जानें क्या है सहकारिता मंत्रालय का उद्देश्य, जिसकी कमान गृह मंत्री अमित शाह के हाथ

नेहा राठौर

मोदी सरकार ने कैबिनेट विस्तार से पहले यानी इस हफ्ते मंगलवार को एक अलग सहकारिता मंत्रालय बनाने की घोषणा कर दी थी। इसके अगले ही दिन यानी बुधवार को कैबिनेट विस्तार के दौरान यह मंत्रालय गृह मंत्री अमित शाह को सौंपा गया था।

सहकारिता मंत्रालय का उद्देश्य

इस मंत्रालय का काम सरकार के PIB द्वारा जारी बयान के मुताबिक ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को साकार करने का होगा। ये मंत्रालय देश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए एक अलग प्रशासनिक, कानूनी और नीतिगत ढाँचा बनाएगा।

सरकार के मुताबिक, इस मंत्रालय का उद्देश्य सहकारिता को गहराई प्रदान करते हुए लोक आधारित आंदोलन बनाने और उसे जमीनी स्तर तक पहुंचाने का होगा।

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इतना ही नहीं यह मंत्रालय सहकारी समितियों के लिए कारोबार का रास्ता आसान बनाने के साथ-साथ बहुराज्यीय सहकारी समतियों के विकास में भी सहायता करेगा। बता दें कि इस मंत्रालय का ऐलान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस साल वित्त बजट पेश करते हुए ही कर दिया था।

आखिर क्या है सहकारिता आंदोलन

सहकारिता तरह का माध्यम है जिसके तहत जनता के बीचे के लोग मिलकर कई संस्थाएं बनाते है और किसी एक लक्ष्य के लिए मिलकर काम करते हैं, जैसे बैंकिंग, खेती, डेयरी फार्मिंग, चीनी मिल संचालन आदि। वर्तमान में भारत में करीब 1,94,195 सहकारी डेयरी सोसाइटी और 330 चीनी मिल एसोसिएशन हैं। इतना ही नहीं देश के हर राज्य में कई सहकारी  बैंक भी हैं। अगर इस आंदोलन की सफलता की बात की जाए तो, सबसे बड़ा उदाहरण अमूल ब्रैंड है, जिसे गुजरात की कोऑपरेटिव संस्था चलाती है। वहीं, सहकारी समिति देश में होने वाले चीनी उत्पादन का करीब 35 प्रतिशत हिस्सा चलाती है।

ग्रामीण स्तर पर सहकारी नीति

इसी के साथ किसानों ने ग्रामीण स्तर पर बहुत सी प्राइमरी एग्रीकल्चरल क्रेडिट सोसाइटी का गठन भी किया गया है। इन सोसाइटियों का काम किसानों को कर्ज दिलाने का होता है, जिसके लिए ये सोसाइटियां जिला सहकारी बैंक और राज्य सहकारी बैंकों की सहायता लेती हैं और किसानों की मदद करती हैं।

एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक साल में देश में 95,238 प्राइमरी एग्रीकल्चरल क्रेडिट सोसाइटी, 33 राज्य सहकारी बैंक और 363 जिला सहकारी बैंक बनाए गए हैं, इसके अलावा लोगों की मदद के लिए वहां शहरी सहकारी बैंक भी है, जो शहरों के कम आय के लोगों कर्ज देती है। बता दें कि कृषि की तरह सहकारिता को भी संविधान में समवर्ती सूची में सम्मिलित किया गया है, जिसका अर्थ है कि अब सहकारिता पर केंद्र और राज्य सरकार दोनों का शासन लागू होगा।

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