दिल्ली में बढ़ती गर्मी में किया हाल बेहाल ,तेज गर्मी के कारण दिल्ली में रिकॉर्ड तोड़ स्तर तक पहुंची बिजली की मांग।

दिल्ली में बढ़ती गर्मी में किया हाल बेहाल ,तेज गर्मी के कारण दिल्ली में रिकॉर्ड तोड़ स्तर तक पहुंची बिजली की मांग।
गोमती तोमर ,
दिल्ली -जैसे जैसे गर्मी का मिजाज बढ़ता जा रहा है वैसे वैसे बिजली विभाग की चिंताएं भी बढ़ गई है। पिछले कुछ दिनों से तापमान में इतनी बढ़ोतरी हो गयी है की इस गर्मी को कम करने में इस्तेमाल होने वाली बिजली का एक बड़ा योगदान रहता है लेकिन आज कल बिजली विभाग के लिए ये एक संकट का समय बन गया है इतनी बिजली की मांग उनके लिए पूरी करना अपने आप में एक चुनौती है। गर्मी की वजह से बिजली की मांग में लगातार वृद्धि हो रही है। जून के महीने में ही दिल्ली में बिजली की मांग का रिकॉर्ड एक बार फिर टूटा है। शुक्रवार दोपहर 3 बजे बिजली की अधिकतम मांग 6926 मेगावाट पहुंच गई। इससे पहले 1 जून को अधिकतम मांग 6627 मेगावाट दर्ज हुई थी। समर एक्शन प्लान में दिल्ली में 7 हजार मेगावाट तक मांग पहुंचने का पूर्वानुमान लगाया गया था।लेकिन ऐसा लगता है की ये अनुमान को दिल्ली बहुत जल्द पीछे छोड़ देगी। 
7000 मेगावाट पार कर सकती है मांग पिछले वर्ष 2017 में दिल्ली सरकार ने 6500 मेगावाट का पूर्वानुमान लगाया था, लेकिन मांग उससे ज्यादा पहुंच गई थी। इसलिए इस वर्ष सात हजार मेगावाट का पूर्वानुमान लगाकर बिजली विभाग को बिजली के अनुसार तैयारी करने को कहा गया है। पिछले कुछ दिनों से जिस तरह से बिजली की मांग में बढ़ोतरी हो रही है, उससे सात हजार मेगावाट का स्तर भी पार होने की संभावना जताई जा रही है।और पिछली बार की तरह ये सम्भावनाये नहीं रहेंगी इस बार की बढ़ती गर्मी इस लिमिट को भी पार कर जायेगी।
अब देखने की बात ये है की इसकी पूरी बिजली विभाग कैसे पूरी करेगा या इसके चलते उपभोग्ताओ को अच्छी खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। हालांकि बिजली वितरण कंपनियां पहले ही कह चुकी हैं कि उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। हम अपने उपभोक्ताओं को बिजली की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध कराएंगे। टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूशन लिमिटेड (टीपीडीडीएल) का तो ये तक कहना है की ने कहा था कि 2200 मेगावाट तक बिजली आपूर्ति की व्यवस्था की गई है। इसी तरह से बीएसईएस ने भी दावा किया था कि बिजली की मांग को ध्यान में रखते हुए सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं।
दिल्ली की बढ़ती गर्मी देख दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल भी घबरा गए और उन्होंने बिजली की समस्या को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी भी लिखी डाली। केजरीवाल ने कहा था कि रेलवे द्वारा कोयला खदानों से बिजली संयंत्रों तक कोयला पहुंचाने के लिए पर्याप्त वैगन की व्यवस्था न किए जाने की वजह से ही कोयले की कमी की समस्या खड़ी हो गई। केजरीवाल ने पीएम मोदी से आग्रह किया था कि वह रेलवे को जरूरी निर्देश दें, ताकि रेलवे पर्याप्त मात्रा में कोयले की ढुलाई के लिए वैगन की व्यवस्था करे
 प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र में सीएम कोजरीवाल ने कहा की दिल्ली में बिजली की अच्छी खासी कटौती हो सकती है और एक ओर बिजली विभाग कह रहा है की हमारी पूरी तयारी है और वह अपने उपभगताओं को कोई दिक्कत नहीं आने देंगे। दिल्ली में बिजली की मांग 6200 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। भीषण गर्मी को देखते हुए यह मांग अकेले दिल्ली में 7000 मेगावाट तक जा सकती है। केजरीवाल ने चिट्ठी में लिखा था कि अगर जल्दी ही इन संयंत्रों तक कोयला नहीं पहुंचाया गया तो दिल्ली में बिजली की भारी कटौती हो सकती है। 
राजधानी में बिजली कटौती के लिए दिल्ली विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता पहले ही दिल्ली सरकार को जिम्मेदार ठहरा चुके हैं। विजेंद्र गुप्ता के मुताबिक, एक तरफ दिल्ली में चिलचिलाती गर्मी पड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ लगातार बिजली संकट गहरा रहा है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन दादरी और बदरपुर प्लांट से प्राप्त होने वाली बिजली की कमी का बहाना बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना चाहते हैं। यह एक मंत्री का गैर जिम्मेदाराना व्यवहार है।

हमारे देश में किसी के मरने से लेकर मौसम तक पर राजनीति शुरू हो जाती है। जनता इन्हे अपनी समस्याओं के समाधान के लिए चुनती है या ये जनता के ऊपर राजनीति करने के लिए नेता बनते है इसका तो पता आज तक ये जनता भी नहीं लगा सकी। बीजेपी आप पर आरोप लगाती है तो वहीं आप के सी एम प्रधान मंत्री तक को बिजली की पूर्ति के लिए पत्र लिख देते है। वही बिजली विभाग इस बात की की तस्सली देती है की उनकी तरफ से उपभोग्ताओ को कोई परेशानी नहीं होगी।

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