ए.एस.आई. की बर्खास्तगी ही काफी नहीं बस्सी जी ,पुलिस में भरष्ट लोगों के लिए गुप्त निगरानी तंत्र भी काम करे

–राजेन्द्र स्वामी

ASI showing gun to arun and house mad
ASI showing gun to arun and house mad

arun rani bagh

दिल्ली। दिल्ली  बाग़ इलाके में एक घर में घुसकर महिला से दुष्कर्म करने के आरोपी दिल्ली पुलिस के सहायक उपनिरीक्षक जयबीर के कारनामें से शर्मिंदा दिल्ली पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी ने जयबीर को नौकरी से बर्खास्त तो कर दिया लेकिन सवाल यह है की क्या जयबीर की गिरफ्तारी और बर्खास्तगी से दिल्ली पुलिस अपनी नाक बचा पाएगी ? सवाल यह भी है की जयबीर जैसा लालची, हैवान और हवस का भूखा ASI दिल्ली पुलिस में नौकरी कर कैसे रहा था ? जिस तरह से लालच में अंधा होकर वह अरुण के केस को अपनी अवैध कमाई और अय्याशी का औजार बना लिया था वह उसकी स्वभाव का साक्षात प्रमाण है ? हैरत है की बात है की क्या उसके खिलाफ कभी किसी ने कोई शिकायत नहीं की ? क्या पुलिस खुद अपने विभाग के ऐसे लालची और भरष्ट कर्मचारियों और नजर नहीं रखती ?  यदि ऐसा होता तो जयबीर जैसे लोग पुलिस की नौकरी में नहीं होते। और यदि होते तो इतने भरष्ट नहीं होते। न ही सुधा ( बदला हुआ नाम ) को बार बार रेप का शिकार होना पड़ता।
दिल्ली पुलिस कमिश्नर भीमसेन बस्सी जयबीर को जेल भेजकर और नौकरी से बर्खास्त करके अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। उन्हें इन सवालों का सामना तो करना ही पड़ेगा की क्या ऐसे भ्र्रष्ट पुलिस कर्मियों पर नजर रखने की आंतरिक व्यवस्था भी दिल्ली पुलिस का पास है क्या ? पंजाबी बाग़ थाने में रेलवे कर्मचारी अरुण पर दर्ज़ 308 का मुकदमा जयबीर के लिए अवैध कमाई का जरिया बन गय।  उसके लालच और हौसले की तो देखिये की उसने यह तक नहीं देखा की कमरें में सीसीटीवी कमरे लगें है। दिल्ली  पुलिस यह मानकर चल रही है की जयबीर को फसाया गया लेकिन विचार इस पर भी होना चाहिए की वह फसा क्यो ? उसके लालच ने उसे सलखों तक पहुचाया ? चार महीने से वह अरुण से  बार बार पैसे और शराब ही नहीं मांग रहा था बल्कि उसके घर में रखा खाने का सामान तक ले जात्ता था।  दूध और सब्जियां भी यहीं से ले जाने लगा था।  जब उसके हौसले इतने बढे की उसने उनकी मुँहबोली बहार और नौकरी से सम्बन्ध बनने के लिए दबाब बनाया तो अरुण ने  उसे फ़साने की  योजना बनाई।  उससे दो बार 23 साल की नौकरी से दुष्कर्म किया। और जाल फस गया।
अब भी समय रहते दिल्ली पुलिस को सचेत हो जाना चाहिए।  आज आम आदमी की भी यही धारणा है की लड़ाई झगडे की केस पुलिस थाने के बीट अफसरों और डिवीजन अफसरों के लिए कमाई का जरिया बन जातें है। जिनकी ज्यादतियां बढ़ जाती है उनकी खिलाफ शिकायतें भी बढ़ जाती है।  पुलिस कर्मियों पर नजर रखने का जब तक पुलिस में आंतरिक तंत्र नहीं बनेगा पुलिस आम आदमी की नजर में पुलिस के लिए सम्मान की कमी ही रहेगी।

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