दिल्ली की शादियां – बैंक्वेट हाल मालिकों की मजबूरी, प्रशासन की मौज

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के नए फरमान ने दिल्ली की शादियों की रौनक फीकी कर दी हैा शादियों में मेहमानों की संख्या सीमित कर देने से न केवल दूल्हा, दुल्हन के परिवार वाले बल्कि बैंक्वेट हाल के मालिकों के सामने भी खासी परेशानियां आ खडी हुई हैं। सरकार के इस आदेश को अव्यवहारिक बताया जा रहा है।

अफसरशाही की बल्लेबल्ले
लेकिन इधर इस फैसले से सरकारी अफसरशाही की बल्लेबल्ले हो गई है। मास्क की अनिवार्यता के नाम पर 2000 रूपए का जुर्माना और तय सीमा से अधिक मेहमान दिखाई देने के नाम पर भारी भरकम पैनल्टी और बैंक्वेट हाल सील करने का भय दिखा कर तीन तरफ से मोटी वसूली के रास्ते खुल गए हैं। एक लडकी वाले, दूसरा लडके वाले और तीसरा बैंक्वेट हाल के मालिक। यानी सरकारी मुलाजिमों के लिए सोने का अंडा देने वाली अब ये तीन नई मुर्गियां आ गई हैं।
कोरोना महामारी में बढते मरीजों की तादाद को देखते हुए हाल ही में दिल्ली सरकार ने शादियों में मेहमानों की संख्या 200 से घटा कर केवल 50 तक ही समेट दी, इस आदेश से सामाजिक, पारिवारिक और आर्थिक नजरिए से सबसे अधिक दिक्कतें सामने आ रही हैं। दिल्ली सरकार के इस आदेश से बैंक्वेट मालिकों और उन लोगों की मुसीबत बढ़ा दी जिनकी शादियां 30 नवम्बर तक है। सरकार के इस फरमान से नाराज लोग इसे क्यों अव्यवहारिक बता रहे हैं।
कोरोना काल के 7 महीनों ने बैंक्वेट इंडस्ट्री पूरी तरह बंद रही, न शादियों की रौनक रही, न ही इस इंडस्ट्री के जुड़े लाखों लोगों के पास काम। लेकिन जैसे ही सरकार ने शादियों में 200 लोगों के शामिल होने इजाज़त दी तो लगा कि अच्छे दिन आ गए लेकिन अब यह ख़ुशी और उम्मीद ज्यादा दिन कायम नहीं रही। जैसे ही दिल्ली में कोरोना का मामले तेज़ी से बढे, सरकार  50 से ज्यादा लोगों के शामिल होने पर पाबंदी लगा दी।

लाखों लोगों की रोजी रोटी पर भी संकट
सरकार के इस फैसले को बैंक्वेट मालिक अव्यवहारिक बताते हुए गुहार लगा रहे हैं कि उन्हें केवल 25 नवम्बर से 12 दिसंबर तक आधी क्षमता के साथ आयोजन की इजाजत दे दें। यदि ऐसा नहीं हुआ तो बैंक्वेट इंडस्ट्री तो बंद होगी ही, साथ ही लाखों लोगों की रोजी रोटी पर भी संकट आ जाएगा। बैंक्वेट मालिक इतने निराश और नाराज हैं की वे सब बैंक्वेट की चाबियाँ सरकार का सौंपने का मन बना चुके हैं।
उत्तरी दिल्ली के वजीरपुर, जीटी करनाल रोड, लारेंस रोड, मोती नगर, पंजाबी बाग, पीरागढी आदि इलाकों में बडी संख्या में बैंक्वेट हाल स्थित हैं और इनके मालिकों के सामने घबराहट के हालात हैं।
मुसीबत उन लोगों की भी कम नहीं है जिनके यहाँ 30 नवम्बर तक शादियां है। कार्ड 200 लोगों के क्षमता के हिसाब से बाटे जा चुके हैं। जाने माने कारोबारी नेता और बिजनेसमैन विपिन आहूजा कहते हैं कि पहले दिक्कत थी कि केवल 200 लोगों में से वे किसे बुलाएं और किसे छोड़ें। अब इनकी सबसे बड़ी दिक्कत है की वे क्या करें। महज 50 लोगों में तो परिवार वाले भी पूरे नहीं होते। इनके अलावा कैटरिंग वाले वेटर आदि भी शामिल हैं।

ऐसी ही दिक्कतें हज़ारों लोगों की है। इस फरमान के बाद सामाजिक, पारिवारिक परेशानी यह है कि वे किसे बुलाएं और किसे मनाएं कि वो न आएं। ये निराश लोग अब अपनी शादियां या तो कैंसल कर रहे हैं या फिर शादी करने के लिए एनसीआर का रुख कर रहे हैं।
मास्क न लगाने पर पहले केवल 500 रूपए का ही जुर्माना था पर अब 2000 रूपए करने पर विपक्षी दलों समेत आम जनता का भी भारी विरोध सामने आ रहा है। होता यह हैं कि बिना मास्क के पकडे जाने पर लोग 2000 रूपए भरना किसी की हैसियत में नहीं है। इसलिए थोडे रूपए ले दे कर पुलिस और लोग आपस में सहमत हो जाते हैं। यह पैसा सरकारी खजाने में जाने की बजाय अफसरों की जेबों में जाता है।
दिल्ली में 50 लोगों के शामिल होने का आदेश अभी तो 30 नवम्बर तक है लेकिन यह आगे भी जारी रह सकता है। लिहाज़ा बैंक्वेट मालिक केंद्र और राज्य सरकार के नुमाइंदो से अपील कर रहे हैं कि वह उन्हें बचा लें। कोरोना से तो शायद वे बच जायेंगे , लेकिन यदि उन्हें 15 से 20 दिन की मोहल्लत नहीं मिलेगी तो वे आर्थिक रूप से जरूर बर्बाद हो जायेंगे।

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