Friday, June 14, 2024
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छत्तीसगढ़ में 13 किन्नर बने कांनस्टेबल

नेहा राठौर

भारत में समानता की बहुत कमी है। भारतीय संविधान में समानता का अधिकार होने के बावजूद आज भी इस देश में कई जगह भेदभाव देखा जाता है। फिर वो चाहे बेटा-बेटी में हो या आम इंसान और किन्नर में। इस भेदभाव को दूर करते हुए छत्तीसगढ़ पुलिस ने पहली बार किन्नरों को बराबरी का अवसर देने की पहल की है। इससे पहले सिर्फ राजस्थान और तमिलनाडु में ही पुलिस में किन्नरों की भर्ती हुआ करती थी, लेकिन उनकी संख्या चार या पांच तक ही होती थी। इन राज्यों के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस ने भी समानता की की ओर एक कदम बढ़ाया है। इस बार छत्तीसगढ़ पुलिस में अन्य लोगों के साथ 13 किन्नरों की भर्ती की गई है।

छत्तीसगढ़ पुलिस के इस पहल को पूरे देश में किन्नरों को सम्मान और बराबरी का मौका मिलने की राह में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ पुलिस ने किन्नरों की भर्ती का फैसला पांच साल यानी 2017 में ही ले लिया था, लेकिन इस फैसले पर अमल करने में पांच साल लग गए। पुलिस में भर्ती के लिए परीक्षा 2019-2020 में ही पूरी हो गई थी, बस एक मार्च को परिणाम आने बाकी थे। परिणाम आने के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट के जरिए चुने गए सभी किन्नर उम्मीदवारों को बधाई देते हुए बताया कि इन 13 के अलावा दो उम्मीदवार और है जो अभी वेटिंग लिस्ट में हैं। सभी को मिलाकर कुल 2038 कांस्टेबल भर्ती किए गए हैं, जिनमें पुरुषों की संख्या 1736 है और महिलाओं की 289 है।

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समाज में किन्नरों की स्थिति

हांलाकि, सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में ही किन्नरों को तीसरे लिंग के रूप में मान्यता दे दी थी। मान्यता देते हुए कोर्ट ने कहा था कि संविधान पुरुषों और महिलाओं को जो मूलभूत अधिकार देता है, उन पर किन्नरों का भी उतना ही अधिकार है, जितना किसी और आम इंसान का, लेकिन यह फैसला सदियों से समाज में किन्नरों के प्रति चली आ रही हिन भावना को बदलने में नाकाम रहा। आज भी कई किन्नर ऐसे है जिन्हें पढ़े-लिखें होने के बावजूद कोई रोज़गार नहीं मिलता है। उनका खुद का परिवार उनसे मुंह मोड़ लेता है। न तो उन्हें समाज में अपनापन मिलता है और ना ही रोज़गार कमाने का अवसर।

2018 में आई राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक 96 प्रतिशत किन्नरों को नौकरी देने से मना कर दिया जाता है। ऐसे में छत्तीसगढ़ पुलिस के इस कदम से किन्नर समाज को एक उम्मीद की मिली है। पुलिस में भर्ती हुए 13 उम्मीदवारों ने परिणाम आने के बाद मीडिया को बताया कि उन्हें इतना पढने-लिखने के बाद भी नौकरी नहीं मिल रही थी, इस वजह से गुजारा करने के लिए इन्हें सड़क पर भीख मांगनी पड़ती, अपमान और छेड़छाड़ से भी जूझना पड़ता था। भर्ती होने के बाद उन्हें उम्मीद है कि अब पुलिस कांस्टेबल के रूप में उनका अपना जीवन तो बदलेगा ही, इसे साथ-साथ ही वो दूसरे किन्नरों के हालात को भी सुधारने की कोशिश करेंगे।

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