यह नाम देने के पीछे एक वजह थी, सुधांसु का कहना था कि वाइपर एक सापं है जो चारों तरफ घुंड़ी मार कर बैठ जाता है और बिल्कुल भी शोर नहीं करता, ताकि वह पकड़ा न जाए, और विवेकानंद भी कई सालों तक फ़रार था।

उसके बाद 28 फरवरी को सारी जानकारी जुटाने के बाद पुलिस के तीन अधिकारी पुणे पहुंचे और अगले दिन महाराष्ट्र पुलिस और ओडिशा पुलिस ने विवेकानंद को उसके घर पर ही दबोच लिया। पुलिस ने बताया कि विवेकानंद की पत्नी ने पिछले 22 सालों के दौरान उनसे संपर्क होने की बात से इंकार किया है। विवेकानंद ने भी कोई पैसे लेने की बात से और बलात्कार की बात से इंकार किया है। अब विवेरानंद की उम्र 50 साल की हो गई है।

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