संघ प्रमुख रहे पब्लिक से परे , ऐसे कैसे आयेगी समरसता 

-पत्रिका सवांददाता
अलीपुर।  बाहरी दिल्ली के अलीपुर गावं में समरस भारत , समर्थ भारत के मकसद को लेकर आरएसएस द्वारा आयोजित तीन दिवसीय सम्मलेन ” राष्ट्रिय सेवा संगम” सम्पन्न गया। इस सम्मलेन में  बीजेपी और संघ से जुड़े राष्ट्रिय नेता और देश के जाने माने उद्योगपति और स्वाजसेवी के साथ-साथ देश भर से आये  700 संस्थानों के करीब 4000 प्रमुख लोग शामिल हुए।
इस संगम में सेवा जहाँ आरएसएस और सेवा के क्षेत्र में काम कर रहे प्रमुख लोगों के  विचार मन को भा गए वहीँ आरएसएस प्रमुख के आगमन और प्रस्थान का तरीका भी चर्चा में रहा। इसकी विपरीत केरल से सुप्रसिद्ध संत माता अमृतानंदमयी “अम्मा ” का अपनत्वभाव भी सभी को आत्मविभोर कर गया।  सवाल इस पर भी उठे को आरएसएस से अज़ीम प्रेमजी जैसे उद्योगपति खुद को दूर क्यों रख रहे है।  क्यों उन्होंने कहा की उनका राजनीति और संघ से कोई सम्बन्ध नहीं है।  सवाल इस पर उठे कि  जिसे संघ और बीजेपी  नेता सोनिया गांधी का करीबी और भरष्ट मानते रहे है वह शख्स आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत की बगल में कैसे बैठे है।
जाहिर है यह केवल सेवा का संगम ही  नहीं था बल्कि आरएसएस और बीजेपी के प्रमुख लोगों में उठ रहे  सवालों , शंकाओं का भी संगम था। मंच से राष्ट्र में समरसता और सेवा के मकसद कैसे हासिल करें, इस पर 3 दिन तक मंथन चलता रहा तो दूसरी ओर  तो मंच के सामने बैठे लोगों के मन सवाल उठे  कि   ऐसे कैसे समाज में कैसे समरसता आएगी।  संगम में माता अमृतंदमयी “आमा ” और आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत के आगमन से लेकर प्रस्थान तक के तरीके पर हज़ारों लोगों का ध्यान गया।  “अम्मा ” जब  संगम में उद्घाटन के लिए पहुंची तो अपनी गाड़ी को पंडाल  से  बहुत दूर रोक का उत्तर गयी और लोगों से मिलते हुयी मंच तक पहुंची। मंच से जाते समय भी “आम्मा ” हज़ारों लोगों से मिलते हुए पैदल ही गयी। अम्मा की इस आत्मीय भाव ने साफ़ कर दिया की क्यों “आम्मा ” करोड़ों  दिलों में राज करती है।  इसके विपरीत डॉ मोहन राव भागवत अपनी गाड़ी से सीधे पंडाल के गेट तक पहुंचे और जाते समय भी उनके गाड़ी पंडाल के गेट तक ही पहुंची।  उन्हें किसी से मिलाने तक नहीं दिया गया।  आरएसएस प्रमुख्य का यह अति वीआईपी व्यवहार बेशक सुरक्षा की दर्ष्टि से क्या हो लेकिन सेवा के मकसद से  देश भर से दिल्ली पहुंचे लोगों  दिलों में टीस लेकर गए। उनके बगल में प्रसिद्ध उद्योगपति जीएम राव बैठे थे। जीएमआर ग्रुप पर आरोप लगे थे की  सोनिया गांधी के करीबी होने का लाभ मिला और बड़े बड़े सरकारी ठेके उन्हें मिले।  जिन्हे बीजेपी संघ के कई नेता भरष्ट कहतें है उन्हें कैसे डॉ मोहन राव भगवत अपनी बगल में स्थान दे सकतें है।  जबकि आम स्वंम सेवकों के वे करीब भी नहीं जाते।  ऐसे कैसे समाज में समरसता आयेगी।
इस मौके पर प्रसिद्ध उद्योगपति अज़ीम प्रेम जी भी पहुंचे।  उन्होंने आरएसएस एक सेवा कार्यों की तो  प्रसंसा की लेकिन उन्होंने यह भी साफ़ कर दिया की उनका आरएसएस से कोई सम्बन्ध नहीं है।  अज़ीम प्रेम जी जैसे उद्योगपति क्यों आरएसएस से खुलकर जुड़ नहीं है यह सवाल भी  अज़ीम प्रेम जी के कथन से उठा।
सेवा संगम को सम्बोधित करते हुए सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत ने कहा कि  1989 में संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवारजी जन्म शती पर सेवा निधि बनाई गई थी और अगले एक वर्ष यानी 1990 में ही 10 हजार सेवाकार्य शुरू हो गये थे और अब यह बढ़कर डेढ़ लाख से अधिक हो चुके हैं.  उन्होंने यह भी कहा कि  सेवा में कोई भेद नहीं होता।  इसलिये इसकी पात्रता के लिये हिंदू या स्वयंसेवक होना जरूरी नहीं है। सरसंघचालक ने सभी प्रतिनिधियों से सेवा प्रकल्पों और उनके कार्यों की संख्या बढ़ाने की गति को दुगुनी करने के लिये संकल्प लेने का आह्वान कियाण् उन्होंने संगम में देश भर से आये प्रतिनिधियों को परामर्श दिया कि वे अपने कामकाज का सिंहावलोकन कर सेवा करने वाली देश की सज्जन शक्ति को अपने से जोड़कर साथ.साथ चलें।
परम पूज्य माता अमृतानंदमयी “अमा” ने अपने आशीर्वाद वचन में सम्पूर्ण विश्व में शांति और संतोष का वातावरण बनाने का आह्वाहन किया।  सभी को आगाह किया की यदि देश में आमिर और गरीब के बीच आर्थिक विषमता की खाई कम नहीं हुयी तो हिंसा और युद्ध से बचना है।
Rajender Swamy
Delhi Aaj Tak
9811609522

 

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