डोर स्टेप योजना: केजरीवाल का ऐलान: मानेंगे केंद्र की बात

नेहा राठौर

केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार की राशन की होम डिलीवरी के मामले को लेकर शुरू हुई तरकार अब अपने अंजाम तक पहुंच गई है। ‘मुख्यमंत्री घर- घर राशन योजना’ पर केंद्र सरकार के रोक लगाने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने फैसला लिया है कि अब ऐसी कोई योजना ही नहीं रहेगी और न ही इसका कोई नाम होगा, दिल्ली की जनता को राशन ऐसे ही पहुंचाया जाएगा। इसी के साथ उन्होंने कहा कि वे अब केंद्र सरकार की बात मानने के लिए तैयार हैं।

इस मुद्दे पर सीएम केजरीवाल ने शनिवार को एक समीक्षा बैठक बुलाई थी, जिसके बाद उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। जिसमें उन्होंने कहा कि ये 20 साल पुराना सपना था, कि गरीबों को साफ सुथरा और आसानी से राशन मिले। जब सत्ता में नहीं थे, तब ये सपना देखा था। उस वक्त राशन की चोरी की जा रही थी और राशन माफिया पूरी तरह से हावी था। जब इसका विरोध किया गया तो राशन माफिया ने अटैक किया। फिर जब दिल्ली में सरकार बनी तो ये निर्णय लेना का अधिकार मिल गया। दिल्ली में आप के आन के बाद इस योजना पर व्यक्तिगत रूप से काम किया गया कि किस तरह गरीबों तक राशन पहुंचाना है, इस योजना पर करीब चार से पहले ही काम शुरू कर दिया गया था। इसमें काफी तकलीफें आईं। राशन माफिया बहुत ताकतवर हैं और ये एक क्रांतिकारी योजना है। इसलिए राशन माफिया आसानी से काम नहीं करने देंगे।

उन्होंने कहा कि जनता तक ईमानदारी से राशन पहुंचाना हमारा लक्ष्य है। हमने ये योजना काम का क्रेडिट लेने के लिए नहीं बनाई थी। हमारा उद्देश्य सिर्फ गरीबों की परेशानी को हल करना था। मुख्यमंत्री ने कहा कि घर-घर राशन योजना शुरू होने जा रही थी, क्योंकि दुकान से राशन लेने के लिए लंबी लाइन लगानी पड़ती थी और तरह-तरह की परेशानियों का समना करना पड़ता था इसी लिए सरकार ने इसका समाधान निकालते हुए आटा, चावल पैक करके घर भिजवाने का फैसला किया था।

आपको बता दें कि ये योजना 25 मार्च से लागू होने वाली थी, लेकिन केंद्र सरकार ने इसके लागू होने पर रोक लगा दी। केंद्र सरकार की ओर से योजना को रोकने के लिए मिले पत्र में लिखा है कि इस योजना का नाम मुख्यमंत्री हर घर राशन नहीं रख सकते हैं।

देश और दुनिया की तमाम ख़बरों के लिए हमारा यूट्यूब चैनल अपनी पत्रिका टीवी (APTV Bharat) सब्सक्राइब करे ।

आप हमेंTwitter , Facebook , औरInstagram पर भी फॉलो कर सकते है। 

Comments are closed.