Friday, April 12, 2024
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रोज़गार देने की जगह महिलाओं को चुनावी खैरात बांटकर भाई-बहन के पवित्र रिश्तों को पैसे से ना तौलें शिवराज : नारी चेतना मंच

सगे भाई का स्थान कोई नहीं ले सकता, चुनावी लॉलीपॉप सामाजिक क्रांति नहीं , भ्रांति है : सुशीला मिश्रा

वृद्ध निराश्रित विधवा परित्यक्ता तलाकशुदा और बेसहारा अविवाहित लड़कियों को ₹5000 प्रतिमाह पेंशन दी जाए

रीवा  । मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा 16 साल के कार्यकाल में प्रदेश की महिलाओं की बुनियादी समस्याओं का निराकरण करने की जगह मतदाताओं से भाई बहन मामा भांजी जैसे रिश्ते जोड़कर भावनात्मक शोषण किया जा रहा है। करीब 15 दिन पहले मुख्यमंत्री चौहान ने अपने एक बयान में कहा था कि हम सौतेले नहीं सगे हैं। आखिरकार ऐसी शब्दावली बोल कर मुख्यमंत्री चौहान क्या दिखाना चाहते हैं। नारी चेतना मंच की नेत्री सुशीला मिश्रा डॉ श्रद्धा सिंह शारदा श्रीवास्तव एवं खुशी मिश्रा ने प्रदेश के मुख्यमंत्री की चुनावी लॉलीपॉप घोषणा को सामाजिक क्रांति नहीं सामाजिक भ्रांति बताया है।

इधर सोमवार 3 अप्रैल को प्रदेश के बैतूल में आयोजित एक महिला सम्मेलन में बढ़चढ़ कर बोलते हुए श्री चौहान ने कहा कि सगा भाई तो साल में एक बार ही उपहार देता है और मैं आपका भाई हर महीने हज़ार रुपए उपहार दूंगा। नारी चेतना मंच ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज ऐसा बता रहे हैं जैसे वह अपनी जेब से खर्च कर रहे हैं। उनके द्वारा भाई बहन के पवित्र रिश्तों को पैसे से तौलने, रिश्तों में सगा सौतेले जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने पर नारी चेतना मंच ने गहरी आपत्ति जताते हुए तीव्र भर्त्सना की है। बैतूल महिला सम्मेलन में मुख्यमंत्री शिवराज ने इसे सामाजिक क्रांति कहा है जबकि नारी चेतना मंच ने कहा कि यह सामाजिक भ्रांति है जिसके चलते महिलाओं को गुमराह किया जा रहा है। प्रदेश में रोजगार की यह स्थिति है कि भाई-बहन माता पिता बेटा बेटी सभी बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। प्रदेश के लोगों के लिए रोजगार की कोई ठोस नीति इतने लंबे समय बाद भी नहीं बन पाई है। यह भारी विडंबना है कि शिवराज शासनकाल में पैदा हुआ बच्चा जवान हो गया, जवान प्रौढ़, प्रौढ़ बूढ़ा हो गया और बूढ़े मर चुके हैं। सरकार की पूंजीवादी नीति के चलते बेरोजगारों को रोजगार देने की जगह उनके हाथ में कटोरा थमा दिया गया है। लाड़ली बहना योजना चुनावी लालीपाप है जिससे किसी परिवार का नहीं एक व्यक्ति का भी पेट भरने वाला नहीं है। मुख्यमंत्री चौहान के बयान से भाइयों की बेरोजगारी का परिदृश्य सामने आ गया है। प्रदेश में गरीबी का यह आलम है कि महिलाओं को ₹1000 प्रतिमाह देने की घोषणा के बाद योजना का लाभ लेने भागम भाग मची है। इससे यह बात उजागर होती है कि पिछले 16 साल में शिवराज सरकार ने लोगों को गरीब बना कर रखा और अब वोट लेने के लिए चुनावी भंडारा शुरू है। इस तरह की चुनावी खैरात का जवाब जनता को वोट के समय जरूर देना चाहिए।

नारी चेतना मंच ने कहा कि शिवराज के शासनकाल में प्रदेश में करोड़ों की संख्या में नौजवान बेरोजगार हैं। आमतौर पर देखा गया है कि घरेलू महिलाओं के पास अपने खर्चे के लिए पैसे नहीं होते हैं । कागज पर घर का मुखिया बना देने के बावजूद वह आवश्यक जरूरतों के लिए मोहताज हैं। प्रदेश सरकार महिलाओं के लिए बड़ी-बड़ी बातें करती हैं लेकिन आज तक उनके रोजगार और स्वावलंबन के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं बनाई गई। चुनावी वर्ष में इधर शिवराज सरकार ने 23 वर्ष आयु से लेकर 60 वर्ष तक की महिलाओं के लिए प्रतिमाह ₹1000 देने का ऐलान किया है। यह राशि चुनावी खैरात है जिसके चलते महिलाओं का वोट बैंक सुरक्षित किया जा सके। देखने में आ रहा है कि निराश्रित वृद्ध विधवा परित्यक्ता महिलाओं के लिए प्रतिमाह ₹600 पेंशन योजना है जो ऊंट के मुंह में जीरे वाली कहावत को चरितार्थ कर रही है। बेसहारा महिलाओं को मिलने वाली पैंशन कम से कम ₹5000 प्रतिमाह की जानी चाहिए।

नारी चेतना मंच ने कहा है कि शिवराज सरकार ने 23 वर्ष से अधिक आयु वाली अविवाहित लड़कियों को लाड़ली बहना योजना के अंतर्गत दी जाने वाली ₹1000 प्रति माह राशि से वंचित कर दिया है। योजना का लाभ केवल विवाहित महिलाओं तक सीमित रखा जाना सही नहीं है। प्रदेश में 23 वर्ष की आयु से अधिक की उम्र की लाखों अविवाहित लड़कियां बेरोजगारी की समस्या से जूझ रही है लेकिन उनके बारे में शिवराज सरकार ने जरा भी ध्यान नहीं दिया है। केवल लाडली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत आने वाली लड़कियों को ही जोड़ा जा रहा है। भीषण बेरोजगारी के चलते प्रदेश की बहुत सारी लड़कियां अकेला जीवन जीने को मजबूर हैं। इन्हें भी ₹5000 प्रति माह पेंशन दी जानी चाहिए। प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के अंतर्गत बेरोजगार लड़के लड़कियों की शादी करा कर उनका जीवन बर्बाद कर दिया है। बेरोजगारी के चलते उनकी पारिवारिक जिम्मेदारियां बहुत अधिक तनावपूर्ण हैं। पूरे प्रदेश में दहेज प्रथा का बोलबाला है लेकिन मुख्यमंत्री सामाजिक क्रांति का झूठा दावा कर रहे हैं। यदि सामाजिक क्रांति होती तो कोई भी शादी में दहेज का लेन देन नहीं होता लेकिन खुद मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में भी लड़कियों को दान की वस्तु बना दिया गया और सरकारी खर्च पर दहेज देकर बेरोजगारों की शादी कराकर झूठी वाहवाही लूटी जा रही है।

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