नेत्र शिविर आयोजक गिरफ्तार, डॉक्‍टर के खिलाफ केस दर्ज

अमृतसर। गुरदासपुर में एक समाजसेवी संस्था द्वारा आयोजित आंखों के चिकित्सा शिविर में कम से कम 60 लोगों की आंखों की रोशनी कम हो गई है। इसमें से 16 लोग तो पूरी तरह से नेत्रहीन हो गए हैं।चिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है। गुरदासपुर के डीसी अभिनव त्रिखा के मुताबिक जिन लोगों की आंखों की रोशनी गई है उन्हें मुख्यमंत्री द्वारा एक-एक लाख रुपये देने का एलान किया गया है। एसकेएल नेत्र चिकित्सालय मथुरा (उत्तर प्रदेश) और जालंधर के विद्या आइकेयर सेंटर के डा. विवेक अरोड़ा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। कैंप के आयोजक मनजीत जोशी को पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। जोशी ने गुरुनानक देव चेरिटेबल ट्रस्ट को यह कैंप लगान के लिए अप्रोच किया था और मथुरा से डाक्टरों को बुलाया था। मनजीत जोशी पंजाब के ही फगवाड़ा का रहने वाला है। इनमें से 16 लोग अमृतसर के गांवों के हैं और शेष गुरदासपुर के रहने वाले हैं। इन सभी मरीजों को शहर के आंख, नाक व गला अस्पताल में भर्ती किया गया है। इस बीच यह जानकारी मिली है कि मथुरा, उत्तर प्रदेश के एसकेएल अस्पताल की ओर से यह कैंप लगाया गया था। साथ ही वहीं के चिकित्सकों ने ऑपरेशन भी किया था। अधिकारियों ने बताया है कि 20 नवंबर को यह ऑपरेशन किया गया था। इनमें से 16 लोगों का सहायक प्रोफेसर कर्मजीत सिंह की देखरेख में इलाज चल रहा है। सिंह ने कहा कि इन मरीजों की आंखों की रोशनी स्थायी रूप से चली गई है और वे कभी भी देख नहीं सकेंगे। उपायुक्त भगत ने बताया कि इस मामले की जांच के सिविल सर्जन को आदेश दे दिए गए हैं। उनसे सोमवार तक रिपोर्ट मांगी गई है। इस बीच ऑपरेशन के बाद नेत्रहीन होने वालों की संख्या बढ़ सकती है। सिविल सर्जन ने प्रतिनिधिमंडल के साथ गए 16 पीडि़तों को अमृतसर में ईएनटी अस्पताल में दाखिल करवाया दिया है। सिविल सर्जन राजीव भल्ला ने बताया कि गत दिनों गुरदासपुर के घुमाण गांव में एक एनजीओ की तरफ से लगाए गए शिविर में इन मरीजों का इलाज किया गया था। यह मामला उस समय प्रकाश में आया जब अमृतसर के 16 मरीजों ने उपायुक्त भगत से शिकायत की। सिविल सर्जन ने बताया कि इस तरह के कैंप लगाने के लिए जिला प्रशासन और सिविल सर्जन से अनुमति लेना अनिवार्य होता है किंतु इस मामले में इस कानून का पालन नहीं किया गया।।

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