भारत को सुपर पॉवर नहीं, जगद्गुरु बनाना हैः राजनाथ

पत्रिका संवाददाता, नई दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कोई भारत को सुपर पॉवर बनाना चाहता है तो कोई कहता है कि इसे इंटलेक्चुअल पॉवर बनाना चाहता है, लेकिन मैं इसे जगदगुरु बनाना चाहता हूं। मेरा विश्वास है कि 10 से 15 वर्षो के अंदर भारत महाशक्ति बनेगा। वे दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित श्रीराम कॉलेज ऑफ कामर्स के वार्षिक उत्सव में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि भारत ऐसे महापुरुषों का देश रहा है, जिसने न केवल भारत बल्कि विश्व के लोगों को भी अपना माना है। उन्होंने सवाल किया कि क्या हम महाबली बनना चाहते हैं? जिससे कि पास आने से लोग डरें? नहीं। हमें जगदगुरु बनना है, क्योंकि गुरु के पास में खड़े होने पर व्यक्ति आश्वस्त होता है। उसे आनंद की अनुभूति होती है। शक्तिशाली होने के लिए भारत का सम्मान न हो बल्कि एक श्रद्धा के भाव से सम्मान किया जाए, इसलिए मैं इसे जगदगुरु बनाना चाहता हूं। इस दौैरान छात्रों ने उनसे सवाल भी पूछे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मेरा कोई राजनीतिक गुरु नहीं है, लेकिन अटल बिहारी बाजपेयी जी और लालकृष्ण आडवाणी जी हमारे प्रेरणास्रोत हैं। राजनीति में आने के लिए मेंटर की आवश्यकता नहीं होती है। एक छात्र ने सवाल किया कि देश में माओवादी व अलगाववादी बढ़ रहे हैं, उनको मुख्यधारा में लाकर देश के विकास में लगाया जा सकता है?
इसके उत्तर में उन्होंने कहा कि देश में युवाओं के लिए केवल शिक्षा ही नहीं बल्कि कौशल विकास का कार्य भी किया जा रहा है। हम उनको लोन देकर रोजगार से जोड़ सकते हैं। हालांकि, माओवादियों की शिक्षा आदि की व्यवस्था में जितना किया जाना चाहिए, वह नहीं हो पाया है, लेकिन हम इस दिशा में प्रयासरत हैं। देश में हिंदी की दुर्दशा के बारे में उन्होंने कहा कि लार्ड मैकाले की मंशा के हम शिकार हो गए हैं। उन्होंने कहा कि दो फरवरी 1835 में ब्रिटिश संसद में लार्ड मैकाले ने एक पत्र पढ़ा था, जिसमें उसने लिखा था कि मैं भारत में घूमा और पाया कि वहां पर कोई भीख मांगने वाला और चोर नहीं है। ऐसे में वहां शासन करने के लिए जब तक वहां की संस्कृति की रीढ़ नहीं तोड़ी जाती तब तक वहां पर शासन नहीं कर सकते। जब लोग अपनी संस्कृति को भूलकर हमारी संस्कृति को मानने लगेंगे तब वे अपना नैतिक कर्तव्य खो देंगे।

Comments are closed.