सीएनजी घोटाले की चार्जशीट पर भी एलजी और दिल्ली सरकार में शह मात का खेल , रो पड़ा एसीबी अधिकारी

-राजेन्द्र स्वामी

दिल्ली। “आदरणीय केजरीवाल जी, आप भ्रष्टचार के खिलाफ लड़ने वाले महान व्यक्ति है। मैंने भी उसी रहा पर क्या गुनाह कर दिया की मेरे साथ ऐसा अन्याय हो रहा है। में आसुंओ के साथ यह पत्र लिख रहा हूँ।” यह  उस पत्र का मजनून है जो सीएनजी घोटले की जांच कर रहे एसीबी के पीपी विनोद कुमार शर्मा ने मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को लिखा है।  इस पत्र में विनोद कुमार ने कहा है की उन्हें मुख्य मंत्री के निजी सचिव आईएएस राजेन्द्र कुमार ने अपने  दफ्तर में बुलाकर बुरी तरह अपमानित कर धमकाया है की यदि उन्होंने सीएनजी घोटाले की चार्ज शीट और फाइल कोर्ट में देने से पहले उनके पास नहीं भेजी तो उन्हें सस्पेंड कर दिया जाएगा। तब से वे बुरी तरह डरे हुए है और गोलियां खानी पड़ रही है। 

विनोद शर्मा ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री सहित उपराजयपाल नज़ीब जंग, दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को भी की है। “अपनी पत्रिका” के पास इस इस पत्र की कॉपी है। इसमें लिखा गया है की एसीबी के एसीपी संतोष कुमार ने उन्हें चार्ज शीट और फाइल उन्हें दी थी। इसे केस के आईओ पंकज की मदद से पूरी तरह ठीक से  पढ़ा और 1 सितम्बर 2015 को 15 आपत्तियों के साथ उसे न्यायलय भेजवा दिया। 

इसके अगले ही दिन 2 सितम्बर को सुबह 11 बजे आईएएस राजेन्द्र कुमार ने उन्हें अपने दफ्तर बुलाया और अपने अपने अंदर वाले कमरे में ले जाकर धमकाया।  उन्हें बुरी तरह से लताड़ा , अभद्र व्यवहार किया और कहा की यदि केस के फाइल उनके पास नहीं आयी तो उन्हें सस्पेंड कर दिया जाएगा। उसी दिन इसकी शिकायत उन्होंने एसीपी संतोष कुमार को की और लिखित में भी दर्ज़ करा दी। उसी वक्त उन्हें सूचना मिली की सचिवालय में दफतर से केस के चालान और रजिस्टर राइड मारकर कर उठा लिए गए है। जब्त किए किये गए कागजातों की प्राप्ति रसीद भी उन्हें नहीं दी गयी है। 

पीपी राजेन्द् ने अपने शिकायत उपराजयपाल से भी की।  इस बीच दिल्ल्ली सरकार ने पीपी का ट्रांसफर झड़ोदा पुलिस ट्रिंग कैंप में कर दिया।  इस पर उपराजयपाल ने शिकायत के बाद सरकारी कर्मचारियों को दबाव से बचने के लिए एक स्पेशल पीपी संजय गुप्ता को नियुक्त कर दिया। उधर दिल्ली सरकार ने भी के पूर्व पीपी बीएस जून को पीपी नियुक्त कर दिया। इसके बाद फाइल  किसके पास रहे इसे लेकर जंग छिड़ गयी।  4 सितम्बर को स्पेशल जज पूनम चौधरी ने सुनवाई के बाद एलजी एलजी द्वारा नियुक्त पीपी को ही वैध करार दिया। 

इस लड़ाई के बाद भी मामला शांत नहीं हुआ है। दिल्ली सरकार ने 8 सितम्बर को आदेश जारी कर पीपी विनोद कुमार का स्थानांतरण झड़ोदा कलां पुलिस ट्रेनिंग कैंप में कर दिया। 

एसीबी में चल रही इस जंग के बाद विपक्ष को भी केजरीवाल सरकार पर हमला करने का एक और मौका  मिल गया है। बीजेपी विधायक विजेंद्र गुप्ता ने किसे दिल्ली सरकार की न्यायिक प्रक्रिया में दखल ही नहीं मना, बल्कि यह भी आरोप लगाया की वह सीएनजी घोटाले में फसे अपने चहेतेPP letter to cam 3 अधिकारीयों को बचाने के कवायद में लगी है। इस केस की जांच पूरी हो चुकी है और चार्ज शीट  दाखिल करने के ही पीपी विनोद कुमार शर्मा के पास अवलोकन हेतु गयी थी। 

इस केस की जांच के लिए दिल्ली सरकार ने जस्टिस अग्रवाल जांच आयोग का गठन भी किया था। इस आयोग को एसीबी प्रमुख मुकेश मीणा ने अवैध माना। इस आयोग की कानूनी मान्यता को लेकर भी एलजी, केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के बीच मतभेद दिखे। 

2002 में हुए इस घोटले में दिल्ली सरकार को 100 करोड़ रुापये की नुक्सान  अनुमान लगाया गया था।  इस घोटाले में आरोपी कुल 9 लोगों में राजेन्द्र कुमार का भी नाम है।  आरोप गया जा रहा है की राजेन्द्र कुमार को ही बचने के लिए जस्टिस अग्रवाल जांच आयोग बनाया गया। इसे लेकर भी यह साड़ी खींचतान चल रही है। 

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