नीतीश कुमार ने सरकार बनाने का दावा पेश किया

पटना। जदयू विधायक दल के नए नेता नीतीश कुमार ने कुल 130 विधायकों के समर्थन का दावा पत्र बिहार के राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी को सौंपते हुए आज सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया और साथ ही कहा कि अगर अवसर नहीं मिलता है तो वह राष्ट्रपति के समक्ष इन विधायकों की परेड कराने के लिए दिल्ली मार्च करेंगे। अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव, राजद प्रमुख लालू प्रसाद की मौजूदगी में जदयू, राजद, कांग्रेस, भाकपा और एक निर्दलीय सहित कुल 130 विधायकों के समर्थन का दावा पत्र बिहार के राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी को सौंपने के बाद नीतीश कुमार ने यह बात कही। शरद, लालू और बिहार विधानसभा के कांग्रेस विधायक दल के नेता सदानंद सिंह और निर्दलीय विधायक दुलाल चंद गोस्वामी के साथ आज दोपहर 1.30 बजे सरकार बनाने का दावा पेश करने राजभवन पहुंचे नीतीश ने वहां से अपराह्न करीब ढाई बजे निकलने पर पत्रकारों से कहा कि उन्होंने राज्यपाल से कहा है कि उनके पास पूर्ण बहुमत है और वह 24 से 48 घंटे के भीतर… जो भी समय सीमा राज्यपाल दें, बहुमत साबित करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया है कि नयी सरकार 20 फरवरी से शुरू होने वाले बजट सत्र से पहले बन जानी चाहिए। तीनों नेताओं ने मुलाकात को ‘संतोषजनक’’ बताया। इससे कुछ ही घंटों पूर्व जनता दल यू ने नीतीश के लिए गद्दी छोड़ने से इंकार करने वाले जीतन राम मांझी को अनुशासनहीनता के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया। राज्यपाल को यह भी बताया गया कि कुमार का समर्थन करने वाले 130 विधायक राजभवन के बाहर अपने पहचानपत्र लिए इंतजार कर रहे हैं और यदि वह चाहें तो वह उनसे मुलाकात कर सकते हैं। कुमार ने इसके साथ ही कहा, ‘‘इस पर राज्यपाल ने कहा, इसकी जरूरत नहीं है।’’ कुमार ने बताया कि उन्होंने 20 फरवरी से शुरू हो रहे विधानसभा के बजट सत्र से पूर्व सरकार बनाए जाने की आवश्यकता के संबंध में राज्यपाल को बताया कि उस दिन उन्हें सत्र के पहले दिन दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करना होगा। कुमार ने राज्यपाल से सवाल किया, ‘‘आप किस सरकार का भाषण पढ़ेंगे? सत्र के दौरान किस सरकार का बजट पेश किया जाएगा?’’ बिहार विधानसभा भंग करने के लिए मांझी को अधिकृत करने के कैबिनेट के फैसले के संबंध में कुमार ने कहा कि पूर्व मंत्री विजय चौधरी ने राज्यपाल को कैबिनेट की बैठक के बारे में बताया और उन्हें उन तौर तरीकों के बारे में भी अवगत कराया गया, जिनके जरिए अधिसंख्यक मंत्रियों ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा, ”राज्यपाल को बताया गया कि यदि वह चाहें तो वह सच्चाई की पुष्टि करने के लिए अधिकारियों से कैबिनेट बैठक के बारे में पूछ सकते हैं।’


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