Sunday, May 19, 2024
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विध्वंसक पोत आईएनएस विशाखापत्तनम मिलते ही दोगुनी हो जाएगी नौसेना की ताकत

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना की जंगी ताकत को और मजबूत बनाने के लिए प्रोजेक्ट 15-बी के तहत बनाए गए व राडार को चकमा देने में सक्षम और देसी हथियारों से लैस पहले विध्वंसक पोत आईएनएस विशाखापत्तनम को रविवार को समुद्र में उतारा जाएगा। यह पूरी तरह से नौसेना में जुलाई 2018 में शामिल हो जाएगा। विशाखापत्तनम मिलते ही नौसेना की ताकत जल में दोगुनी हो जाएगी है। इस युद्धपोत का मुंबई में मझगांव डॉक लिमिटेड में नौसेना प्रमुख एडमिरल आरके धवन की मौजूदगी में उनकी पत्नी मीनू धवन द्वारा जलावतरण किया जाएगा। नौसेना के जहाजों का जलावतरण पारंपरिक रूप से किसी महिला द्वारा ही किया जाता है। इस युद्धपोत को निर्धारित अवधि में बनाया गया है और इसका लांच भी समय से हो रहा है। नौसेना के युद्ध उत्पादन व खरीद नियंत्रक, वाइस एडमिरल अशोक वी सुबेदार ने बताया कि प्रोजेक्ट 15-बी का पहला पोत आईएनएस विशाखापत्तनम कोलकाता श्रेणी के निर्देशित मिसाइल विध्वंसक की अगली श्रंखला का युद्धपोत है। इस श्रंखला के चार युद्धपोत बनाने के लिए 28 जनवरी, 2011 में अनुबंध किया गया था। उन्होंने कहा कि इसे निर्धारित समय में बनाया गया है और रविवार को समुद्र में वार उठने की संभावना है और उसी दिन इसे समुद्र में उतारा जाएगा।

अन्य खासियतें 
-आईएनएस विशाखापट्टनम 127 मिलीमीटर गन से लैस होगा। इसमें एके-630 एंटी मिसाइल गन सिस्टम भी मौजूद रहेगा। 
-आईएनएस विशाखापट्टनम का सोनार सिस्टम अलग और अत्याधुनिक होगा। यह धनुष के आकार का है। 
-आईएनएस विशाखापट्टनम में क्रू के लिए बेहतरीन सुविधाएं और सुरक्षा होगी और यह न्यूक्लियर, केमिकल और बॉयलॉजिकल हमलों के दौरान अपने क्रू को ज्यादा बेहतर प्रोटेक्शन दे पाएगा। 
-आईएनएस विशाखापट्टनम की एक और बड़ी खूबी यह है कि बेहद खराब मौसम के दौरान भी इस पर नौसेना के हेलिकॉप्टर लैंड कर सकेंगे और उन्हें क्षतिग्रस्त होने से भी बचाया जा सकेगा। 
-इस युद्धपोत पर शिप डाटा नेटवर्क नाम का एक मैनेजमेंट सिस्टम लगाया जाएगा जो लड़ाई के दौरान एक ही जगह पर सारा डाटा उपलब्ध कराएगा। इसे नेवी इन्फॉर्मेशन हाईवे कह रही है, क्योंकि एक ही जगह बैठकर नेवी के अफसर अपने टारगेट को नष्ट करने की रणनीति बना सकेंगे। 
-आईएनएस विशाखापट्टनम 20 अप्रैल को लॉन्च किया जाएगा, लेकिन इसे पूरी तरह तैयार करने के बाद जुलाई 2018 में ही सेना को सौंपा जा सकेगा। इसी क्लास के बाकी तीन युद्धपोतों को हर दो साल के अंतराल पर नेवी को सौंपा जाएगा।

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