Monday, April 15, 2024
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Noida News : टीबी उन्मूलन में जनसहयोग जरूरी : सीएमओ

केवल फेफड़ों की टीबी ही होती है संक्रामक

नोएडा मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. सुनील कुमार शर्मा ने कहा- वर्ष 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने के लिए जन सहयोग की जरूरत है। लोग जितनी जल्दी और जितना ज्यादा जागरूक होंगे उतना ही जल्दी टीबी उन्मूलन होगा। डा. शर्मा विश्व क्षयरोग दिवस (24 मार्च) के अवसर से पूर्व बृहस्पतिवार को सीएमओ कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।

सीएमओ ने बताया-टीबी की जांच व उपचार स्वास्थ्य विभाग की ओर से उपलब्ध कराया जाता हैइसके लिए मरीज का कोई खर्चा नहीं होता। उन्होंने बताया- तमाम सामाजिक संगठनसरकारी अधिकारीव्यक्तिगत रूप से लोग निक्षय मित्र बन कर टीबी मरीजों की मदद कर रहे हैं। उनको पोषण उपलब्ध करा रहे हैं और उनकी देखभाल का जिम्मा संभाले हुए। जनपद में सबसे ज्यादा क्षय रोगी नोएडा एंटरप्रेन्योर एसोसिएशन ने गोद लिये हैं। इसके अलावा सरकारी अधिकारियों और सामाजिक संगठनों ने भी टीबी मरीज गोद लिये हैँ। कुछ और संगठन भी इसके लिए आगे आ रहे हैं। उन्होंने बताया स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी का गुणवत्ता पूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने बताया ड्रग रेजिस्टेंट टीबी के उपचार के लिए राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) और शारदा अस्पताल में डीआरटी सेंटर हैं। यहां मल्टी ड्रग रजिस्टेंट टीबी के मरीजों के उपचार के लिए चार-चार बेड के वार्ड बने हुए हैं।  डा. शर्मा ने निक्षय पोषण योजना के बारे में भी बताया। इस योजना के तहत टीबी मरीज को उपचार के दौरान सरकार की ओर से प्रतिमाह पांच सौ रुपये पोषण युक्त आहार के सेवन के लिए दिये जाते हैं। यह राशि मरीज के बैंक खाते में सीधे भेजी जाती है।

जिला क्षय रोग अधिकारी डा. शिरीष जैन ने विश्व क्षयरोग दिवस पर जनपद में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया नुक्कड़ नाटक, सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) और विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाएगा।  डा. जैन ने कहास्वास्थ्य विभाग प्रधानमंत्री के वर्ष 2025 तक देश से टीबी को खत्म करने के संकल्प को पूरा करने के प्रयासरत है। इसी क्रम में क्षय उन्मूलन को लेकर विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा जितनी जल्दी टीबी मरीज की पहचान होगी उतनी जल्दी टीबी संक्रमण फैलने की रफ्तार कम होगी। एक टीबी मरीज उपचार न मिलने पर साल भर में करीब 15-20 लोगों को संक्रमित कर सकता हैजबकि उपचार शुरू होने के एक माह के भीतर यह संक्रमण रुक जाता है। इसलिए टीबी मरीजों की जल्द पहचान होना जरूरी है। इसके लिए शासन के निर्देश पर हर माह की 15 तारीख को एकीकृत निक्षय दिवस का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा समय-समय पर टीबी रोगी खोज अभियान चलाए जाते हैंजिसके तहत स्कूलों-मदरसोंनारी निकेतन जेलसामूहिक स्थलों और घर-घर में टीबी मरीजों की पहचान कर उनका उपचार कराया जाता है। जगहजगह कैम्प लगाकर लोगों की जांच की जाती है और उन्हें टीबी के प्रति जागरूक किया जाता हैसाथ ही टीबी को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर किया जाता है। उन्होंने लोगों को जागरूक करने में मीडिया का अहम रोल बताते हुए सहयोग मांगा।

 

जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया- क्षय रोगी मिलने पर केवल उसका उपचार नहीं कराया जाताबल्कि उसके परिवार के सदस्यों और उसके संपर्क में रहने वाले लोगों की तुरंत स्क्रीनिंग और जांच की जाती है। इसके अलावा टीबी मरीज के परिवार वालों की प्रीवेंटिव थेरेपी की जाती हैइसमें बच्चे भी शामिल हैं। उन्होंने कहा स्वास्थ्य विभाग की ओर से उच्च गुणवत्ता की जांच और उपचार की व्यवस्था है। उन्होंने बताया एक मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट मरीज के उपचार पर 10 लाख रुपये तक खर्च आता है,जिसे सरकार वहन करती है।  उन्होंने बताया अब जांच का स्तर भी बढ़ा है। पहले टीबी की जांच माइक्रोस्कोप से की जाती थी अब न्युक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट (नाटमशीनों से जांच होती है। विशिष्ट जांच एफडीसी (फिक्स डोज कॉम्बिनेशन) से यह तय हो जाता है कि कौन से मरीज को क्या और कितनी दवा देनी है। अब बच्चों के लिए सिरप के रूप में दवा मिलती हैपहले उन्हें दवा पीसकर दी जाती थी। उन्होंने बताया केवल फेफड़ों की टीबी ही संक्रामक होती है। अन्य टीबी से न के बराबर संक्रमण फैलने की आशंका होती है। डा. जैन ने बताया जनपद में 10 ट्रीटमेंट यूनिट एवं 17 माइक्रो स्कोपी सेंटर चल रहे हैं। चार सीबीनाट मशीन कार्यरत हैंजिसमें दो सरकार की ओर से और दो सीएमओ की सहायता से प्राप्त हुई हैं। इसके अलावा पांच ट्रूनाट मशीन कार्यरत हैं। वर्तमान में 6651 मरीज उपचाराधीन हैं।

कार्यक्रम में जिला समन्वयक अम्बुज पांडेयपीपीएम कोऑर्डिनेटर पवन कुमार भाटीरविन्द्र राठीकमल आर्यरजनीश कुमार व जिला क्षय रोग विभाग की टीम उपस्थित रही।

  

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