जिंदल का पासपोर्ट जब्त नहीं करने पर सीबीआई की खिंचाई

नई दिल्ली।  विशेष अदालत ने कथित कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाला मामले में आरोपित कांग्रेस नेता एवं उद्योगपति नवीन जिंदल का पासपोर्ट जब्त नहीं करने पर आज सीबीआई को फटकार लगाते हुए कहा कि जांच एजेंसी कुछ आरोपियों के लिए अलग नीति नहीं अपना सकती। मामले में दाखिल आरोप पत्र में जिंदल सहित 14 अन्य आरोपित हैं। विशेष सीबीआई न्यायाधीश भरत पराशर ने सीबीआई निदेशक को यह सुनिश्चित करने को भी कहा कि आरोपियों का पासपोर्ट जब्त करने के लिए मामले में जांच के दौरान एक समान नीति अपनाई जाए। न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा, ‘‘यह स्पष्ट है कि मामला दर्ज होने पर सीबीआई ने जहां सभी आरोपियों के पासपोर्ट जब्त करने की एक समान नीति अपनाई है, मौजूदा मामले में उन्होंने अलग नीति अपनाई और इसका कारण उन्हें ही मालूम होगा।’’ सुनवाई के दौरान वरिष्ठ सरकारी वकील वी.के. शर्मा ने अदालत को बताया कि सीबीआई कार्यालय में यह फैसला लिया गया कि जांच के दौरान नवीन जिंदल का पासपोर्ट जब्त नहीं किया जाएगा। जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि सीबीआई के समक्ष अपना पासपोर्ट जमा कराने के लिए जिंदल को नोटिस भी जारी किया गया था लेकिन कुछ समय लेने के बाद उन्होंने जांच एजेंसी को अपने पासपोर्ट की एक रंगीन प्रति देते हुए उनसे यह अनुरोध किया कि उनका पासपोर्ट जब्त नहीं किया जाए। इसके लिए अदालत ने कहा, ‘‘सीबीआई निदेशक को निर्देश दिया जाता है कि भविष्य में इस तरह के सभी मामलों में एक समान नीति अपनाई जाए यह सुनिश्चित हो ताकि अदालत का कीमती वक्त जाया नहीं हो।’’

सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी ने कहा कि मामले में दाखिल आरोप पत्र में 10 में से दो आरोपियों- सुरेश सिंघल और राजीव जैन का पासपोर्ट जब्त कर लिया गया था। अदालत ने अमरकोंडा मुरगादंगल कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाला के संबंध में जिंदल, पूर्व कोयला राज्य मंत्री डी. नारायण राव, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा और 12 अन्य लोगों के खिलाफ कल दाखिल सीबीआई के आरोप पत्र पर गौर करने के लिए अब छह मई की तिथि निर्धारित की है। इनके अलावा, मामले में कथित अपराधों के लिए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की संबंधित धाराओं तथा भ्रष्टाचार निरोधक कानून के प्रावधानों के तहत पूर्व कोयला सचिव एच.सी. गुप्ता और जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड एवं जिंदल रीयल्टी प्रावइवेट लिमिटेड सहित पांच कंपनियों को भी आरोपित किया गया। यह मामला 2008 में जिंदल समूह की कंपनियों- जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (जेएसपीएल) एवं गगन स्पॉन्ज आयरन प्राइवेट लिमिटेड (जीएसआईपीएल) को झारखंड के बीरभूम जिले में आवंटित अमरकोंडा मुरगादंगल कोयला ब्लॉक आवंटन में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। सीबीआई के आरोप पत्र में आरोपित छह अन्य व्यक्तियों में- ज्ञान स्वरूप गर्ग, सुरेश सिंघल, राजीव जैन, गिरीश कुमार सुनेजा, आर.के. सराफ और के. रामकृष्ण प्रसाद शामिल हैं। मामले में आरोपित कंपनियों में- जेएसपीएल, जिंदल रीयल्टी प्राइवेट लिमिटेड, गगन इंफ्राएनर्जी लिमिटेड, नयी दिल्ली एक्जिम प्राइवेट लिमिटेड और सौभाग्य मीडिया लिमिटेड शामिल हैं। आरोप पत्र में जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि जिंदल समूह की कंपनियों ने 2008 में कोयला ब्लॉक हासिल करने के लिए तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश किया। मामले में दर्ज प्राथमिकी में सीबीआई ने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार ने 2007 में राज्य में कोयला ब्लॉक आवंटन के लिए अपनी सिफारिशों में दूसरी कंपनियों के स्थान पर जिंदल समूह का पक्ष लिया। प्राथमिकी में स्पष्ट था कि विद्युत मंत्रालय जेएसपीएल और जीएसआईपीएल को कोयला ब्लॉक आवंटन के प्रस्ताव के खिलाफ था। प्राथमिकी में जांच एजेंसी ने आरोप लगाया, ‘‘जांच में यह खुलासा हुआ कि झारखंड सरकार ने 20 जून, 2007 को लिखे अपने पत्र में अमरकोंडा मुरगादंगल कोयला ब्लॉक में आवंटन के लिए तीन कंपनियों- 1. मेसर्स लांको इंफ्राटेक लिमिटेड (40 प्रतिशत), 2. मेसर्स जेसपीएल (30 प्रतिशत) और 3. मेसर्स जीएसआईपीएल (30 प्रतिशत) नामों की अनुशंसा की थी।’’ प्राथमिकी के अनुसार, ‘‘30 जुलाई, 2007 को लिखे अपने पत्र में झारखंड ने अपनी अनुशंसा में तब्दीली लाते हुए अमरकोंडा मुरगादंगल ब्लॉक में आवंटन के लिए नवीन जिंदल की ही केवल दो कंपनियों अर्थात जेएसपीएल (70 प्रतिशत) और मेसर्स जीएसआईपीएल (30 प्रतिशत) की अनुशंसा की।’’ सीबीआई ने आरोप लगाया कि दोनों ही जेएसपीएल और जीएसआईपीएल ने अपने आवेदन में तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया।

 

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