निराशा का माहौल बदलने में कामयाब रहेः मोदी

गांधीनगर वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्थिर कर व्यवस्था तथा भरोसेमंद, पारदर्शी और निष्पक्ष नीतिगत वातावरण तैयार कर भारत को कारोबार करने की दृष्टि ‘‘सबसे आसान’’ स्थान बनाने का आज यहां वादा किया। देश में आर्थिक वृद्धि तेज करने एवं रोजगार सृजन को गति देने के लिये विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत बनाने के अपने अभियान आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि परियोजनाओं की मंजूरी के लिये केंद्र एवं राज्य दोनों स्तरों पर एकल खिड़की मंजूरी व्यवस्था स्थापित की जा रही है। मोदी ने कहा कि उनकी सरकार के गठन के बाद सात महीने के थोड़े समय में ही ‘निराशा और अनिश्चितता’ का वातावरण दूर हो गया है। उन्होंने कहा, ‘‘पहले दिन से सरकार अर्थव्यवस्था को गति देने के लिये सक्रियता से काम कर रही है। मेरी सरकार भरोसेमंद, पारदर्शी और निष्पक्ष नीतिगत माहौल तैयार करने को लेकर प्रतिबद्ध है।’’ पिछले साल मई में सम्पन्न हुए आम चुनाव में भाजपा को मिली बड़ी जीत के बाद मई में सत्ता संभालने वाले मोदी ने कहा कि सरकार ‘नीति निर्देशित राजकाज’ देने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत में कारोबार में आसानी की मुख्य चिंता है और यह हमारी भी चिंता है। मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि हम इन मुद्दों पर गंभीरता से काम कर रहे हैं। हम इसे पहले की तुलना में या दूसरे की तुलना में आसान नहीं बल्कि सबसे आसान बनाना चाहते हैं।’’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘हम तेजी से आर्थिक सुधारों के चक्र को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। हम यह भी देखने को लेकर उत्सुक हैं कि हमारी नीतियां भरोसेमंद हो। हमारा स्पष्ट दृष्टिकोण है कि कर व्यवस्था भरोसेमंद हों। पिछले कुछ महीनों में इस दिशा में कई निर्णय किये हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘..हम केवल प्रतिबद्धता जताना और घोषणा नहीं कर रहे हैं। हम उसके लिये ठोस आधार देने के लिये कदम भी उठा रहे हैं।’’ मोदी ने वायब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन में भाग लेने आये अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी, संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून तथा विश्वबैंक प्रमुख जिम योंग किम समेत विश्व के अन्य नेताओं के समक्ष कहा कि भारत ‘बदलाव के रास्ते’ पर है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने अल्प समय में भारत के सुनहरे भविष्य के लिये लोगों के समक्ष प्रतिबद्धता जतायी है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें इसे करने के बारे में पता है, हमें अनुकूल नीतिगत मसौदे की जरूरत है। हम इसमें आगे और सुधार के लिये निरंतर काम कर रहे हैं।’’ सरकार की तरफ से निवेशकों को हाथ थामने का आश्वासन देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप एक कदम चलते हैं, हम आपके लिये दो कदम चलेंगे।’’

नरेंद्र मोदी ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में पहली तीन तिमाही में वृद्धि दर पिछले साल के मुकाबले एक प्रतिशत अधिक रही है। उन्होंने कहा कि अंतराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने भविष्वाणी की है कि भारत आने वाले वर्षों में दूसरा सबसे तेजी से वृद्धि करने वाला देश होगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) के अनुसार दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत एक मात्र देश होगा जो इस साल अपनी वृद्धि की गति तेज करेगा। सरकार द्वारा हाल में उठाये गये कदमों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि निर्माण क्षेत्र में एफडीआई को उदार बनाया गया, रेलवे में (कुछ क्षेत्रों में) 100 प्रतिशत तक विदेशी निवेश की अनुमति दी गयी है, 49 प्रतिशत एफडीआई के लिये रक्षा क्षेत्र को खोला गया है और बीमा क्षेत्र में भी एफडीआई बढ़ाकर इसी स्तर पर किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार केंद्र व राज्य स्तरों पर एकल खिड़की मंजूरी व्यवस्था पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि समस्याओं के प्रति रूख में बदलाव आया है। आर्थिक सुस्ती की बात केवल व्यापार और उद्योग के संदर्भ में ही की जाती है लेकिन इसके कारण उन देशों में प्रति व्यक्ति आय का स्तर कम होता है जहां दुनिया की बड़ी आबादी रहती है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस वैश्विक मंच को आश्वस्त करता हूं कि भारत वैश्विक नेतृत्व के साथ विभिन्न मुद्दों पर काम करना चाहता है, चाहे वह ‘‘गरीबी या पारिस्थितिकी का मुद्दा हो।’’

अपना दृष्टिकोण प्रकट करते हुए मोदी ने कहा कि संस्थानों और डिलीवरी प्रणाली को मजबूत करना है। ‘‘आप जानते हैं कि पिछले कुछ साल के दौरान हमारी आर्थिक वृद्धि धीमी हुई। अब मेरी सरकार तीव्र और समावेशी वृद्धि के लिये हर संभव प्रयास कर रही है।’’ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार का जोर सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के जरिये सड़क, गैस ग्रिड, बिजली एवं जल प्रणाली, कृषि सिंचाई तथा नदियों की साफ-सफाई पर है। ”बुनियादी ढांचा योजना को क्रियान्वित करने के लिये फास्ट ट्रैक पीपीपी व्यवस्था स्थापित की जा रही है।” उन्होंने कहा कि बंदरगाहों को आधुनिक रूप देने तथा नये वैश्विक स्तर के बंदरगाहों के विकास के अलावा बंदरगाहओं जुड़े विकास के लिये उनके साथ बेहतर सड़क एवं रेल संपर्क उपलब्ध कराने को लेकर सागरमाला परियोजना रखी गयी है। साथ ही डिजिटल हाईवे आई-वेज के साथ साथ राजमार्ग तैयार किये जा रहे हैं। मोदी ने कहा, ‘‘विनिर्माण संबंधी ढांचागत सुविधा को उन्नत बनाने के लिये हम मालगाड़ियों के लिये अलग रास्ता और औद्योगिक गलियारों के साथ वैश्विक स्तर के निवेश और औद्योगिक क्षेत्र स्थापित कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘भारत आपको कम लागत वाले विनिर्माण की पेशकश करता है। भारत में सस्ता और उच्च गुणवत्ता वाला श्रम है। हम बेहतर प्रबंधन तथा राजकाज के जरिये अपनी इन मजबूती का दोहन करने की कोशिश कर रहे हैं।’’ मोदी ने कहा कि विनिर्माण, कृषि आधारित उद्योग, पर्यटन के साथ सेवाओं को बढ़ावा देकर रोजगार के अवसर बढ़ाये जा रहे हैं। ‘‘हमने उद्यम को प्रात्सोहित करने तथा हमारे युवाओं के लिये बड़ा रोजगार बाजार सृजित करने के लिये श्रम सुधारों को आगे बढ़ाया है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास का लाभ सामान्य जन तक को होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी चुनौती यह है कि हमें मौजूदा जगहों पर काम करते रहने के साथ-साथ उसका नये क्षेत्रों तक पहुंचना है। हमें गरीब से गरीब लोगों का पर्याप्त ध्यान रखते हुए बड़ा सोचना है। इस चुनौती को तेजी से पूरा करने के लिये प्रौद्योगिकी और नवप्र्वतन ही संभवत: एकमात्र औजार है। इसीलिए, हम ज्ञान और नवप्रवर्तन, अनुसंधान तथा विकास पर विशेष जोर देने को लेकर प्रतिबद्ध हैं।’’ मोदी ने कहा कि भारत अवसरों का देश है। ‘‘हमें तेजी से सड़क और रेलवे तैयार करने की जरूरत है। हमें घरों और कारखानों को लगातार बिजली देनी है। हमें शहरों के लिये बुनियादी ढांचा तैयार करना है जहां हमारी आधी आबादी रहती है।’’ उन्होंने कहा कि भारत में वैश्विक निवेशकों के लिये अपार संभावनाएं हैं और विकास की प्रक्रिया धीरे-धीरे नहीं बल्कि झटके से चलती है। मोदी ने कहा, ‘‘हमने अपने लोगों के समक्ष प्रतिबद्धता जतायी है। हमने स्वयं से प्रतिबद्धता जतायी है। हमने भारत के महान भविष्य के लिये प्रतिबद्धता जतायी है। हमें अपनी नई नियति लिखनी है और हमें इसे बहुत अल्प समय में लिखना है।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि अनुकूल नीतिगत मसौदे की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और न्यायिक व्यवस्था की स्वतंत्रता देश में दीर्घकाल तक कारोबार के लिये सबको समान अवसर मुहैया कराती है।

 

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