आसन पर किसी का दबाव नहीं: सुमित्रा महाजन

नई दिल्ली ।  लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने विपक्ष के परोक्ष रूप से लगाये गये इस आरोप को आज पूरी तरह खारिज किया कि वह संभवत: किसी दबाव में काम कर रहीं हैं और विपक्ष को उसकी बात नहीं रखने दे रहीं हैं। शून्यकाल के दौरान अध्यक्ष ने कहा कि सदन में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने आसन के बारे में कुछ कहा है और वह स्पष्ट करना चाहेंगी कि वह किसी की बात की अनदेखी नहीं कर रहीं हैं और ‘‘आसन पर किसी का दबाव नहीं है।’’

इससे पहले खड़गे ने साध्वी निरंजन ज्योति की विवादास्पद टिप्पणी पर प्रधानमंत्री द्वारा सदन में बयान देने की मांग करते हुए कहा, ‘‘मैं यह तो नहीं कह सकता कि आप उनके दबाव में ऐसा कर रहीं हैं, लेकिन….वातावरण ऐसा है कि हम एक घंटे से अपनी बात रखना चाह रहे हैं लेकिन आपका आशीर्वाद नहीं मिला।’’ खड़गे ने कहा कि उन्हें दुःख इस बात का है कि एक घंटे से विपक्ष अपनी बात रखना चाह रहा है लेकिन उसे अनुमति नहीं मिल रही। लोकतंत्र में ऐसा कैसे चलेगा?

कांग्रेस समेत समूचा विपक्ष साध्वी मामले में प्रधानमंत्री से सदन में बयान देने की मांग कर रहा था। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि पहली बात तो यह है कि सदन के कुछ नियम हैं और मुझे उनके अनुसार चलना है। और दूसरा यह कि आप लोगों ने उस विषय पर कोई नोटिस नहीं दिया है जिसे आप उठाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि खड़गे ने केंद्रीय उत्पाद शुल्क के मामले में नोटिस दिया है लेकिन बात वह कोई और उठाना चाहते हैं। सुमित्रा ने कहा, ‘‘आसन पर किसी का दबाव नहीं है। अध्यक्ष होने के नाते मैं किसी सदस्य की बात की अनदेखी नहीं कर रही हूं..मंत्री ने (साध्वी ने) जब माफी मांग ली तो मामला वहीं समाप्त हो जाता है।’’

प्रश्नकाल स्थगित कर विपक्ष की बात नहीं सुनने और आसन पर दबाव के खड़गे के परोक्ष आरोप पर उन्होंने कहा, ‘‘इस प्रकार की टिप्पणियां ना करें तो अच्छा होगा। जब 400 सदस्य मंत्री से उनके प्रश्नों के उत्तर चाहते हैं तो मैं उनकी अनदेखी नहीं कर सकती।’’ इससे पहले खड़गे ने कहा कि सदन के व्यवस्थित नहीं होने पर हंगामे के बीच प्रश्नकाल चलाना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष विपक्ष की आवाज बहुमत से कुचलना चाहता है। उन्होंने कहा कि सदन में विपक्ष के 80 से 90 सदस्य केवल यही मांग कर रहे हैं कि सदन के नेता और प्रधानमंत्री सदन में आकर अपने मंत्री की अनुचित टिप्पणी पर बयान दें।

खड़गे ने कहा कि सारे देश की अपेक्षा है कि प्रधानमंत्री स्वयं सदन में आकर ऐसे अनुचित बयान की निंदा करें। सदन में कांग्रेस के नेता ने शिकायती लहजे में कहा कि पूर्व लोकसभा में 10-20 लोग हंगामा करते थे और सदन स्थगित हो जाता था। आज 80 से 90 विपक्षी सदस्य आपसे कुछ आग्रह कर रहे हैं, मगर अनुमति नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार इस ढंग से सदन को चलाना चाहती है कि बहुमत है तो कुछ भी करेंगे। यह लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा है। अध्यक्ष का संरक्षण सबको बराबर मिलना चाहिए। ‘‘हम सरकार के ऐसे आचरण की निंदा करते हैं।’’

इससे पहले आज सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस, सपा, वाम दल समेत विपक्षी दलों के सदस्य आसन के समीप आकर साध्वी निरंजन ज्योति की विवादास्पद टिप्पणी पर प्रधानमंत्री द्वारा बयान देने की मांग करते हुए नारेबाजी करने लगे लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ने हंगामे के बीच ही प्रश्नकाल चलाया। बाद में तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय ने कोई विषय उठाना चाहा लेकिन आसन से अनुमति नहीं मिलने के विरोध में तृणमूल कांग्रेस, सपा, राजद और वाम दलों के सदस्यों ने सदन से वाकआउट कर दिया।


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