दिल्ली नगर निगम चुनाव में बीजेपी की हैट्रीक जीत

दिल्ली नगर निगम के कुल 272 वार्डों में से 270 वार्डों पर हुए चुनाव के परिणाम घोषित किये जा चुके हैं। आरोप-प्रत्यारोप के बीच संपन्न हुए इस चुनाव में सभी पार्टियां एक-दूसरे की खिंचाई करने में शायद ही कोई कोर-कसर छोड़ी हो। लेकिन अब परिणाम सामने आ चुके हैं और भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर पूर्ण बहुमत के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रुप में उभरी है। पिछले करीब 10 सालों से निगम की कुर्सियों पर काबिज बीजेपी एक बार फिर निगम की बागडोर अपने हाथों से निकलने नहीं दिया और सत्ता पर काबिज रहने में कामयाब रही है। पार्टी की इस जीत में मोदी फैक्टर अहम माना जा रहा है। बीजेपी को इस चुनाव में तीनों निगमों में कुल 181 सीटें मिली है, जबकि प्रदेश की आम आदमी पार्टी को 48 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा है। वहीं दशकों से देश, राज्यों एवं निगमों की बागडोर संभालने वाली सबसे बड़ी पार्टी इंडियन नेशनल कांग्रेस की झोली में मात्र 30 सीटें ही मिल सकी है जबकि अन्य को 11 सीटें प्राप्त हुई। चुनाव परिणाम के आंकड़ों को देखें तो स्पष्ट होता है कि प्रदेश की जनता का विश्वास जहां कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में कम हुआ है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारतीय जनता पार्टी पर लोगों का विश्वास बढ़ा है।

प्रदेश की जनता, बीजेपी के विजेता पार्षद प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं का कहना है कि दिल्ली नगर निगम चुनाव में बीजेपी की इस अप्रत्याशित के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सही योजना, सटिक निर्णय,  देश और क्षेत्र का विकास, स्वच्छता एवं स्वस्थता, पूर्व निगम पार्षदों और उनके रिश्तेदारों को इस बार पार्टी का उम्मीदवार न बनाना आदि कई ऐसे कारण हैं, जो इस जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाया है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने जिस तरह से वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव जीता और उसके बाद मध्य प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान, महाराष्ट्र, गोवा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, असम आदि विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों में शानदार जीत दर्ज की है, इससे जनता का भरोसा पार्टी पर बढ़ा है। जनता यह मानने लगी है कि बीजेपी एक ऐसी पार्टी है जो देश का पूर्ण विकास कर सकती है। वहीं दूसरी ओर लोग यह भी कहते नहीं थकते हैं कि बीजेपी के अलावे अन्य पार्टियों में नेतृत्वकर्ता की काफी कमी है। साथ ही कोई ऐसी पार्टी भी उन्हें नहीं दिखाई पड़ रही है जो यहां की आवाम को यह भरोसा दिला सके कि उसके नेतृत्व में देश सुरक्षित एवं विकसित होगा। आवाम पिछले कई वर्षों से कई सरकारों को देख चुकी है, लेकिन करीब-करीब हर सरकार आवाम को ठगते ही रहे हैं । वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जबसे बीजेपी की कमान संभाले हैं देश की प्रतिष्ठा बढ़ी है और विकास कार्य हो रहे हैं। इसलिए भी दिल्ली या अन्य प्रदेशों की जनता का विश्वास बीजेपी में बढ़ा है।

वहीं लोगों का यह भी कहना है पार्षदों की कारगुजारियों से काफी परेशान थे और अगर बीजेपी अपने इन्हीं पार्षदों को एक बार फिर मैदान में उतारती तो उसे इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ता। लेकिन बीजेपी पहले ही चेत गई और पार्टी प्रत्याशी के रुप में नये चेहरों को वरियता देते हुए चुनावी मैदान में उतारा। साथ ही पार्टी ने युवा शक्ति को ध्यान में रखते हुए युवा प्रत्याशियों को टिकट दिया। पार्टी की एक और निर्णय फायदेमंद साबित हुआ। बीजेपी ने नामांकन की अंतिम तिथि के ऐन वक्त पहले अपने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा किये। इससे पार्टी को यह फायदा हुआ कि कोई भी संभावित प्रत्याशी के बागी होने या उसके तीखे तेवर अख्तियार करने से पार्टी बच गई। क्योंकि बागियों को अपने तेवर अख्तियार करने या उसे दिखाने का मौका ही नहीं मिल पाया। वहीं बीजेपी अन्य पार्टियों के बागियों को तोड़कर अपने पार्टी में भी मिलाने में सफल रही और इसका नतीजा निगम चुनाव के नतीजे में भी सामने  आये हैं।

बीजेपी की इस शानदार जीत के बाद कांग्रेस और आम आदमी पार्टी एक बार फिर से अपनी स्ट्रेटजी पर ध्यान केंद्रीत करने लगी है। पार्टियां इस ओर खास ध्यान दे रही है कि आखिर उनसे चूक कहां हुई? क्योंकि बीजेपी के पूर्व पार्षदों पर भ्रष्टाचार समते कई आरोप लगे थे, पार्टियों ने इसकी चर्चा चुनाव प्रचार के दौरान काफी जोर शोर से भी किया। लेकिन पार्टियों का इसका फायदा कम और नुकसान ज्यादा भुगतना पड़ा है।  वहीं बीजेपी मतदाताओं को यह समझाने में सफल रही कि वह उन्हें भ्रष्टाचार मुक्त निगम पार्षद देंगे। उदाहरण के रुप में वे यह बताते रहे कि पार्टी ने सभी आरोपियों और उसके परिजनों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। वहीं बीजेपी लोगों को यह भी बताने में सफल रही कि पार्टी निगम की सत्ता युवा शक्तियों के हाथों में सौंपना चाहती है।

चुनाव परिणाम के बाद हारने वाली पार्टियों में आपसी मतभेद भी उभरने लगे हैं और साथ ही इस्तीफा का दौर भी जारी है। जहां इस हार के बाद कांग्रेस के दिल्ली प्रदेशाध्यक्ष अजय माकन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि वह आगामी एक साल तक एक कार्यकर्ता की तरह कार्य करेंगे और कोई पद नहीं लेंगे। वहीं आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश कन्वींनर दिलीप पांडे, जो दिल्ली नगर निगम चुनाव के पार्टी के लिए तैयारियों और रणनीति बनाने में अहम भूमिका अदा कर रहे थे, उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया। इतना हीं नहीं अपने क्षेत्र में पार्षद उम्मीदवारों की हार के बाद आप विधायक अलका लांबा ने भी पार्टी को अपना इस्तीफा सौंप दिया।

दिल्ली नगर निगम चुनाव परिणाम के बाद आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर चुनाव में इस्तेमाल किये गये ईवीएम मशीन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने लगे हैं। दिल्ली सरकार में उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और श्रम मंत्री गोपाल राय ने ईवीएम मशीन में छेड़छाड़ का मामला उठाया, तो वहीं आशुतोष ने ईवीएम को लोकतंत्र के लिए खतरा करार दिया है।  गोपाल राय ने कहा कि जिस तरह से बीजेपी एमसीडी में पिछले 10 सालों से रहकर भ्रष्टाचार किया है, उसके बाद भी उसे इतनी बड़ी जीत मिली है, यह मोदी लहर नहीं बल्कि ईवीएम लहर है। हालांकि प्रदेश के जल मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि पार्टी को खुद में झांकने की जरुरत है। वहीं प्रदेश में नई राजनीतिक दल के रुप में नगर निगम चुनाव में हिस्सा ले रही स्वराज इंडिया पार्टी के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने इस जीत के लिए भाजपा को बधाई दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि एमसीडी को बेहतर बनाने के लिए स्वराज इंडिया का हरेक कार्यकर्ता योगदान करने के लिए तैयार है। वहीं प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेसी नेत्री शीला दीक्षित ने पार्टी के आत्ममंथन पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि यह जनता का जनादेश है, इसे सम्मान के साथ स्वीकार करना चाहिए।

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने इस जीत पर कहा, ‘दिल्ली ने बहानों, आरोपों की राजनीति को नकार कर विकासशील राजनीति में विश्वास जताया है। यह पीएम मोदी की गरीब कल्याण योजनाओं एवं सबका साथ-सबका विकास की नीतियों में भरोसे की जीत है।’ केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वैंकेया नायडू ने कहा , ‘देश मोदी जी का हाथ पकड़कर विकास की राह चलना चाहता है, इसलिए दिल्ली नगर निगम में बीजेपी की लगातार तीसरी जीत है।’ बीजेपी की इस जीत पर पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा है कि अरविंद केजरीवाल की अपने अहंकार, महत्वाकांक्षाओं और दूसरों के खिलाफ आरोप मढने व दोषी बताने वाली भाषा के कारण चुनाव में हार हुई। साथ ही उन्होंने इस जीत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियां और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की चुनावी रणनीति को महत्वपूर्ण बताया। पार्टी नेता अरविंदर सिंह लवली ने आप सरकार पर निशाना साधते हुए इसे केजरीवाल सरकार को जनता का जवाब बताया है। साथ ही लवली ने कांग्रेस को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा, ‘कांग्रेस में नेतृत्व गंभीर नहीं है और लगातार टिकट खरीदे जा रहे हैं।’ बीजेपी के स्टार प्रचारक फिल्म अभिनेता रवि किशन ने इस जीत के लिए पूर्वांचलियों और पंजाबियों के साथ ही प्रदेश के हर समाज को इसका श्रेय दिया। दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने इसे आम आदमी पार्टी का निगम के साथ सौतेले व्यवहार बताया है।

गौरतलब है कि वर्ष 2007 में हुए दिल्ली नगर निगम चुनाव में बीजेपी 164 सीटें जीतकर निगम की सत्ता संभाली और वर्ष 2012 में 138 सीटें जीतकर दुबारा निगम की सत्ता पर कायम रही। वहीं वर्ष 2017 के निगम चुनाव में पार्टी ने अपने सारे पिछले रिकॉर्ड तोड़ते हुए कुल 270 सीटों पर हुए चुनाव में से 181 सीटें जीतकर निगम की बागडोर अपने हाथों में कायम रखने में तीसरी बार कामयाब रही है। जबकि देश की पुरानी पार्टी कांग्रेस और प्रदेश की आम आदमी पार्टी निगम चुनाव में बीजेपी के आसपास भी फटकती नजर नहीं आयी। वहीं बीजेपी के पूर्व निगम पार्षदों की कार्यप्रणालियों पर कई आरोप लगते रहे हैं। पार्टी इस बार अपने पुराने प्रत्याशियों को टिकट ना देकर इस आरोप पर लगभग अपनी मोहर लगा दी। वहीं पार्टी नये पार्षद प्रत्याशियों की जीत के साथ निगम की सत्ता पर काबिज हो चुकी है। ऐसे में नये पार्षदों के सामने कई जिम्मेदारियां और चुनौतियां होगी। इन पार्षदों के सामने सबसे पहली और मुख्य चुनौति होगी पार्टी के पूर्व पार्षदों के भ्रष्टाचार में लिप्त होने के टैग से खुद को दूर रखना और जनता के मानदंडों पर खड़ा उतरना।

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