ट्रेड यूनियन की हड़ताल – भारत बंद का एलान

प्रीती भंडारी
ट्रेड यूनियन की हरताल का असर आज सभी सार्वजनिक परिवहन और टेलीकॉम जैसी सुविधाओँ  पर देखने को मिल रहा है।  हालाँकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो इसके लिए केंद्र सरकार ने तमाम सेवाएं मुहैया कराने के लिए कारगर कदम उठाने के आदेश दिए है।
यूपी समेत कई और राज्यों  के परिवहन संगठन के भी हड़ताल में शामिल होने के कारण कई जगहों पर बसें नही चल रही है जिस वजह से कई यात्री बस अड्डे पर ही फसे हुए है
प्रदर्शनकारियों ने की तोड़फोड़
 
वही पश्चिम बंगाल में सीपीएम और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की बात भी सामने आई है।  परगना जिले में हड़ताल के दौरान टीएमसी और सीपीएम के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए,  साथ ही  कई जगहों पर प्रदर्शनकारी तोड़ फोड़ पर भी उतर आये है।  जिसका असर सार्वजनिक  परिवहन पर भी देखने को मिल रहा है।  जिसके बाद पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया है।
गौरतलब है की  पिछले साल भी  केंद्रीय श्रमिक संगठन इसी प्रकार की हड़ताल पर गए थे जिसमे उनका कहना था की सरकार ने उनकी 12  सूत्री मांगों पर धयान नही दिया है और सरकार एकतरफा तरीके से  श्रम सुधार लागू कर रही है इसके साथ साथ केंद्रीय संगठनों ने दावा भी  किया है कि जहां पिछले साल इस हड़ताल में 14  करोड़ श्रमिक शामिल हुए वही  इस साल हड़ताल में करीब 15 करोड़ श्रमिक शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।
बैकिंग, टेलीकॉम और कई अन्‍य क्षेत्रों के कर्मचारी भी हड़ताल पर है। बैंक, सरकारी ऑफिस और फैक्‍टरियां बंद  है  कुछ राज्‍यों में स्‍थानीय संगठनों ने भी हड़ताल में भागीदारी का फैसला किया है। इसके कारण सार्वजनिक परिवहन व्‍यवस्‍था पर भी असर पड़ा  है।  इनके साथ-साथ रेडियोलॉजिस्‍टों और सरकारी अस्‍पतालों की नर्सों ने भी  अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की है .

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