नरेंद्र मोदी ने की ‘स्मार्ट’ पुलिसिंग की वकालत

गुवाहाटी।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘स्मार्ट’ पुलिसिंग की अवधारणा की हिमायत करते हुए आज कहा कि एक कारगर खुफिया नेटवर्क वाले देश को सरकार चलाने के लिए किसी हथियार और गोला बारूद की जरूरत नहीं है। पुलिस बल और खुफिया एजेंसियों पर बल देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वह ऐसा बल चाहते हैं जो कारगर तरीके से देश की कानून व्यवस्था की देखरेख कर सके। यहां आयोजित पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) के सम्मेलन को संबोधित कर रहे मोदी ने कहा ‘‘स्मार्ट (एसएमएआरटी) पुलिसिंग कहें तो ‘एस’ से मेरा तात्पर्य स्ट्रिक्ट कठोर लेकिन संवेदनशील, ‘एम’ से तात्पर्य मार्डन यानी आधुनिक एवं सचल, ‘ए’ से तात्पर्य अलर्ट यानी सतर्क और जवाबदेह, ‘आर’ से तात्पर्य रिलायबल यानी विश्वसनीय एवं प्रतिक्रियावादी तथा ‘टी’ से तात्पर्य टैक्नो सैवी यानी प्रौद्योगिकी का जानकार और दक्ष है।’’ उन्होंने कहा कि पुलिस बल को बेहतर पुलिसिंग सुनिश्चित करने के लिए इन मूल्यों को समाहित करना चाहिए, जिससे उसे अपनी छवि और कार्य संस्कृति में सुधार लाने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री ने आजादी के बाद देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले 33,000 पुलिस कर्मियों को सम्मानित करने की जरूरत पर भी जोर दिया क्योंकि ‘‘यह छोटी मोटी संख्या नहीं है और उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए।’’ मोदी ने कहा कि हथियारों पर बहुत ज्यादा निर्भर हुए बिना एक प्रभावी खुफिया नेटवर्क के माध्यम से देश चलाया जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा ‘‘जिस देश में उच्च श्रेणी का खुफिया नेटवर्क हो, उसे किसी हथियार और गोला बारूद की जरूरत नहीं होती। इसलिए बहुत ही उच्च श्रेणी का खुफिया नेटवर्क होना जरूरी है।’’ मोदी ने कहा कि देश में हालांकि बहुत सारी अच्छी चीजें हो रही हैं ऐसे में सकारात्मक खबरों का समुचित तरीके से प्रकाशन होना चाहिए ताकि लोगों को इसके बारे में पता चल सके। प्रधानमंत्री ने कहा कि पुलिस कल्याण एक और मुद्दा है जिसे महत्व दिए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा ‘‘एक अधिकारी भले ही बहुत अच्छा हो, पर यह महत्वपूर्ण है कि उसके परिवार को अच्छे से रखा जाए।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रोटोकॉल एवं कुछ अन्य उपायों को शामिल करने के बारे में विचार करने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का एक कार्यबल बनाया जाना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ‘शहीदों के बलिदान की विरासत का सम्मान किया जाए तथा समाज में उनके लिए आदर हो।’ उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए एक प्रोटोकॉल होना चाहिए कि उनके (शहीदों के) पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार का जिम्मा बल ले क्योंकि उनकी मौत आम आदमी की सुरक्षा और संरक्षा के लिए दायित्व निर्वहन के दौरान हुई। मोदी ने कहा ‘‘इसके अलावा, प्रत्येक राज्य में एक पुलिस अकादमी हो जहां नए रंगरूटों को प्रशिक्षण दिया जाए और उनके पाठ्यक्रम में, दायित्व निर्वाह के दौरान मारे गए पुलिस कर्मियों का जीवनवृतांत शामिल किया जाना अनिवार्य होना चाहिए।’’

मोदी ने कहा ‘‘एक नयी आधिकारिक सरकारी पुस्तक होनी चाहिए जिसमें नयी पीढ़ी के पुलिस कर्मी इन शहीदों, इनके जीवन, इनके बलिदान के बारे में पढ़ सकें और हर साल इसका नया अद्यतन संस्करण लाया जाना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि इन शहीदों के बारे में प्रत्येक राज्य में स्थानीय भाषा तथा राष्ट्रीय भाषा में ई-बुक लाई जानी चाहिए और यह भले ही छोटी पहल लगती हो लेकिन इससे बहुत प्रेरणा मिलेगी। मोदी ने कहा कि एक पुलिसकर्मी का जीवन हमेशा तनाव से भरा होता है क्योंकि उसका जीवन हमेशा दांव पर होता है और जब तक हम यह सुनिश्चित नहीं कर लेते कि उनके परिवार में शांति और स्थिरता है तब तक वह समाज को अपना ‘पूर्ण’ नहीं दे सकते।

उन्होंने कहा ‘‘यह सरकार की जिम्मेदारी है कि उनके लिए खास कर निचले स्तर वालों के लिए चिकित्सकीय जांच, उनके बच्चों की शिक्षा, आवास आदि की व्यवस्था कर उनका जीवन आसान बनाने के उद्देश्य से कल्याणकारी योजनाएं सुनिश्चित करने के लिए एक व्यवस्थित प्रणाली बनाए।’’ मोदी ने कहा ‘‘हमारी प्राथमिकता वैज्ञानिक तरीके से कल्याणकारी योजनाएं मुहैया कराना होनी चाहिए।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के सबसे बड़े राज्य के सफल मुख्यमंत्री रह चुके गृह मंत्री राजनाथ सिंह और गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए खुद उन्होंने गृह मंत्रालय अपने पास रखा था और उन्हें जमीनी हालात के बारे में और इन मुद्दों से निपटने की पूरी जानकारी है।

राष्ट्रीय राजधानी के बाहर ऐसे सम्मेलन करने के फैसले के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बात को लेकर हर कोई हैरत में है कि क्यों इतने बरसों की परंपरा तोड़ी गई और यह बैठक गुवाहाटी में आयोजित की गई। उन्होंने कहा ‘‘दिल्ली में, हर कोई अपना अलग काम लेकर चला आता है। यहां आप पूरी तरह बैठक पर ध्यान दे रहे हैं। ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि लोग उत्साहित हुए हैं। स्थानीय पुलिस बहुत उत्साहित होगी और मुझे पूरा भरोसा है कि आपने इस तथ्य को महसूस किया है। भविष्य में भी ऐसी बैठकें अन्य राज्यों में आयोजित की जाएंगी।’’ मोदी ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि पुलिस प्रणाली रोबोट की तरह नहीं बल्कि सोच विचार के साथ काम करने वाली हो।


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