प्रीती अग्रवाल से मेयर पद छूटा, पर मीडिया और वीआईपी ठाठ का नशा नहीं टूटा 

 पत्रिका संवादाता  

दिल्ली। रोहिणी वार्ड 57 एन से निगम पार्षद प्रीती अग्रवाल बेशक महापौर से पूर्व महापौर हो गयी और महज एक निगम पार्षद बनकर रह गयी है, लेकिन इस एक साल में मीडिया की सुर्खियां और वीआईपी बने रहने की ऐसी आदत हुयी की उसके लिए तरह तरह हथकंडे अपना रही है। पिछले कुछ दिनों में मीडिया को भेजी गयी कुछ प्रेस विज्ञप्तियां पत्रकारों में चर्चा का विषय बनी हुयी है।  
अभी हाल में भेजी दो प्रेस रिलीज और घटना भी मीडिया और उनके इलाके के प्रमुख लोगों और बीजेपी हलकों में चर्चा का विषय बन रही है। प्रीती अग्रवाल के ऑफिस से जारी के प्रेस रिलीज में कहा गया की प्रीती अग्रवाल ने सड़क पर पड़े एक पेड़ को खुद जाकर हटवाया। यह बात अलग है की मीडिया उसे तबज्जो नहीं दी। पत्रकार हैरान है की क्या यह इतनी बड़ी घटना है जिसकी प्रेस रिलीज तमाम मीडिया को भेजी जाये। आंधी में गिरे इस पेड़ को वैसे भी नगर  निगम हटवाने ही वाला था की प्रीती अग्रवाल खुद पहुंच गयी। जबकि इलाके साफ़ सफाई की तमाम तरह की समस्याएं है लेकिन प्रीती अग्रवाल ने कभी उनकी परवाह नहीं की। महज अख़बार में छपने की चाहत में छोटी छोटी वजहें तलाश रही है। खुद बीजेपी के नेता प्रीति अग्रवाल के ऐसे व्यवहार पर सवाल उठा रहे है। बीजेपी से जुड़े नेता कहतें है कि प्रीति अग्रवाल न तो बीजेपी की मीटिंग्स में आती है और ही नगर निगम की बैठकों में ही शामिल होती है। उस पर दावा करती है की वह लोगों की समस्याओं के लिए सैदेव तैयार रहती है।  
मेयर रहते उन्हें वीआईपी दिखने  की ऐसी लत लगी की वह उसे हर हाल में बनाये रखना चाहती है। प्रीती अग्रवाल नहीं चाहती उन्हें  दिल्ली पुलिस जा जो पीएसओ उन्हें मिला है  वह भी मेयर पद की तरह उनसे दूर हो जाये । अभी दो दिन पहले प्रीती अग्रवाल के घर हुए कथित हमले को भी इसी नजरिये से दिखा जा रहा है।  प्रीति अग्रवाल ने मीडिया को प्रेस रिलजी जारी कर कहा  कुछ अज्ञात लोगों ने रोहिणी स्थित उनके घर पर हमला किया है। इसकी शिकायत भी प्रीति अग्रवाल की और से पुलिस थाने में दी गयी है। मीडिया में प्रीती ने कहा की वे भ्र्ष्टाचार के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगी। प्रीति की यह प्रेस विज्ञप्ति भी मीडिया में चर्चा और हंसी का विषय बनी हुयी है। प्रीति अग्रवाल नार्थ दिल्ली नगर निगम में  भ्र्ष्टाचार की वजह से सबसे ज्यादा चर्चित रही है। और वही प्रीती अग्रवाल कह रही है की कुछ भ्रष्टाचारी उन्हें धमका रहे है तो  इसे क्या मना जाये। 
 स्थानीय थाना पुलिस इस तरह की किसी भी घटना से इंकार कर रही है। खुद उनके पड़ोस में रहने वाले लोग भी मानते है उनके घर हमले जैसे कोइ बात नहीं थी। यह महज मीडिया की सुर्खियां में बने रहने या सुरक्षा के लिए मिला पीएसओ को बनाये रखने की कोशिस हो सकती है। पुलिस को जांच में ऐसा कुछ नहीं मिला जो यह साबित करता हो की उनके घर पर हमला हुआ है। 
प्रीती अग्रवाल यह साफ़ नहीं कर रही है वे कौन से भ्र्ष्टाचारी है जो उसे धमका रहे है ? आखिर कौन से वो काम है जो कथित भ्र्ष्टाचारी प्रीति अग्रवाल से करवाना चाहतें है ? अब तो वे मेयर भी नहीं है तो फिर क्यों धमकाया जा रहा है ?  
प्रीति अग्रवाल के वार्ड में बिल्डर जमकर अवैध निर्माण करवा रहे है, इसकी शिकायत प्रीति अग्रवाल को भी की गयी लेकिन तमाम शिकायतों की बावजूद अवैध निर्माण में कहीं कोइ कमी नहीं आयी। शिकायत करने वाले खुलकर आरोप लगा रहे है की ऐसी तमाम कंप्लेंट को प्रीति अग्रवाल अपनी कमाई का जरिया बनाती  रही है। ऐसे में यदि प्रीति अग्रवाल भ्र्ष्टाचार से लड़ाई लड़ने की बात कहती है तो यह किसी मजाक से कम नहीं लगता। 

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