टोल टैक्स मुक्त भारत की मांग को लेकर ट्रांसपोर्टरों का एक अक्टूबर से चक्का जाम का ऐलान

-पत्रिका ब्यूरो
दिल्ली। एक अक्टूबर से देश भर के ट्रांसपोर्टर टोल टैक्स ख़त्म किये जाने की मांग को लेकर हड़ताल पर जाने की तैयारी कर चुकें है। संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर में देश के कई राज्यों से आये transporter meeting-2 कर सरकार को ऑफर दिया की सरकार टॉक्स टैक्स से 15 हज़ार करोड़ रुपये भी नहीं ले पाती लेकिन ट्रांसपोर्टर 20 हज़ार करोड़ रुपये हर साल देने को तैयार है इसके बदले सरकार देश को टोल टैक्स से मुक्त कर दे। यदि सरकार ने उनकी मांग नहीं मानी तो एक अक्टूबर से ट्रांसपोर्टर चक्का जाम कर देंगे।
आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस की अगुवाई में देशभर के कई यूनियंस भी शामिल थी। इनका कहना है की सरकार 15 हज़ार करोड़ रुपये वसूलने के लिए ने केवल देश से दो लाख करोड़ रुपये खर्च कर रही है बल्कि इससे हज़ारों करोड़ रुपये का डीज़ल और समय बर्बाद हो रहा है –यदि देश के विकास की रफ़्तार को बढ़ना है तो टॉक्स टैक्स की ख़त्म करना होगा।
इस मांग को लेकर ये ट्रांसपोर्टर सरकार से बात कर चुकें है लेकिन सरकार इनकी मांग को सुनाने को तैयार नहीं है। यदि सरकार ने ऐसा नहीं किया तो एक अक्टूबर से देशभर के ट्रांसपोर्टर चक्का जाम  कर देंगे। ट्रांसपोर्ट फेडरेशन ऑफ़ इण्डिया के उपाध्यक्ष अजय मैनी कहतें है की सरकार जितना टॉक्स टैक्स लेती  है उससे कहीं ज्यादा ट्रांसपोर्टर देने को तैयार है। डीज़ल पर लगाने वाला सेक्स टैक्स भी 6 रुपये से बढाकर 8 रुपये तक देने को तैयार है। यदि सरकार देश को टोल मुक्त कर दे तो हम 17  हज़ार करोड़ रुापये हर साल देने को तैयार है।  आम जनता को भी टोल से मुक्त कर दे – इससे न केवल जाम से मुक्ति मिलेगी बल्कि करीब 80 से 90  हज़ार करोड़ रुपये का डीज़ल भी बर्बाद होने से बचेगा।  सरकार उनकी मांग नहीं मान रहे लिहाज़ा उनकी पास कोई विकल्प नहीं है।  सभी एक अक्टूबर से चक्का जाम करने की तयारी कर चुकें है।
इन ट्रांसपोर्टर्स एक तेवर और तैयारियां सरकार की मुसीबत बढ़ा सकती है। इनकी ऑफर ने केवल व्यवहारिक लगते है बल्कि आम जनता को रहत देने वाली भी है।
आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कमिटी के टोल कलेक्शन कमिटी के चैयरमेन कहतें है की वे सरकार को सब कह चुकें है।  देश में टोल माफिया का राज है।  हर पार्टी में इनके लोग है।  यदि सरकार इनकी बात मान ले तो न केवल सरकार की आय बढ़ेगी बल्कि टोल पर जाम की समस्या से लेकर गुंडागरी तक की समस्या से भी मुक्ति मिलेगी।
दिल्ली  ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष सरकार रविन्द्र सिंह खुराना कहतें  है की उनकी पास कोई चारा नहीं है वे चक्का जाम करने  को मजबूर है।  सरकार ने कभी ट्रांसपोर्ट जगत की और  ध्यान ही नहीं दिया। जबकि यह सभी उद्योगों की रीड की हड्डी है।
इस मुद्दे पर जिस तरह से सभी ट्रांसपोर्ट यूनियन एक मंच पर आ गयी है और जिस तरह से आम जनता को भी टोल से राहत देने की बात ट्रांसपोर्टर्स करने की बात कह रहे है उससे सरकार की मुसीबत बढ़ना तय है। जाहिर है सरकार यदि इनकी मांग नहीं मानती है तो उसे इसकी वजह भी बतानी होगी। फिलहाल सरकार में हड़कम्प है और ट्रांसपोर्टर्स में गुस्सा -अब देखना होगा की सरकार ट्रांसपोर्टर्स के किस तरह से निपटती है।

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