छात्राओं को डेरा ले जाने का मामला उलझा, प्राचार्य का तबादला, दो अध्यापक निलम्बित

हरियाणा । सिरसा के कालांवाली राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की छात्राओं को टूर के बहाने डेरा सच्चा सौदा ले जाने पर बुधवार स्कूल में हंगामा फिर से खड़ा हो गया। सभी लोग दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। तब जाकर विभाग की और से घटना के समय स्कूल की कार्यकारी प्राचार्य सरोज वाला का केहरवाला स्कूल में अस्थाई तौर पर तबादला कर दिया था वहीं आरोपी अध्यापिका बिमला व कृष्णा और चुतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को निलम्बित किया गया था। शायद मामला न उठता लेकिन टूर के बाद जैसे ही छात्राओं के साथ स्कूल टीचर देर रात्रि कालांवाली के रेलवे स्टेशन पर पहुंची तो उन्हें घर तक छोडने का कोई प्रावधान नहीं था और तकरीवन छात्राओं मंडी के क्षेत्र के गांवों की थी। कई छत्राऐं अपने अभिभावको को बुलाकर घर पहुंची तो कई छात्राओं ने अपनी सहेलियों के रात बिताई थी जिस पर सुबह मुद्वा उठा था। कई दिनों तक तब मुद्वा चला फिर विभाग के अधिकारी और प्रशासन के अधिकारी मौका पर आए थे और बयान दर्ज कर कार्रवाई की थी। अब फिर मुद्धा उठा है और अभिभावकों की मानें तो अगर कार्रवाई न हुई तो मुद्धा मुद्धा बन सकता है। जांच टीम के सामने अभिभावकों ने छात्राओं को डेरा सच्चा सौदा ले जाए जाने पर आपत्ति जताई तो स्कूल के प्राचार्य ने किसी प्रकार के टूर पर ले जाए जाने की अनुमति देने की बात से ही इंकार कर दिया। बाद में आरोपों में पता चला कि स्कूल की तीन अध्यापिकाएं व एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी छात्राओं को टूर पर ले जाने के बहाने डेरा सच्चा सौदा ले गई थी। इनके साथ डेरा सच्चा सौदा के कालांवाली व सिरसा के छह लोगों पर भी आरोप लगे थे। उन दिनों सिख धर्म के लोगों व अभिवावकों की और से दोषी लोगों के खिलाफ न होने को लेकर स्कूल के प्रांगण में धरना दिया था, वहीं पुलिस थाना कालांवाली में शिकायत भी दर्ज करवाई थी।
जांच अधिकारी फिर पहुंचे
मामले की गंभीरता को देखते हुए बुधवार फिर जांच के लिए खंड शिक्षा अधिकारी मधु जैन मौका पर पहुंची। दोनों पक्ष के ब्यान लेने के बाद खंड शिक्षा अधिकारी की और से कार्रवाई करने बात कही गई है। वहीं अभिवावक राजा सिंह,सतवीर सिंह,जसवीर सिंह व सुखराज सिंह ने कहा कि अगर विभाग व सरकार की और से दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती तो वे मुद्वा बनाकर इसे सिख धर्म में ले जा सकते है। उस समय इनसो नेता दिग्विजय चैटाला ने भी कालांवाली में पीडि़त छात्राओं ने मुलाकात की थी और दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मंाग की थी।
जब सहमी अधिकारी
जैसे ही खड शिक्षा अधिकारी ने स्कूली छात्राओं को अपने पास बुलाकर मामले की जानकारी लेनी चाहिए तो छात्राओं ने तपाक से स्कूल की तीन अध्यापिकाओं का नाम ले दिया वे उन्हें टूर पर लेकर गई थी फिर क्या था सुनते ही अधिकारी सहम गई और सभी छात्राओं को स्कूल के प्रांगण में सुयक्त ब्यान लेने पर राजी हो गई।
यह था मामला
सूत्रों की मानें तो कालांवाली के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की छात्राओं को 29 नवंबर 2014 को रविवार के दिन स्कूल की अध्यापिका वीना एवं कृष्णा ने टूर पर ले जाने की बात कही। छात्राओं से कहा गया कि वे स्कूल की वर्दी में ही रविवार को निर्धारित समय पर स्कूल के सामने एकत्रित हों। यहां से उन्हें टूर पर ले जाया जाएगा। छात्राओं का कहना है कि उन्हें यह नहीं बताया गया कि उन्हें कहां ले जाया जाएगा। रविवार को 200 छात्राएं निर्धारित समय पर स्कूल के सामने एकत्रित हुईं। यहां से अध्यापिका वीना, कृष्णा एवं एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी उन्हें चार बसों में डेरा सच्चा सौदा ले गए और डेरा के सत्संग में शामिल होने को मजबूर किया गया।
क्या था लालच
स्कूल की इंचार्ज सरोज वाला,वीना और कृष्णा व चुतुर्थ कर्मचारी को क्या लालच था और ऐसा हुआ तो क्यों हुआ हम कार्रवाई चाहते है इस प्रकार की बातें भी लोग मौका पर कर रहे थे। वहीं सिख धर्म के काफी लोग अभिभावकों के साथ मौका पर पहुंचे और पूरी कार्रवाई की लोग कहे रहे थे कि शिक्षा का मंदिर है या फिर डेरा की ब्रांच है। सूत्रों की मानें तो अगर आरोपी तीनों स्कूली की अध्यापिकाओं व कर्मचारी और आरोपी लोगों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई न हुई तो विवाद बढ़ सकता है।

क्यों है ये मेहरबानी
शायद शिक्षा विभाग के अधिकारी व कर्मचारी दोषी अध्यापिकाओं पर मेहरबान है सही कारण एक के बाद एक अध्यापिका को बहाल करके इसी स्कूल में नियुिक्त दे रह है। क्योंकि घटना के समय सरकार व विभाग उक्त मुद्धा सिख धर्म और डेरा के बीच न जाए क्योंकि छात्राओं को टूर के बहाने डेरा में ले जाकर धर्म परिर्वतन करवाने के आरोप लगे थे। कार्यकारी प्राचार्य सरोज वाला का एक माह के लिए अस्थाई तौर पर कालांवाली से केहरवाला के लिए डेपूटेशन तवादला किया था और अध्यापिका कृ ष्णा और बीना व चुतुर्थ श्रेणी कर्मचारी निर्मला को सस्पेंड किया था। अब सरोज वाला उक्त स्कूल में फिर से तैनात है वहीं चुतुर्थ श्रेणी कर्मचारी निर्मला को एंडर इंक्वारी बहाल कर दिया था आज अध्यापिका कृ ष्णा और बीना के बारे में जांच होनी थी। सूत्र बताते है कि वहां पर अभिभावक पहुंच गए वरना गुप्त तरीके से जांच करके इन दोनों अध्यापिकाओं को भी बहाल करने की रिपोर्ट विभाग के पास जानी थी। सबाल पैदा होता है कि जब छात्राओं को टूर के बहाने ले जाकर और स्कूल की अध्यापिकाऐं साथ सिरसा जाती है। डेरा की सत्संग में बच्चे बैठते है और उन्हें नामदाम दिया जाता है तो क्या वह उनका विरोध करने पर कोई कार्रवाई नहीं है। खैर कहीं न कहीं शिक्षा विभाग की और से बचाव की बात जो सूत्रों से आ रही है कुछक हद तक हजम होने वाली है। अब विभाग को दबाव कम दिखाई देता होगा इस कारण फिर से जांच टीम आई है। मजेद्वार बात है कि अगर अध्यापिकाओं का कोई दोष नहीं था तो उन्होंने 3 दिसम्बर को पंचायती तौर पर माफी क्यों मांगी थी। आज कुछक बच्चों ने अध्यापिकाओं के हक में ब्यान करवाए तो कुछक ने कहा कि उन्हें टूर का नाम लेकर डेरा लेकर गए थे। अब विभाग अगली कार्रवाई क्या करता है दोषी अध्यापिकाओ बहाल करता है या फिर कोई और सजा देता है ये सबाल है वहीं सिख धर्म के लोग व नाराज अभिभावक आगे क्या फैंसला लेते है ये तो भविष्य के गर्व में है।

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