Sunday, July 14, 2024
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भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी की जगह मीडिया साक्षात्कार अत्यंत आपत्तिजनक

रीवा। यौन शोषण के बड़े आरोपी भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी होने के बजाय मीडिया साक्षात्कार चल रहा है। यह बात अत्यंत आपत्तिजनक है। बड़ी बेशर्मी से फरमा रहे हैं कि वो लिपटी थीं , मैं नहीं। नारी चेतना मंच ने कहा है कि कितना अधिक गिरा हुआ इंसान है कि अपने बचाव के लिए एक सामान्य फोटो में साथ में खड़ी पहलवान लड़की में अश्लीलता ढूंढ रहा है। आरोपी सांसद बृजभूषण कितनी भी सफाई क्यों ना दे यह बात जगजाहिर है कि इस तरह का यौन शोषण पद और प्रभाव के दुरुपयोग के चलते होता है। महिलाओं के यौन शोषण को रासलीला बनाया जा रहा है। यह भारी विडंबना है कि पीड़ित पहलवान लड़कियों को न्याय की फरियाद करने के लिए देश की राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर में धरने पर बैठना पड़ा है वहीं यौन शोषण मामले में आरोपी बने ब्रजभूषण शरण सिंह शर्मिंदगी महसूस करने की जगह पीड़ित लड़कियों की बड़ी बेशर्मी से चरित्र हत्या करने पर उतारू हैं। इस मामले में एक f.i.r. और होना चाहिए। यह काफी चिंताजनक और आपत्तिजनक बात है कि बेटी बचाओ अभियान का यह हाल है। नारी चेतना मंच ने कहा है कि मामला जाट और ठाकुर समुदाय का नहीं बल्कि स्त्री सम्मान का है। महिला पहलवानों को विधि सम्मत न्याय मिलना चाहिए। यौन शोषण आरोपी बृजभूषण शरण सिंह पर एफ आई आर हो गई है। अब उन्हें जेल भेज कर न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए।

नारी चेतना मंच के संयोजक लोकतंत्र सेनानी अजय खरे , नारी चेतना मंच की वरिष्ठ नेत्री मीरा पटेल , डॉ श्रद्धा सिंह , श्वेता पांडे ने कहा कि दुष्कर्मी माफिया के खिलाफ भाजपा सरकार के दोहरे मापदंड क्यों ? कानून का राज तो सबके लिए बराबर होता है। जाति धर्म आड़े नहीं आती है। अतीक अहमद और बृजभूषण शरण सिंह दोनों उत्तर प्रदेश के ही नहीं उनके बीच आपराधिक रिकॉर्ड में बहुत सारी समानताएं देखने को मिलती हैं। वहीं फर्क यह नजर आता है कि बृजभूषण शरण सिंह भाजपा सांसद हैं जबकि अतीक अहमद पूर्व सांसद थे लेकिन भाजपा में नहीं थे। दोनों बाहुबली के नाम से जाने जाते हैं। विदित हो कि पिछले महीने ही अतीक अहमद की पुलिस अभिरक्षा में हत्या हो चुकी है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कसम खा रखी है कि सभी माफिया को मिट्टी में मिला देंगे लेकिन उनके शासन में भाजपाई माफिया पूरी तरह सुरक्षित हैं। मुख्यमंत्री योगी की मिट्टी में मिला देने की घोषणा के दोहरे मापदंड कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ा रहे हैं। यदि बृजभूषण शरण सिंह भाजपा के सांसद नहीं होते तो पता नहीं उनका कब एनकाउंटर हो जाता या पुलिस अभिरक्षा में मार दिए जाते और घर भी जमींदोज करा दिया जाता लेकिन उनके खिलाफ अभी तो विधि सम्मत कार्यवाही भी नहीं हो पा रही है।

यह भारी विडंबना है कि ऐसे मौके पर यौन शोषण आरोपी एवं माफिया बृजभूषण शरण सिंह फरमाते हैं कि इतने सालों से शोषित पहलवान लड़कियां चुप क्यों थीं?

नारी चेतना मंच की विज्ञप्ति में कहा गया है कि पीड़ित पहलवान लड़कियों की चुप्पी की वजह उनका केरियर , घरेलू सामाजिक दबाव, लोकलाज , राजनीतिक दबाव , बाहुबली का आतंक और उनका संगठित नहीं होना था। आज जब पहलवान लड़कियों के साथ पूरा देश खड़ा है तो उनकी चुप्पी टूट गई। पूरी उम्मीद है कि उन्हें इस लड़ाई में भी सफलता मिलेगी।

नारी चेतना मंच ने कहा है कि भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह अपने ऊपर लगे यौन शोषण के आरोपों के संबंध में गोदी मीडिया ट्रायल के जरिए पहलवान महिलाओं को बदनाम करने वाला गंदा खेल बंद करे। यह भारी विडंबना है कि सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से यौन शोषण मामले में हुई f.i.r. के बाद भी वह बकवास पर बकवास कर रहे हैं। जो भी कहना है अदालत में कहिए। पहलवान लड़कियों के साथ यौन शोषण सहित अन्य अनेक गंभीर मामलों के आरोपी भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह इधर अपनी संभावित गिरफ्तारी से अपने बचाव में फरमा रहे हैं कि मात्र दोषारोपण से कोई अपराधी नहीं हो जाता है। अब उनसे सवाल यह है कि जब आरोपी अदालत में मामला चलने के दौरान एनकाउंटर या पुलिस अभिरक्षा में मार दिए जाते हैं क्या उसे न्याय कहा जाना चाहिए ? यह सही है कि मात्र दोषारोपण से कोई अपराधी नहीं माना जा सकता है। लेकिन वहीं किसी दूसरे माफिया का मारा जाना सही और माफिया बृजभूषण शरण सिंह का बचा रहना सही जैसे दोहरे मापदंड क्या न्याय व्यवस्था को कलंकित नहीं करते हैं।

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